अपनी मनपसंद भाषा में पढ़ें :
Ranchi/Bokaro : चास की तंग गलियों में बने एक छोटे से घर में रहती हैं सुनीति झा। उम्र अब ऐसी हो चली है जब कदम धीमे हो जाते हैं और सरकारी दफ्तरों के चक्कर किसी परीक्षा से कम नहीं लगते। हर बार नई उम्मीद लेकर वह दस्तावेज जमा करतीं, पर हर बार खाली हाथ लौट आतीं। पेंशन, जो उनके लिए सहारा बन सकती थी, कागजों में उलझी पड़ी थी। उनकी आंखों में थकान साफ दिखती थी, लेकिन उम्मीद का एक पतला सा धागा अब भी बाकी था। पड़ोसी कहते थे कि दादी महीनों से कोशिश कर रही हैं, पर काम अटका ही रहता है। सुनीति झा जैसी बुजुर्ग महिलाओं के लिए यह संघर्ष सिर्फ पैसे का नहीं, सम्मान और सुरक्षा का भी होता है।
ब्यूटी मंडल का एक ऑनलाइन पोस्ट, जिसने सब बदल दिया
इसी बीच मामला कांग्रेस की सोशल मीडिया कोऑर्डिनेटर ब्यूटी मंडल तक पहुंचा। उन्होंने सुनीति झा की परेशानी को गंभीरता से लिया। दादी की कहानी पढ़कर वही दर्द उन्हें भी महसूस हुआ जो बुजुर्ग अक्सर सरकारी प्रक्रियाओं में झेलते हैं। ब्यूटी मंडल ने यह मुद्दा सोशल मीडिया पर उठाया और बोकारो उपायुक्त को टैग करके लिखा कि एक वृद्ध महिला महीनों से पेंशन पाने के लिए चक्कर काट रही हैं। उनकी पोस्ट में सिर्फ सूचना नहीं थी, बल्कि एक संवेदना थी। यह बात लोगों तक पहुंची, चर्चा शुरू हुई और मामला तेजी से ऊपर तक गया।
ब्यूटी मंडल के पोस्ट पर विधायक ने तुरंत दिया निर्देश
ब्यूटी मंडल की पोस्ट पर चंदनक्यारी के विधायक उमाशंकर राजक ने तुरंत प्रतिक्रिया दी। उन्होंने जिला प्रशासन को निर्देश दिया कि सुनीति झा को बिना देरी योजना से जोड़ा जाए। इस प्रतिक्रिया ने सुनीति झा के मामले को अचानक प्राथमिकता दिला दी। उसी दिन प्रशासन हरकत में आया और कागजों की जांच दोबारा की गई। बोकारो डीसी अजय नाथ झा ने पुष्टि की कि पेंशन स्वीकृत कर दी गई है। साथ ही विभाग को भुगतान प्रक्रिया पूरी करने को कहा गया। यह खबर सुनीति झा तक पहुंची तो उनके चेहरे पर महीनों बाद राहत की मुस्कान दिखी।
@BokaroDc मामले को संज्ञान लेते हुए सुनीति झा जी को पेंशन से जोड़ा जाए। जोहार @HemantSorenJMM @Rabindranathji https://t.co/TJZVNpDBgh
— UMAKANT RAJAK (@umakant_rajak37) December 1, 2025
इसे भी पढ़ें : बूढ़ी आंखों में उम्मीद की लौ अब भी बाकी है… ध्यान दीजिये ‘सरकार’



