अपनी मनपसंद भाषा में पढ़ें :
Ramgarh (Dharmendra Pradhan) : रजरप्पा… नाम सुनते ही लोगों के मन में मंदिर, आस्था और दामोदर नदी का पवित्र किनारा आता है। लेकिन इन्हीं धार्मिक पहचान के बीच एक और पहचान धीरे-धीरे बनती जा रही है, जिसकी चर्चा अब गांव-गांव से लेकर शहर तक फैल चुकी है। यह चर्चा है अवैध कोयले की ढुलाई की, जो स्थानीय लोगों के मुताबिक खुलेआम और बेखौफ तरीके से हो रही है। इलाके के लोग बताते हैं कि यहां दिन निकलते ही सड़क पर बाइकें दौड़ने लगती हैं। कुछ बाइकें आम यात्रियों जैसी दिखती हैं, लेकिन पीछे बंधे बोरे और चालकों की जल्दबाजी यह साफ कर देती है कि यह सामान्य सफर नहीं है। लोगों का दावा है कि हर दिन सैकड़ों बाइकें कोयला लेकर निकलती हैं। सबसे बड़ी बात यह बताई जा रही है कि यह आवाजाही रजरप्पा थाना क्षेत्र के सामने से होकर गुजरती है, लेकिन रोक-टोक कहीं नजर नहीं आती।
सुबह से रात तक चलता रहता है ‘कोयला वाला रास्ता’
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार यह कारोबार किसी एक वक्त तक सीमित नहीं है। सुबह से लेकर देर शाम तक बाइकें और छोटे वाहन आवाजाही करते रहते हैं। एक स्थानीय व्यक्ति ने नाम न छापने की शर्त पर बताया,
“यहां ऐसा लगता है जैसे सड़क नहीं, कोयले की लाइन बन गई हो। दिनभर बाइकें निकलती रहती हैं। जो रोज देखते हैं, उन्हें अब आश्चर्य भी नहीं होता।” लोग कहते हैं कि कई बार तो एक साथ 10-15 बाइकें एक ही दिशा में निकलती दिख जाती हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि इतनी बड़ी संख्या में गाड़ियों की आवाजाही आखिर कैसे अनदेखी रह जाती है।

नए एसपी से उम्मीद
रामगढ़ जिले में नए एसपी मुकेश लुनायत की तैनाती के बाद लोगों को उम्मीद थी कि अवैध कारोबार पर लगाम लगेगी। आमतौर पर नया अधिकारी आते ही थाना क्षेत्रों में सख्ती की चर्चा शुरू हो जाती है। लेकिन रजरप्पा में स्थानीय लोगों की मानें तो हालात नहीं बदले। लोगों का कहना है कि धंधा पहले जैसा ही चल रहा है। यह चर्चा भी तेज है कि कारोबारी इतने निश्चिंत हैं, मानो उन्हें किसी कार्रवाई का डर ही नहीं है। यही बात लोगों को सबसे ज्यादा खटक रही है।
थाना क्षेत्र से गुजरते वाहन, जिम्मेदार बने ‘मौनी बाबा’
रजरप्पा क्षेत्र में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब कोयला लदे वाहन थाना क्षेत्र से होकर गुजरते हैं, पर जिम्मेदार ‘मौनी बाबा’ बने हुए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर किसी सामान्य व्यक्ति की बाइक के कागज भी अधूरे हों तो उसे रोका जा सकता है, लेकिन यहां तो कथित रूप से कोयला ढोने वाली गाड़ियां बिना रोक-टोक निकल रही हैं। लोग कहते हैं कि यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि सिस्टम की भूमिका पर भी सवाल खड़ा करता है।

दामोदर किनारे से ट्रैक्टरों में सप्लाई की चर्चा
इलाके में चर्चा है कि दामोदर नदी किनारे बैरिकेडिंग होने के बावजूद बोकारो की ओर से ट्रैक्टरों में कोयला भरकर रजरप्पा क्षेत्र की तरफ लाया जा रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार यह रास्ता लंबे समय से इस्तेमाल हो रहा है। कई बार रात के समय ट्रैक्टरों की आवाजाही ज्यादा रहती है। ग्रामीणों का कहना है कि ट्रैक्टरों के टायर के निशान और रास्ते पर बिखरे कोयले के टुकड़े यह बताते हैं कि यहां भारी मात्रा में ढुलाई हो रही है।
ओवरब्रिज के नीचे बना रास्ता, चर्चा ने बढ़ाई बेचैनी
रजरप्पा मंदिर से कुछ दूरी पर बने ओवरब्रिज को लेकर भी लोग लगातार बातें कर रहे हैं। चर्चा है कि ओवरब्रिज के नीचे से एक रास्ता बनाकर ट्रैक्टरों को निकाला जाता है। स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि पहले यह इलाका आम आवाजाही के लिए था, लेकिन अब कई बार यहां ट्रैक्टरों की गतिविधि देखी जाती है। अगर यह बात सही है तो यह सिर्फ अवैध ढुलाई का मामला नहीं रहेगा, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी की गंभीर कमजोरी सामने आएगी।

ईंट-भट्ठों तक पहुंच रहा कोयला, नेटवर्क का शक
लोगों के मुताबिक, कोयला सिर्फ निकाला नहीं जा रहा, बल्कि इसकी सप्लाई तय जगहों तक पहुंच रही है। चर्चा है कि अवैध रूप से ढोया गया कोयला आसपास के ईंट-भट्ठों में भेजा जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि यह काम अकेले किसी एक-दो लोगों के बस की बात नहीं। इसके पीछे एक नेटवर्क काम कर रहा है, जिसमें ढुलाई करने वाले, खरीदने वाले और रास्ता देने वाले सब शामिल हो सकते हैं। लोग कहते हैं कि अगर जांच सही तरीके से हो तो यह साफ हो जाएगा कि कोयला कहां से आ रहा है और कहां जा रहा है।
मंथली वसूली की चर्चा, रकम सुनकर लोग हैरान
इलाके में सबसे गंभीर चर्चा वसूली को लेकर है। लोगों का कहना है कि बाइक से कोयला ढोने वालों से हर महीने तय रकम ली जाती है। स्थानीय लोगों के अनुसार बाइक वालों से 3000 रुपये प्रति वाहन मासिक और ट्रैक्टर वालों से 30000 रुपये प्रति माह वसूली की बात कही जा रही है। लोगों का आरोप है कि जो रकम दे देता है, उसके लिए रास्ता खुला रहता है। जो नहीं देता, उसे रोका जाता है या परेशान किया जाता है। यह बात सुनकर इलाके में नाराजगी बढ़ गई है, क्योंकि आम लोग इसे सीधे तौर पर प्रशासनिक नाकामी मान रहे हैं।
ड्राइवरों के नाम पर चर्चा, पर पुष्टि नहीं
स्थानीय बाजार और गांवों में यह चर्चा भी है कि कथित वसूली की जिम्मेदारी रजरप्पा थाना से जुड़े दो सरकारी ड्राइवर और एक निजी ड्राइवर के पास बताई जा रही है। हालांकि इस दावे की पुष्टि किसी आधिकारिक दस्तावेज से नहीं हो पाई है, लेकिन लोगों का कहना है कि जांच एजेंसियां चाहें तो सच सामने लाया जा सकता है। लोग यह भी कहते हैं कि जब इलाके में चर्चा इतनी खुलकर हो रही है, तो जिम्मेदार अधिकारी भी इससे अनजान नहीं हो सकते।
पुल के पास बैरिकेडिंग, जांच के नाम पर वसूली का आरोप
दामोदर नदी पर बना पुल जो रामगढ़ और बोकारो को जोड़ता है, वहां बैरिकेडिंग लगाई गई है। आमतौर पर यह सुरक्षा और जांच के लिए होता है। लेकिन लोगों का आरोप है कि उसी बैरिकेडिंग के आसपास वसूली का खेल चलता है। ग्रामीणों का कहना है कि जांच की जगह कई बार लेन-देन की बातें सुनने को मिलती हैं। इससे आम लोगों में नाराजगी है, क्योंकि इससे पुलिस और प्रशासन की छवि धूमिल होती है।
डर यह भी कि कहीं कोई बड़ा हादसा न हो जाए
स्थानीय लोगों की चिंता सिर्फ अवैध कोयले तक सीमित नहीं है। लोगों का कहना है कि तेज रफ्तार बाइक और ट्रैक्टरों की वजह से सड़क पर दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है। कई बार बाइक चालक जल्दी में रहते हैं और सड़क पर आम लोगों को बचाकर निकलना मुश्किल हो जाता है। ग्रामीण कहते हैं कि अगर यही हाल रहा तो किसी दिन बड़ा हादसा भी हो सकता है।
अब सबकी नजर प्रशासन पर
रजरप्पा क्षेत्र में इस पूरे मामले को लेकर अब लोग खुलकर कहने लगे हैं कि यह सिर्फ अवैध कारोबार नहीं, बल्कि सिस्टम की परीक्षा है। स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन, पुलिस अधीक्षक, खनन विभाग और संबंधित अधिकारियों से मांग की है कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच हो, अवैध ढुलाई पर तुरंत रोक लगे, वसूली की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई हो और नेटवर्क में शामिल लोगों को चिन्हित किया जाए। लोगों का कहना है कि रजरप्पा आस्था का स्थल है, इसे अवैध कारोबार का अड्डा बनने से बचाना जरूरी है।
इसे भी पढ़ें : मुकेश लुनायत ने लिया रामगढ़ SP का चार्ज, बोले- डर नहीं, भरोसे की जगह बने थाना



