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News Samvad : आज 1 मई को वैशाख पूर्णिमा का पर्व सिद्धि योग में मनाया जा रहा है। यह दिन स्नान, दान और पूजा के लिए बहुत शुभ माना जाता है। सुबह स्नान के बाद व्रत और पूजा का संकल्प लिया जाता है और दिन भर धार्मिक कार्य किए जाते हैं। इस दिन भगवान सत्यनारायण, माता लक्ष्मी और चंद्रमा की पूजा का विशेष महत्व होता है।
तिथि और शुभ मुहूर्त
वैशाख पूर्णिमा तिथि का आरंभ 30 अप्रैल की रात 9 बजकर 12 मिनट से हुआ और इसका समापन 1 मई की रात 10 बजकर 52 मिनट पर होगा।स्नान का शुभ समय सुबह 4 बजकर 15 मिनट से 4 बजकर 58 मिनट तक है। अगर इस समय स्नान न कर पाएं तो सूर्योदय के बाद भी स्नान कर सकते हैं।सत्यनारायण भगवान की पूजा का समय सुबह 7 बजकर 20 मिनट से 10 बजकर 39 मिनट तक रहेगा।शाम को माता लक्ष्मी की पूजा 6 बजकर 56 मिनट के बाद की जाएगी।
चंद्रोदय का समय और महत्व
आज चंद्रमा का उदय शाम 6 बजकर 52 मिनट पर होगा। चंद्रमा के पूरी तरह निकलने के बाद अर्घ्य देना चाहिए। इसके बाद ही वैशाख पूर्णिमा का व्रत पूर्ण माना जाता है।व्रत का पारण अगले दिन यानी 2 मई को सुबह 5 बजकर 40 मिनट के बाद किया जाएगा।
स्नान और पूजा की विधि
सुबह जल्दी उठकर दैनिक कामों से निवृत हो जाएं। इसके बाद गंगा स्नान करें। अगर गंगा स्नान संभव न हो तो घर के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान कर सकते हैं।स्नान के बाद साफ कपड़े पहनें और सूर्य देव को जल अर्पित करें। फिर व्रत और पूजा का संकल्प लें।सुबह के समय भगवान सत्यनारायण की पूजा करें और उनकी कथा सुनें। शाम को माता लक्ष्मी की पूजा करें और रात में चंद्रमा को अर्घ्य दें।
दान का महत्व
वैशाख पूर्णिमा पर दान करना बहुत पुण्यदायी माना गया है। अपनी क्षमता के अनुसार दान करें। आप चावल, दूध, सफेद कपड़े, चीनी, खीर, मखाना, मिश्री या चांदी का दान कर सकते हैं।अगर यह सब संभव न हो तो जल का दान भी किया जा सकता है। ऐसा करने से भी पुण्य प्राप्त होता है।
क्यों खास है वैशाख पूर्णिमा
वैशाख पूर्णिमा को बहुत शुभ और फलदायी माना जाता है। इस दिन किए गए स्नान, दान और पूजा से पापों का नाश होता है और जीवन में सुख समृद्धि आती है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन व्रत और पूजा करने से विशेष पुण्य मिलता है।



