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Ramgarh (Dharmendra Pradhan) : रविवार की सुबह 24 साल का शशि उरांव के लिए किसी आम दिन की तरह थी। दोस्तों के साथ घूमने का उत्साह था, हंसी-मजाक था और गर्मी से राहत पाने के लिए डैम में नहाने की प्लानिंग थी। लेकिन किसी ने नहीं सोचा था कि दिन ढलने से पहले यह खुशी का दिन जिंदगी का सबसे मनहूस दिन बन जाएगा। लोहरदगा का रहने वाला शशि उरांव अपने पांच दोस्तों के साथ पतरातु क्षेत्र के मूरकटी गांव आया था। यहां उसका दोस्त गौरव उरांव रहता है। दोस्तों की टोली ने रविवार को बासल-अरसाहा हेसला डैम घूमने का फैसला किया। रास्ते भर हंसी-मजाक चलता रहा। किसी को अंदाजा नहीं था कि यह सफर शशि का आखिरी सफर होगा।
कुछ पल पहले तक सब कुछ सामान्य था
डैम पहुंचने के बाद सभी दोस्त पानी में उतर गए। गर्मी से राहत पाने के लिए वे नहा रहे थे और एक-दूसरे के साथ मस्ती कर रहे थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार माहौल बिल्कुल सामान्य था। कोई तस्वीरें ले रहा था, कोई पानी में तैर रहा था और कोई किनारे बैठकर दोस्तों को देख रहा था। इसी दौरान शशि धीरे-धीरे उस हिस्से की ओर चला गया जहां पानी काफी गहरा था। देखते ही देखते उसका संतुलन बिगड़ा और वह पानी में डूबने लगा। शुरू में दोस्तों को लगा कि वह मजाक कर रहा है, लेकिन कुछ ही सेकंड में जब वह नजरों से ओझल हो गया तो सभी के होश उड़ गए।
दोस्त चीखते रहे, पानी में तलाशते रहे
शशि के अचानक गायब होने के बाद डैम किनारे अफरा-तफरी मच गई। दोस्त उसका नाम लेकर चीखने लगे। कुछ युवक तुरंत पानी में कूद गए और उसे खोजने लगे। आसपास मौजूद लोगों को भी घटना की जानकारी दी गई। कुछ देर पहले तक जहां हंसी की आवाजें गूंज रही थीं, वहां अब बेचैनी और डर का माहौल था। हर कोई बस यही चाहता था कि किसी तरह शशि मिल जाए।
सांस चल रही थी, उम्मीद बाकी थी
काफी मशक्कत के बाद स्थानीय लोगों और दोस्तों ने मिलकर शशि को पानी से बाहर निकाला। उस समय उसकी सांसें चल रही थीं। यह देखकर सभी को लगा कि शायद वह बच जाएगा। दोस्तों ने बिना देर किए उसे बचाने की कोशिश शुरू कर दी। किसी ने मोबाइल पर सीपीआर देने का तरीका देखा, तो किसी ने उसके सीने को दबाकर सांसें लौटाने की कोशिश की। करीब 15 बार सीपीआर दिया गया। हर कोशिश के साथ उम्मीद भी जुड़ी हुई थी कि शशि आंखें खोल देगा।
अस्पताल की ओर भागती उम्मीदें
मौके से उसे तुरंत भुरकुंडा सीसीएल अस्पताल ले जाया गया। रास्ते भर दोस्त उसे आवाज लगाते रहे। कोई उसके हाथ पकड़कर बैठा था तो कोई लगातार उसके चेहरे को देख रहा था। हर किसी की जुबान पर बस एक ही बात थी कि वह किसी तरह बच जाए। लेकिन अस्पताल पहुंचते ही सारी उम्मीदें टूट गईं। डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। यह सुनते ही दोस्तों की आंखों से आंसू छलक पड़े। जिस दोस्त के साथ कुछ घंटे पहले तक वे हंस रहे थे, वह अब हमेशा के लिए उनसे दूर जा चुका था।
चीख-चीत्कार से दहल उठा घर
जैसे ही शशि की मौत की खबर उसके परिवार तक पहुंची, घर में कोहराम मच गया। परिजनों को यकीन ही नहीं हो रहा था कि सुबह घर से निकला उनका बेटा अब कभी लौटकर नहीं आएगा। मां-बाप के लिए यह खबर किसी ठनका से कम नहीं थी। परिवार के लोग बार-बार यही कह रहे थे कि उन्हें क्या पता था कि दोस्तों के साथ घूमने गया शशि अब कभी वापस नहीं आएगा।
हर गर्मी में दोहराया जाता है ऐसा दर्द
स्थानीय लोगों का कहना है कि गर्मी शुरू होते ही बड़ी संख्या में युवक और परिवार डैम और जलाशयों की ओर रुख करते हैं। कई बार लोग पानी की गहराई का अंदाजा लगाए बिना नहाने उतर जाते हैं, जिससे हादसे हो जाते हैं। बासल-अरसाहा हेसला डैम में भी पहले कई बार लोग जोखिम उठाते देखे गए हैं। इसके बावजूद सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। न तो हर जगह चेतावनी बोर्ड लगे हैं और न ही निगरानी की व्यवस्था है।
एक अधूरा सपना छोड़ गया शशि
24 साल की उम्र में शशि के सामने पूरी जिंदगी पड़ी थी। परिवार को उससे कई उम्मीदें थीं। दोस्तों के साथ उसके भी अपने सपने थे, अपनी योजनाएं थीं। लेकिन एक पल की चूक ने सब कुछ खत्म कर दिया।
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