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Palamu : सड़क निर्माण कंपनी के कैंप में गोलीबारी कर दहशत फैलाने और रंगदारी वसूलने की साजिश रच रहे कुख्यात राहुल सिंह गिरोह के चार गुर्गों को पलामू पुलिस ने धर दबोचा है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान विक्रांत सिंह उर्फ सिकराम सिंह (29), संतोष राम (26), मधुकांत प्रजापति (20) और बिक्रम राम (24) के रूप में हुई है। पुलिस का दावा है कि अगर समय रहते कार्रवाई नहीं होती तो निर्माण कंपनी के कैंप पर फायरिंग की घटना हो सकती थी। गिरफ्तार आरोपियों के पास से दो नाइन एमएम पिस्टल, कारतूस, मिसफायर गोलियां और मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं। एसपी कपिल चौधरी ने पूरे मामले का खुलासा करते हुए बताया कि चारों आरोपी राहुल सिंह गिरोह के सक्रिय सदस्य हैं और हैदरनगर क्षेत्र में संचालित सड़क निर्माण कंपनी को निशाना बनाने की तैयारी में जुटे थे।
आधी रात मिली सूचना, तुरंत बनाई गई टीम
एसपी ने बताया कि बीते 30 मई की रात पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि हैदरनगर थाना क्षेत्र में कुछ अपराधी एक जगह जमा होकर डूअर्स कंस्ट्रक्शन कंपनी के वर्कशॉप और कैंप परिसर पर हमला करने की योजना बना रहे हैं। सूचना यह भी थी कि बदमाश कंपनी प्रबंधन को डराकर रंगदारी वसूलना चाहते हैं और सड़क निर्माण कार्य को बाधित करने की मंशा रखते हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए हुसैनाबाद डीएसपी दिव्यांश शुक्ला के नेतृत्व में विशेष टीम का गठन किया गया। सूचना के आधार पर पुलिस ने संभावित ठिकाने की घेराबंदी शुरू कर दी।
पुलिस को देखते ही भागने लगे बदमाश
छापेमारी के दौरान जैसे ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची, वहां मौजूद बदमाशों में हड़कंप मच गया। सभी अलग-अलग दिशा में भागने की कोशिश करने लगे। हालांकि पुलिस पहले से पूरी तैयारी में थी। चारों ओर से घेराबंदी होने के कारण कोई भी बच नहीं सका और चारों को मौके पर ही दबोच लिया गया।
तलाशी में मिले हथियार, खुल गई पूरी साजिश
गिरफ्तारी के बाद जब पुलिस ने चारों की तलाशी ली तो उनके पास से दो नाइन एमएम पिस्टल, दो जिंदा गोलियां, छह मिसफायर गोली, एक खाली मैगजीन और मोबाइल फोन बरामद हुए। पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने कबूल किया कि वे कुख्यात गैंगस्टर राहुल सिंह के हुक्म पर कंपनी के वर्कशॉप परिसर में गोलीबारी करने वाले थे। उनका मकसद कंपनी के कर्मचारियों और अधिकारियों में डर पैदा करना था ताकि रंगदारी की रकम आसानी से वसूली जा सके।
पहले भी बनाया जा चुका था दबाव
जांच के दौरान पुलिस को यह भी जानकारी मिली कि निर्माण कंपनी पर पहले भी गिरोह की ओर से दबाव बनाने की कोशिश की गई थी। रंगदारी मांगने और काम बंद कराने के लिए लगातार धमकियां दी जा रही थीं। इस बार गिरोह ने डर का माहौल बनाने के लिए फायरिंग की योजना बनाई थी। हालांकि पुलिस की सतर्कता के कारण पूरी साजिश अंजाम तक पहुंचने से पहले ही नाकाम हो गई।
सड़क निर्माण परियोजनाओं को निशाना बना रहा गिरोह
एसपी के अनुसार पिछले कुछ समय से आपराधिक गिरोह विकास परियोजनाओं और निर्माण कंपनियों को निशाना बना रहे हैं। ठेकेदारों और कंपनियों से रंगदारी मांगना और काम रोकने की धमकी देना ऐसे गिरोहों की आम रणनीति बन चुकी है। राहुल सिंह गिरोह भी इसी तरह की गतिविधियों में शामिल रहा है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि गिरोह के अन्य सदस्य कहां छिपे हुए हैं और उनके तार किन-किन इलाकों से जुड़े हैं।
फाइनेंस नेटवर्क की भी होगी जांच
एसपी कपिल चौधरी ने बताया कि केवल गिरफ्तार आरोपियों तक जांच सीमित नहीं रहेगी। पुलिस अब गिरोह के फाइनेंस नेटवर्क, हथियार सप्लाई करने वालों और रंगदारी के पैसों के लेन-देन की भी जांच करेगी। इसके साथ ही फरार अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। इस मामले में हैदरनगर थाना में कांड दर्ज किया गया है। सभी गिरफ्तार आरोपियों को पूछताछ के बाद न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
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