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News Samvad : भोजपुरी सिनेमा में अपनी पहचान बनाने वाले अभिनेता पंकज केसरी अब बॉलीवुड और समाज सेवा की दिशा में नई पारी शुरू करने की तैयारी में हैं। आरा, बिहार के रहने वाले पंकज ने बताया कि सफलता का सफर उनके लिए कभी आसान नहीं रहा। संघर्ष और चुनौतियों के बीच उन्होंने लगातार खुद को बेहतर बनाने की कोशिश की।
स्कूल के मंच से शुरू हुआ सफर
पंकज केसरी को अभिनय का शौक स्कूल के दिनों से ही था। पटना में थिएटर से जुड़ने के बाद वह पढ़ाई के लिए मुंबई पहुंचे। वहां कंपनी सेक्रेटरी की पढ़ाई के साथ थिएटर करते रहे। इसी दौरान एमटीवी के एक एंकरिंग शो में चयन हुआ और मनोरंजन जगत में उनके करियर की शुरुआत हो गई।
भोजपुरी फिल्मों से मिली पहचान
उनकी पहली भोजपुरी फिल्म “माई का बेटवा” थी। इसके बाद “बकलोल दूल्हा”, “विधाता” और “प्रतिज्ञा” जैसी फिल्मों ने उन्हें लोकप्रिय बनाया। पंकज बताते हैं कि करियर अच्छा चल रहा था, लेकिन समय के साथ भोजपुरी फिल्मों और गीतों में बढ़ती अश्लीलता को लेकर उनके मन में सवाल उठने लगे। महिलाओं के सम्मान को प्राथमिकता देने वाली सोच के कारण वह कई तरह की सामग्री से असहज महसूस करते थे।
रचनात्मक संतुष्टि की तलाश में पहुंचे साउथ
करीब 50 भोजपुरी फिल्मों में काम करने के बाद उन्होंने दूसरे फिल्म उद्योगों की ओर रुख किया। हैदराबाद में शूटिंग के दौरान एक तेलुगु निर्देशक ने उन्हें मौका दिया। भाषा चुनौती थी, लेकिन मेहनत रंग लाई और उन्हें पहली तेलुगु फिल्म “कालीचरण” मिली। फिल्म सफल रही और इसके बाद उन्होंने करीब दो दर्जन दक्षिण भारतीय फिल्मों में काम किया। उनकी चर्चित फिल्मों में “उस्ताद भगत सिंह” भी शामिल है।
अब बॉलीवुड में भी दिखेंगे
पंकज ने बताया कि इन दिनों वह “अगर मगर” नाम की हॉरर-कॉमेडी फिल्म पर काम कर रहे हैं। इस फिल्म में श्रेयस तलपड़े, मिथुन चक्रवर्ती और संजय कपूर भी नजर आएंगे। इसके अलावा कई हिंदी प्रोजेक्ट उनके पास हैं।
लोकगीतों को बचाने की मुहिम
पंकज इन दिनों भोजपुरी लोकगीतों के पुनर्सृजन में जुटे हैं। उनका नया प्रोजेक्ट “यह हमारा गांव रे” जुलाई में रिलीज होगा। इसमें उदित नारायण समेत कई कलाकार जुड़े हैं। उनका उद्देश्य नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना है।
राजनीति में आने की इच्छा
पंकज केसरी ने राजनीति में आने की इच्छा भी जाहिर की है। उनका कहना है कि समाज में जागरूकता और जिम्मेदारी की भावना बढ़ाना जरूरी है। भविष्य में वह किसी राजनीतिक दल से जुड़कर समाज के लिए काम करना चाहते हैं। उनके मुताबिक राजनीति में आने का मकसद पद हासिल करना नहीं, बल्कि लोगों के बीच सकारात्मक बदलाव लाना है।
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