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Hazaribagh (Dharmendra Pradhan) : हजारीबाग जिले में अवैध कोयला खनन एक बार फिर दो गरीब परिवारों की जिंदगी उजाड़ गया। उरीमारी ओपी क्षेत्र के लुरूंगा में शनिवार को अवैध कोयला खदान की चाल धंस गई। हादसे में शिबू बेदिया और सुखदेव गंझू की मौत हो गई। दोनों मजदूर रोजी-रोटी की तलाश में उस खदान में उतरे थे, लेकिन जिंदा वापस नहीं लौट सके।
स्थानीय कुछ लोगों ने दबे जुबान से सवाल किया कि आखिर कब तक गरीब मजदूरों की लाशें निकलती रहेंगी और अवैध खनन का धंधा बेखौफ चलता रहेगा? हर हादसे के बाद कुछ दिन शोर मचता है, जांच की बात होती है, लेकिन फिर सब कुछ पहले जैसा हो जाता है।
मौत का खेल बना अवैध खनन
स्थानीय लोगों का कहना है कि लुरूंगा इलाके में लंबे समय से अवैध कोयला खनन का खेल चल रहा है। खदानों के अंदर बिना किसी सुरक्षा इंतजाम के मजदूरों को उतार दिया जाता है। न हेलमेट, न सुरक्षा उपकरण और न ही कोई तकनीकी निगरानी। बस कोयला निकालो और ऊपर बैठे लोग कमाई करते रहें। जब चाल धंसती है तो माफिया गायब हो जाते हैं और पीछे छूट जाते हैं रोते-बिलखते परिवार। मजदूरों की जिंदगी की कीमत चंद हजार रुपये से ज्यादा नहीं समझी जाती।
पहले भी कई बार हो चुका है ऐसा हादसा
यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी राउतपारा में चाल धंसने से एक मजदूर की मौत हो चुकी है। वहीं चानो इलाके में दो अलग-अलग हादसों में तीन मजदूरों ने अपनी जान गंवाई थी। यानी कुछ ही समय में कई मजदूर अवैध खनन की भेंट चढ़ चुके हैं। इसके बावजूद न खदानें बंद हुईं और न ही इस धंधे के असली सरगनाओं पर कोई ऐसी कार्रवाई दिखी, जिससे यह कारोबार रुक सके।
आखिर किसके संरक्षण में चल रहा है यह धंधा?
स्थानीय लोगों का इल्ज़ाम है कि संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों को सबकुछ पता है, पर फिर भी सभी मौनी बाबा बने हुए हैं। यह काला कारोबार बेखौफ चलते रहता है। दिन-रात कोयला निकलता है, ट्रैक्टर और अन्य वाहनों से उसकी ढुलाई होती है, लेकिन जिम्मेदार विभागों को कुछ दिखाई नहीं देता। हादसा होने के बाद जरूर प्रशासन एक्टिव नजर आता है, लेकिन कुछ दिनों बाद मामला फिर ठंडे बस्ते में चला जाता है।
गरीब मरता है, माफिया बच निकलता है
हर हादसे में मरने वाला गरीब मजदूर होता है। उसके परिवार के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो जाता है। दूसरी तरफ अवैध खनन से काली कमाई करने वाले माफिया अक्सर कानून की पकड़ से बच निकलते हैं। अगर समय रहते अवैध खनन पर प्रभावी कार्रवाई होती, खदानों को सील किया जाता और पूरे नेटवर्क पर सख्ती से चोट की जाती, तो शायद आज दो और परिवारों के घरों में मातम नहीं पसरा होता।
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