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Ramgarh (Dharmendra Pradhan) : आमतौर पर किसी बड़ी कंपनी या फैक्ट्री में जब कोई ट्रेनिंग या सेमिनार होता है, तो उसकी कुर्सियों पर सिर्फ सूट-बूट वाले अधिकारी या पक्के कर्मचारी ही नजर आते हैं। लेकिन झारखंड के रामगढ़ में स्थित BFCL यानी ‘बिहार फाउंड्री एंड कास्टिंग्स लिमिटेड’ के परिसर में पिछले दिनों नजारा कुछ अलग था। यहां कॉर्पोरेट जगत की एक बेहद जरूरी और संवेदनशील बात को हर उस व्यक्ति तक पहुँचाया गया, जो इस फैक्ट्री की नींव को मजबूत बनाता है।
BFCL ने अपने परिसर में ‘पॉश’ (POSH – कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की रोकथाम) कानून के तहत एक खास जागरूकता सत्र का आयोजन किया। इस सत्र की सबसे खूबसूरत बात यह थी कि इसमें कंपनी के आला अफसरों के साथ-साथ हाउसकीपिंग स्टाफ और संविदा यानी ठेका (कॉन्ट्रैक्ट) पर काम करने वाले मजदूर भी बराबर से शामिल हुए।
जब अधिकारों पर हुई खुलकर बात
अक्सर फैक्ट्रियों और बड़े संस्थानों में नीचे के पायदान पर काम करने वाले कर्मचारी अपने अधिकारों को लेकर अनजान होते हैं। इसी हिचक और अज्ञानता को दूर करने के लिए इस सत्र में बहुत ही आसान और बोलचाल की भाषा में बातचीत हुई।
कर्मचारियों को बताया गया कि कार्यस्थल पर एक पेशेवर और मर्यादित आचरण क्या होता है। किस तरह के व्यवहार को ‘अनुचित’ या गलत माना जाता है। साथ ही अगर कभी कोई अप्रिय घटना या उत्पीड़न होता है, तो शिकायत दर्ज कराने की सही प्रक्रिया क्या है और कंपनी की आंतरिक समिति कैसे उनकी मदद कर सकती है।
सेशन में हर किसी को यह भरोसा दिलाया गया कि एक सुरक्षित, सम्मानजनक और बराबरी वाला माहौल तैयार करने में सिर्फ मैनेजमेंट की नहीं, बल्कि वहाँ काम करने वाले हर एक व्यक्ति की बराबर की जिम्मेदारी है।
‘पद कोई भी हो, सम्मान पर सबका हक बराबर’
इस आयोजन के जरिए BFCL मैनेजमेंट ने एक बेहद मजबूत सामाजिक संदेश भी दिया है। कंपनी ने साफ किया कि सम्मान और सुरक्षा की गारंटी केवल ऊंचे पदों पर बैठे लोगों के लिए नहीं है। चाहे कोई सफाई कर्मचारी हो, सुरक्षाकर्मी हो, कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाला मजदूर हो या फिर कोई बड़ा अधिकारी—गरिमा के साथ काम करने का अधिकार सभी का एक समान है। रोजगार की प्रकृति या रोल के आधार पर किसी के सम्मान को कम नहीं आंका जा सकता।
शारीरिक सुरक्षा ही नहीं, मानसिक सुकून भी जरूरी
आज के दौर में जब कार्यस्थल पर सुरक्षा की बात होती है, तो अक्सर ध्यान हेलमेट, सेफ्टी शूज या मशीनों से बचाव पर ही जाता है। लेकिन बीएफसीएल ने इस रूढ़ि को तोड़ते हुए एक बड़ी बात सामने रखी है। कंपनी का मानना है कि कार्यस्थल पर सुरक्षा केवल शारीरिक सुरक्षा तक सीमित नहीं रह सकती। जब तक कोई कर्मचारी मानसिक और भावनात्मक रूप से खुद को सुरक्षित महसूस नहीं करेगा, तब तक वह अपना शत-प्रतिशत नहीं दे पाएगा। आपसी विश्वास और सम्मान ही किसी प्रगतिशील कार्यस्थल की असली पहचान हैं।
सफर अभी जारी है…
यह कोई एक बार का इवेंट नहीं था, बल्कि कंपनी के उस सिलसिले का हिस्सा है जिसके तहत वह समय-समय पर अपने कर्मचारियों के कल्याण और जागरूक वर्क कल्चर के लिए प्रयास करती रहती है। नियमित तौर पर होने वाले इन संवेदनशील कार्यक्रमों के जरिए बीएफसीएल एक ऐसा माहौल बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है, जहाँ हर व्यक्ति बिना किसी डर के, पूरे स्वाभिमान और मजबूती के साथ अपना काम कर सके।
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