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Patna : गांवों में सड़क, पुल, सिंचाई और दूसरी बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी योजनाओं को लेकर बिहार सरकार अब ज्यादा सख्त नजर आ रही है। शनिवार को मुख्य सचिवालय में विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह ने RIDF यानी ग्रामीण अवसंरचना विकास निधि के तहत चल रही और प्रस्तावित परियोजनाओं की समीक्षा की। बैठक में साफ कहा गया कि जिन योजनाओं का काम धीमा है या स्वीकृति मिलने के बाद भी शुरू नहीं हो पाया है, वहां अब किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अधिकारियों को लंबित परियोजनाओं की सभी बाधाएं जल्द दूर कर निर्माण कार्य में तेजी लाने का निर्देश दिया गया। बैठक में राज्य सरकार के कई विभागों के वरिष्ठ अधिकारी और नाबार्ड के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। समीक्षा के दौरान योजनाओं की प्रगति, फंड के उपयोग और आगे की रणनीति पर विस्तार से चर्चा हुई।
पिछले साल 1865.82 करोड़ रुपये का हुआ वितरण
बैठक में बताया गया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान नाबार्ड की ओर से RIDF के तहत विभिन्न विभागों को कुल 1865.82 करोड़ रुपये वितरित किए गए। विकास आयुक्त ने विभागवार राशि के उपयोग और योजनाओं की प्रगति की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि केवल राशि खर्च करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि योजनाओं का लाभ समय पर लोगों तक पहुंचना भी उतना ही जरूरी है।
इस साल 854 नई परियोजनाओं को मिली प्राथमिकता
वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए राज्य सरकार ने 854 परियोजनाओं को प्राथमिकता सूची में रखा है। इन योजनाओं की अनुमानित लागत 1931.24 करोड़ रुपये है। इनमें पथ निर्माण, ग्रामीण कार्य, जल संसाधन, लघु जल संसाधन, कृषि, पशुपालन समेत कई विभागों की योजनाएं शामिल हैं। सरकार का लक्ष्य ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करना और विकास कार्यों को तेज गति से पूरा करना है।
धीमी रफ्तार वाले कामों पर जताई चिंता
समीक्षा के दौरान विकास आयुक्त ने उन योजनाओं पर नाराजगी जताई जिनका काम तय समय के मुताबिक आगे नहीं बढ़ रहा है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि हर लंबित परियोजना की अलग से समीक्षा करें और जहां भी तकनीकी, प्रशासनिक या अन्य वजहों से काम रुका है, उसे तुरंत दूर किया जाए। उनका कहना था कि विकास योजनाओं में देरी का सीधा असर आम लोगों पर पड़ता है, इसलिए अब किसी तरह की सुस्ती स्वीकार नहीं होगी।
तीन महीने के भीतर भेजनी होगी PCR
बैठक में परियोजनाएं पूरी होने के बाद जरूरी औपचारिकताएं समय पर पूरी करने पर भी जोर दिया गया। विकास आयुक्त ने सभी विभागों को निर्देश दिया कि जिन योजनाओं का काम पूरा हो चुका है, उनका प्रोजेक्ट कंप्लीशन रिपोर्ट (PCR) अधिकतम तीन महीने के भीतर नाबार्ड को भेजा जाए। इससे वित्तीय अंतर कम होगा और नई योजनाओं के लिए फंड जारी करने में आसानी होगी।
नाबार्ड और विभागों के बीच बेहतर तालमेल पर जोर
विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह ने कहा कि ग्रामीण विकास की योजनाएं तभी सफल होंगी जब नाबार्ड और सभी संबंधित विभाग आपसी समन्वय के साथ काम करेंगे। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि हर परियोजना तय समय सीमा के भीतर और गुणवत्ता के साथ पूरी होनी चाहिए, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में विकास का लाभ तेजी से लोगों तक पहुंच सके।
कई विभागों के आला अधिकारी रहे मौजूद
बैठक में वित्त विभाग की सचिव (व्यय) रचना पाटिल के अलावा ग्रामीण विकास, कृषि, सिंचाई, पथ निर्माण, समाज कल्याण, पशु एवं मत्स्य संसाधन, वन विभाग सहित कई विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रधान सचिव, सचिव और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। नाबार्ड के प्रतिनिधियों ने भी विभिन्न परियोजनाओं की स्थिति और फंड से जुड़े विषयों पर अपनी प्रस्तुति दी।
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