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Ranchi : अगर इरादे बुलंद हों और लक्ष्य बिल्कुल साफ, तो दुनिया की कोई भी चुनौती आपको आगे बढ़ने से नहीं रोक सकती। राजधानी रांची के एक युवा ने इस बात को सच साबित करके दिखाया है। शहर के होनहार छात्र हिमांशु हरि ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) परीक्षा-2025 में पूरे देश में 66वीं रैंक हासिल कर अपनी काबिलियत का परचम लहराया है। सबसे खास बात यह रही कि हिमांशु ने यह कठिन परीक्षा किसी दूसरे या तीसरे प्रयास में नहीं, बल्कि अपने पहले ही प्रयास में क्रैक की है। जैसे ही परीक्षा के नतीजे घोषित हुए, हिमांशु के घर पर जश्न का माहौल बन गया और पूरे राज्य में उनकी इस सफलता की चर्चा शुरू हो गई।
शानदार पढ़ाई और विदेशी कंपनियों का आराम छोड़ चुनी वर्दी और देश सेवा की राह
हिमांशु की शैक्षणिक पृष्ठभूमि इतनी मजबूत रही है कि कोई भी हैरान रह जाए। उनकी शुरुआती पढ़ाई रांची के प्रतिष्ठित डीएवी कडरू स्कूल से हुई, जहां उन्होंने प्लस-टू साइंस में बेहतरीन प्रदर्शन किया। इसके बाद वे देश के शीर्ष शिक्षण संस्थानों में गिने जाने वाले दिल्ली के सेंट स्टीफेंस कॉलेज पहुंचे और वहां से अपनी ग्रेजुएशन पूरी की। पढ़ाई का जुनून यहीं नहीं थमा, हिमांशु ने टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (TISS) मुंबई जैसे जाने-माने संस्थान से डेवलपमेंट स्टडीज में मास्टर्स की डिग्री हासिल की।
डिग्री पूरी करने के बाद हिमांशु के सामने कॉर्पोरेट दुनिया के दरवाजे पूरी तरह खुले थे। उन्होंने ‘द इकोनॉमिस्ट’ और ‘बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप’ (BCG) जैसी नामी अंतरराष्ट्रीय कंपनियों में काम किया। इसके बाद वे ‘फाउंडेशन फॉर इकोनॉमिक डेवलपमेंट’ में एसोसिएट प्रोग्राम मैनेजर के पद पर भी कार्यरत रहे। जहां एक तरफ लोग लाखों के पैकेज और एयर-कंडीशंड दफ्तरों में आराम की जिंदगी का सपना देखते हैं, वहीं हिमांशु के दिल में देश के लिए कुछ कर गुजरने का जज्बा उमड़ रहा था। उन्होंने तय किया कि वे अपने ज्ञान और काबिलियत का इस्तेमाल देश की रक्षा और सुरक्षा सेवाओं में करेंगे। इसी सोच के साथ उन्होंने कॉर्पोरेट करियर को अलविदा कहकर UPSC की तैयारी शुरू की।
पिता DGMS में अफसर, निरंतर अनुशासन बना सफलता का आधार
अपनी इस ऐतिहासिक सफलता पर बात करते हुए हिमांशु ने बेहद सादगी से इसका सारा श्रेय अपने माता-पिता के आशीर्वाद और गुरुजनों के सही मार्गदर्शन को दिया। हिमांशु का मानना है कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। सही दिशा में की गई निरंतर मेहनत और अपनी काबिलियत पर भरोसा ही आपको मंजिल तक पहुंचाता है।
हिमांशु के पिता अजीत कुमार रांची क्षेत्र में डीजीएमएस (DGMS) के अंतर्गत डीएमएस (DMS) के प्रतिष्ठित पद पर कार्यरत हैं और उनकी मां उषा कुमार हैं। बेटे की इस शानदार कामयाबी पर डीजीएमएस परिसर और पूरे रांची शहर में खुशी का माहौल है। रिश्तेदारों, दोस्तों और सहयोगियों का घर पर तांता लगा हुआ है। लोग हिमांशु की इस यात्रा को झारखंड के उन हजारों-लाखों युवाओं के लिए एक बड़ी मिसाल मान रहे हैं, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं और देश सेवा के जरिए राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान देना चाहते हैं।
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