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Ranchi : झारखंड में JPSC और जेएसएससी परीक्षाओं को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन के बीच बड़ी खबर सामने आई है। झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) के तीन सदस्यों अजीता भट्टाचार्य, जमील अहमद और अनिमा हांसदा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। तीनों सदस्यों ने अपना त्यागपत्र राज्यपाल संतोष गंगवार को सौंपा था, जिसे राज्यपाल ने मंजूर कर लिया है। तीन सदस्यों के इस्तीफे की खबर ऐसे समय सामने आई है, जब राजधानी रांची में छात्र लगातार परीक्षा व्यवस्था में गड़बड़ी और कथित अनियमितताओं को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। छात्रों की मांग है कि केवल एक परीक्षा रद्द करने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि पूरी परीक्षा व्यवस्था में सुधार को लेकर सरकार को ठोस कदम उठाने चाहिए।
पांच घंटे से ज्यादा चली सरकार और छात्रों की बैठक
छात्र आंदोलन को लेकर सरकार के प्रतिनिधियों और विभिन्न छात्र संगठनों के बीच लंबी बातचीत हुई। बैठक पांच घंटे से ज्यादा समय तक चली। इस दौरान सभी छात्र संगठनों के साथ तीन चरणों में बातचीत की गई। बैठक में छात्रों की अलग-अलग मांगों पर चर्चा हुई। सरकार की ओर से दावा किया गया कि छात्रों की ज्यादातर मांगों को मान लिया गया है और सरकार उनकी समस्याओं के समाधान के लिए तैयार है। हालांकि, बैठक के बाद छात्र संगठनों का रुख अलग रहा। छात्रों का कहना है कि उनकी कई अहम मांगों पर अभी तक कोई ठोस फैसला नहीं लिया गया है। उनका कहना है कि सिर्फ आश्वासन से आंदोलन खत्म नहीं होगा।
सिर्फ 14वीं परीक्षा रद्द करने से छात्र संतुष्ट नहीं
छात्रों की नाराजगी की सबसे बड़ी वजह यह है कि सरकार ने फिलहाल 14वीं परीक्षा को रद्द करने का फैसला लिया है। छात्रों का कहना है कि परीक्षा से जुड़ी समस्याएं केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं हैं। छात्र संगठन दूसरी परीक्षाओं को लेकर भी सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता, गड़बड़ियों की जांच और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा नहीं हो, इसके लिए ठोस व्यवस्था की जरूरत है। छात्रों का कहना है कि जब तक इन मुद्दों पर स्पष्ट फैसला नहीं होता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
तीन जेपीएससी सदस्यों के इस्तीफे से बढ़ी हलचल
इसी बीच JPSC के तीन सदस्यों के इस्तीफे ने पूरे मामले को और चर्चा में ला दिया है। अजीता भट्टाचार्य, जमील अहमद और अनिमा हांसदा ने अपने पद से इस्तीफा दिया था। राज्यपाल संतोष गंगवार ने तीनों के त्यागपत्र को मंजूरी दे दी है। छात्र आंदोलन और परीक्षा व्यवस्था को लेकर पहले से ही सवाल उठ रहे थे। ऐसे समय में आयोग के तीन सदस्यों का एक साथ इस्तीफा देना अहम घटनाक्रम माना जा रहा है। हालांकि, तीनों सदस्यों के इस्तीफे के पीछे क्या वजह रही, इसे लेकर अलग-अलग तरह की चर्चाएं हैं। आधिकारिक तौर पर इस्तीफे के कारणों को लेकर स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।
सोमवार को विधानसभा मार्च की तैयारी
बैठक से कोई ठोस समाधान नहीं निकलने के बाद अब छात्रों की नजर सोमवार को होने वाले विधानसभा मार्च पर है। छात्र संगठनों ने विधानसभा की ओर मार्च करने का ऐलान किया है। छात्रों का कहना है कि उनका प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहेगा। वे किसी तरह की हिंसा, तोड़फोड़ या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के पक्ष में नहीं हैं। छात्र संगठनों का कहना है कि वे अपनी मांगों को सरकार तक मजबूती से पहुंचाना चाहते हैं और इसी उद्देश्य से विधानसभा मार्च किया जाएगा।
सरकार और छात्रों के बीच गतिरोध बरकरार
पूरे मामले में फिलहाल सरकार और छात्रों के बीच गतिरोध बना हुआ है। सरकार का कहना है कि उसने छात्रों की ज्यादातर मांगें मान ली हैं, जबकि छात्र संगठन कह रहे हैं कि कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर अभी फैसला नहीं हुआ है। ऐसे में सोमवार का विधानसभा मार्च काफी अहम माना जा रहा है। अब देखना होगा कि सरकार और छात्र संगठनों के बीच आगे बातचीत का कोई रास्ता निकलता है या आंदोलन और तेज होता है।
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