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Home » स्वास्थ्य सचिव का सख्त फरमान : जांच के बिना मरीज रेफर नहीं, ड्यूटी से गायब मिले डॉक्टर तो…
बिहार

स्वास्थ्य सचिव का सख्त फरमान : जांच के बिना मरीज रेफर नहीं, ड्यूटी से गायब मिले डॉक्टर तो…

August 12, 2026No Comments4 Mins Read
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Patna : बिहार के सरकारी अस्पतालों में इलाज कराने वाले मरीजों को अब बेवजह एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी। स्वास्थ्य विभाग ने जिला अस्पतालों की व्यवस्था को लेकर सख्ती शुरू कर दी है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से मरीजों को सीधे बड़े अस्पतालों में भेजने की व्यवस्था को कम करने का निर्देश दिया गया है। मरीज को रेफर करने से पहले उसकी जरूरी जांच करानी होगी और रेफरल की पूरी जानकारी ऑनलाइन भव्या पोर्टल पर दर्ज करनी होगी।

स्वास्थ्य विभाग के सचिव कुमार रवि ने बुधवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए राज्य के सभी जिला अस्पतालों की स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा की। बैठक में सभी जिलों के सिविल सर्जन, अस्पताल अधीक्षक और विभाग के अधिकारी शामिल हुए। बैठक में डॉक्टरों की उपलब्धता, इमरजेंसी सेवा, ICU, ऑपरेशन थिएटर, सर्जरी और आयुष्मान भारत योजना के इस्तेमाल को लेकर विस्तार से चर्चा हुई।

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70 तरह की सर्जरी का लक्ष्य, ICU और OT को करना होगा मजबूत

स्वास्थ्य सचिव ने सभी जिला अस्पतालों में 24 घंटे इमरजेंसी सेवा को मजबूत करने और ट्राइएज व्यवस्था लागू करने का निर्देश दिया। इसका मतलब यह है कि अस्पताल पहुंचते ही मरीज की हालत देखकर तय किया जाएगा कि किसे तुरंत इलाज की जरूरत है और किस मरीज का उपचार बाद में किया जा सकता है। गंभीर मरीजों को प्राथमिकता के आधार पर इलाज मिलेगा।

सभी जिला अस्पतालों में वेंटिलेटर वाले ICU को जल्द से जल्द चालू करने को कहा गया है। साथ ही जिला अस्पतालों को 70 तरह की सर्जरी करने के लायक बनाने का लक्ष्य दिया गया है। इसके लिए स्त्री रोग, सामान्य सर्जरी और हड्डी रोग के अलग-अलग और चालू ऑपरेशन थिएटर तैयार करने को कहा गया है। जिन अस्पतालों में जगह की कमी है, वहां प्री-फैब संरचना का इस्तेमाल करने का सुझाव दिया गया है।

स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार जुलाई 2026 में राज्य के जिला अस्पतालों में कुल 5,651 सर्जरी हुईं। अररिया 423 सर्जरी के साथ सबसे आगे रहा। नालंदा में 327, भोजपुर में 301, वैशाली में 292 और मधुबनी में 287 सर्जरी की गईं। इनमें मोतियाबिंद, हर्निया, हाइड्रोसील, अपेंडिक्स, ऑर्थोपेडिक और दूसरी जरूरी सर्जरी शामिल हैं।

सदर अस्पताल सासाराम और मुंगेर में भी सर्जरी की संख्या बढ़ी है। सासाराम में 11 अगस्त को 24 घंटे के भीतर 20 सर्जरी सफलतापूर्वक की गईं। वहीं मुंगेर में 10 घंटे के दौरान 12 सर्जरी हुईं। विभाग का कहना है कि जिला अस्पतालों में सर्जरी की सुविधा बढ़ने से मरीजों को इलाज के लिए दूसरे जिले या निजी अस्पताल जाने की जरूरत कम होगी।

आयुष्मान कार्ड से इलाज बढ़ेगा, ड्यूटी से गायब डॉक्टरों पर कार्रवाई

स्वास्थ्य सचिव ने सरकारी अस्पतालों में आयुष्मान भारत योजना के तहत इलाज बढ़ाने पर भी जोर दिया। अब अस्पतालों के कामकाज का आकलन आयुष्मान योजना के तहत किए गए क्लेम के आधार पर भी किया जाएगा। डॉक्टरों को निर्देश दिया गया कि सरकारी अस्पताल में इलाज संभव होने पर मरीजों को बेवजह निजी अस्पताल नहीं भेजें।

सदर अस्पतालों में केवल सिजेरियन डिलीवरी तक आयुष्मान की सेवाएं सीमित नहीं रखने को कहा गया है। हड्डी की सर्जरी, हर्निया, अपेंडिक्स, फिशर, फिस्टुला और मोतियाबिंद जैसी सर्जरी भी ज्यादा से ज्यादा कराने का निर्देश दिया गया है। पात्र मरीजों के इलाज से जुड़े आयुष्मान क्लेम समय पर दर्ज करने होंगे।

बैठक में डॉक्टरों की ड्यूटी को लेकर भी स्वास्थ्य विभाग ने कड़ा रुख अपनाया। सभी अस्पतालों में निर्धारित रोस्टर के अनुसार डॉक्टरों की मौजूदगी सुनिश्चित करनी होगी। निरीक्षण में कोई डॉक्टर बिना अनुमति ड्यूटी से गायब मिला या सरकारी अस्पताल की ड्यूटी के समय निजी क्लिनिक में काम करता पाया गया तो उसके खिलाफ नियम के मुताबिक कार्रवाई की जाएगी।

स्वास्थ्य सचिव ने अधिकारियों से कहा कि पूरे जिले को एक इकाई मानकर काम किया जाए। PHC, CHC, SDH और जिला अस्पताल आपस में जुड़े हुए तरीके से काम करें, ताकि मरीज को इलाज के लिए इधर-उधर भटकना न पड़े। विभाग रेफरल, डॉक्टरों की उपलब्धता और आयुष्मान योजना के प्रदर्शन की नियमित समीक्षा करेगा।

अस्पतालों में ऑनलाइन सिस्टम, उपकरण, ICU, ऑपरेशन थिएटर या दूसरी किसी व्यवस्था में परेशानी आने पर सिविल सर्जन और अस्पताल अधीक्षक विभाग को इसकी जानकारी देंगे। स्वास्थ्य विभाग ने ऐसी समस्याओं का समय पर समाधान कराने में सहयोग का भरोसा दिया है। बैठक के अंत में अधिकारियों और डॉक्टरों से मिलकर काम करने और सरकारी अस्पतालों में मरीजों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराने की अपील की गई।

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