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Patna : पाटलिपुत्र ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप को लेकर सरकार ने साफ कर दिया है कि योजना सिर्फ कागज पर तैयार कर उसे जमीन पर उतारने की जल्दबाजी नहीं होगी। जिन किसानों और भू-स्वामियों की जमीन इस योजना के दायरे में आ रही है, पहले उनकी बात सुनी जाएगी, उनकी शंकाएं दूर की जाएंगी और उनके सुझावों को योजना में जगह दी जाएगी। नगर विकास एवं आवास मंत्री नीतीश मिश्रा ने कहा कि इस योजना की सफलता का सबसे बड़ा आधार जनभागीदारी और लगातार संवाद है।
मंत्री ने कहा कि ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप का मतलब केवल एक नया शहर खड़ा करना नहीं है। यह बिहार के शहरों के भविष्य को आज से बेहतर तरीके से तैयार करने की कोशिश है। इस भविष्य में किसान, भू-स्वामी, स्थानीय लोग, सरकार और दूसरे सभी हितधारक बराबर के भागीदार हैं। इसलिए जिन लोगों की जमीन योजना के दायरे में आ रही है, उनसे सीधे जाकर बात की जाएगी और उनकी बात को गंभीरता से सुना जाएगा।
नीतीश मिश्रा के मुताबिक विभाग ने योजना को व्यापक और सहभागी बनाने के लिए हितधारकों के साथ संवाद का सिलसिला शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में शनिवार को पटना के ऊर्जा ऑडिटोरियम में महत्वपूर्ण बैठक हुई। इसमें विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ नगर निकायों, उद्योग, बैंकिंग, वास्तु और शहरी नियोजन क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। बैठक में पाटलिपुत्र ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप विकास योजना 2047 के प्रस्तावित मॉडल पर विस्तार से चर्चा हुई।
पहले लोगों की बात, फिर जमीन पर योजना
पाटलिपुत्र टाउनशिप को लेकर सबसे अहम सवाल जमीन का है। प्रस्तावित टाउनशिप का क्षेत्र 9 प्रखंडों के 273 गांवों तक फैला है। इसमें पुनपुन, नौबतपुर, मसौढ़ी, फतुहा, संपतचक, पटना ग्रामीण, धनरुआ, दनियावां और फुलवारी के इलाके शामिल हैं। नौबतपुर नगर पंचायत का कुछ हिस्सा और पुनपुन नगर पंचायत का पूरा क्षेत्र भी योजना में शामिल है।
पूरे प्रस्तावित टाउनशिप का क्षेत्र करीब 81,730 एकड़ है। इसमें पुनपुन प्रखंड के 19 गांवों को मिलाकर करीब 3,008 एकड़ का कोर एरिया प्रस्तावित है। इतनी बड़ी जमीन पर शहर बसाने की योजना के साथ स्थानीय लोगों की चिंता स्वाभाविक है। ऐसे में सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती विकास और जमीन से जुड़े लोगों के हितों के बीच संतुलन बनाने की है।
मंत्री ने इसी बात पर जोर देते हुए कहा कि भू-स्वामियों के साथ प्रत्यक्ष संवाद किया जाएगा। उन्हें योजना के हर पहलू की जानकारी दी जाएगी और उनकी आपत्तियों तथा सुझावों पर विचार होगा। उन्होंने कहा कि संवाद की यह प्रक्रिया एक बैठक तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि आगे भी लगातार चलती रहेगी।
योजना के तहत भूमि पूलिंग, भूमि पुनर्संयोजन या लागू भूमि व्यवस्था के जरिए भू-स्वामियों को विकास प्रक्रिया में भागीदार बनाने की संभावनाओं पर विचार किया जा रहा है। जहां जरूरत होगी, वहां लागू कानून और सहमति आधारित व्यवस्था के अनुसार आगे बढ़ने की बात कही गई है।
शहर ऐसा हो जहां रहने के साथ रोजगार भी मिले
सरकार की सोच है कि पाटलिपुत्र टाउनशिप को सिर्फ मकानों का विस्तार न बनाया जाए। यहां सड़क, सार्वजनिक परिवहन, स्कूल, अस्पताल, बाजार, पार्क, जलापूर्ति, सीवरेज और जल निकासी जैसी सुविधाएं एक साथ विकसित हों। पैदल चलने और साइकिल से आने-जाने वालों के लिए भी बेहतर व्यवस्था हो। सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करने के साथ ऐसे विकास पर जोर दिया जाए जिससे लोगों को हर छोटी जरूरत के लिए लंबी दूरी तय न करनी पड़े।
टाउनशिप में पार्क, हरित गलियारे, खेल क्षेत्र और जल निकायों के संरक्षण की भी योजना है। यानी कोशिश यह होगी कि नया शहर बने तो उसके साथ हरियाली और पर्यावरण भी बचा रहे।
दरअसल, पटना की बढ़ती आबादी और लगातार बढ़ती आर्थिक गतिविधियों के कारण शहर पर दबाव बढ़ रहा है। ऐसे में आसपास के इलाकों में यदि योजनाबद्ध तरीके से विकास किया जाता है तो पटना का विस्तार व्यवस्थित ढंग से हो सकता है। नए आवास के साथ कारोबार, निवेश और रोजगार के अवसर भी बढ़ सकते हैं।
बैठक में विभाग के प्रधान सचिव विनय कुमार, सचिव संदीप कुमार आर पुडकलकट्टी, प्रबंध निदेशक सह सचिव अनिमेष कुमार पराशर, बिहार राज्य आवास बोर्ड के प्रबंध निदेशक सह विशेष सचिव निलेश रामचन्द्र देवरे, पटना नगर निगम के नगर आयुक्त यशपाल मीणा समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। इसके अलावा क्रेडाई बिहार, बिहार इंडस्ट्रीज एसोसिएशन, बिहार चैंबर ऑफ कॉमर्स, बैंकिंग क्षेत्र, आईटीपीआई, आईआईए और आईईआई के प्रतिनिधियों ने भी अपने सुझाव दिए।
मंत्री नीतीश मिश्रा ने कहा कि आज की योजना ही कल के शहर की नींव होती है। इसलिए पाटलिपुत्र टाउनशिप को लेकर जो भी फैसला होगा, उसमें लोगों की जरूरत और हित को केंद्र में रखा जाएगा। सरकार का उद्देश्य ऐसा शहर तैयार करना है जहां लोगों को बेहतर घर के साथ रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन और दूसरी जरूरी सुविधाएं एक ही जगह मिल सकें।
पाटलिपुत्र ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप का प्रारूप आम लोगों और विभिन्न हितधारकों से सुझाव तथा आपत्तियां लेने के लिए प्रकाशित किया गया है। अब विभाग किसानों और भू-स्वामियों तक पहुंचकर उनकी बात सुनेगा। मंत्री के मुताबिक, योजना को आगे बढ़ाने में यह संवाद सबसे महत्वपूर्ण कड़ी होगी।
यानी सरकार के सामने अब सिर्फ नया शहर बसाने की चुनौती नहीं है। असली चुनौती यह है कि विकास की इस बड़ी योजना में उस जमीन से जुड़े लोगों का भरोसा भी साथ मिले। नीतीश मिश्रा के बयान से साफ है कि सरकार इस भरोसे को बातचीत और भागीदारी के रास्ते से हासिल करना चाहती है। पाटलिपुत्र टाउनशिप का भविष्य भी काफी हद तक इसी संवाद और सहमति पर निर्भर करेगा।
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