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Home » नेपाल त्रासदी : नौ दिन अंधेरी सुरंग में, होंठों पर ‘हरे कृष्ण’, जन्माष्टमी पर मिली नयी जिंदगी
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नेपाल त्रासदी : नौ दिन अंधेरी सुरंग में, होंठों पर ‘हरे कृष्ण’, जन्माष्टमी पर मिली नयी जिंदगी

September 4, 2026No Comments4 Mins Read
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सुरंग
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Nepal : न रोशनी थी, न बाहर निकलने का रास्ता। नौ दिन तक नेपाल की सुरंग में फंसे संजय साह बस एक उम्मीद के सहारे जिंदा रहे कि कोई उन्हें ढूंढने जरूर आएगा। डर और अंधेरे के बीच वह लगातार ‘हरे कृष्ण’ महामंत्र का जाप करते रहे। शुक्रवार को आखिरकार बचाव दल ने उन्हें सुरक्षित बाहर निकाल लिया। संयोग ऐसा कि उसी दिन कृष्ण जन्माष्टमी थी। यानी जिस कृष्ण का नाम लेकर संजय ने नौ दिन अंधेरे में जिंदगी की आस नहीं छोड़ी, उसी दिन वह फिर खुले आसमान के नीचे थे। बाहर आते ही उन्होंने बताया, “मैं पिछले नौ दिनों से हरे कृष्ण महामंत्र का जाप कर रहा था।”

दूसरों को बचाने की कोशिश में खुद फंस गए

मधेश प्रांत के सप्तरी जिले के रहने वाले संजय नेपाल विद्युत प्राधिकरण में कर्मचारी हैं। परियोजना में वह फोरमैन के तौर पर काम कर रहे थे। हादसे के वक्त वह सुरंग के नियंत्रण कक्ष में मौजूद थे। वहां उनकी जिम्मेदारी लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने की थी। हादसा होते ही संजय ने नियंत्रण कक्ष में मौजूद लोगों को बाहर निकलने के लिए कहा। दूसरे लोग किसी तरह बाहर निकल गए, लेकिन संजय खुद समय रहते बाहर नहीं आ सके। हालात बिगड़ने के साथ वह सुरंग के अंदर फंस गए। इसके बाद उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती थी खुद को संभाले रखना। बाहर क्या हो रहा है, बचाव दल कब पहुंचेगा और वह कब निकल पाएंगे, इसका कोई भरोसा नहीं था। ऐसे में उन्होंने महामंत्र का जाप शुरू किया। बाहर आने के बाद संजय ने सुरक्षा कर्मियों को बताया, “मैं पिछले नौ दिनों से हरे कृष्ण महामंत्र का जाप कर रहा था।”

अंधेरे में उम्मीद का सहारा बना जाप

सुरंग में गुजारे नौ दिनों की कल्पना करना भी मुश्किल है। न बाहर की कोई खबर, न रोशनी का भरोसा और न यह पता कि बचाव कब पूरा होगा। संजय ने बताया कि आसपास तीन या चार लोगों से आवाज के जरिए संपर्क हुआ था। बातचीत के जरिए उन्हें पता चलता रहा कि वह पूरी तरह अकेले नहीं हैं। लेकिन संजय को आशंका है कि सुरंग के और भीतर भी लोग फंसे हो सकते हैं। उनका कहना है कि सुरंग काफी लंबी है और हादसे के दौरान बाढ़ का तेज पानी कुछ लोगों को काफी अंदर तक ले गया हो सकता है। संभव है कि कुछ लोग समय रहते बाहर न निकल पाए हों। संजय की इस जानकारी के बाद बचाव दल ने सुरंग के आगे के हिस्सों में भी तलाश बढ़ा दी है। नेपाल सेना के नेतृत्व में सुरक्षा बल विशेष उपकरणों की मदद से अभियान चला रहे हैं।

साथ में कबीर भी निकले, अस्पताल में भर्ती

संजय के साथ 45 वर्षीय कबीर महर्जन को भी सुरक्षित बाहर निकाला गया। उनकी हालत को देखते हुए आगे इलाज की जरूरत पड़ी। कबीर को हवाई मार्ग से काठमांडो स्थित नेपाल आर्मी अस्पताल, छाउनी ले जाया गया, जहां स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं के कारण उन्हें भर्ती कराया गया है। संजय को सुरंग से बाहर निकालने के बाद त्रिशूली के स्थानीय अस्पताल ले जाया गया। उनकी हालत स्थिर बताई गई है। नौ दिन तक अंधेरे में फंसे रहने के बाद संजय का बाहर आना परिवार और बचाव दल के लिए बड़ी राहत है। लेकिन उनकी कहानी के साथ एक सवाल अभी भी बाकी है। सुरंग के अंदर और कितने लोग फंसे हैं? इस सवाल का जवाब तलाशने के लिए बचाव अभियान जारी है। संजय के लिए हालांकि शुक्रवार की वह घड़ी जिंदगी भर याद रहेगी। नौ दिन तक जिस नाम का जाप करते हुए उन्होंने बाहर आने की उम्मीद बनाए रखी, उसी कृष्ण जन्माष्टमी पर सुरंग का अंधेरा पीछे छूट गया।

इसे भी पढ़ें : पास्ता खाकर नदी में नहाने उतरे तीन किशोर, दो की मिली ला’शें, तीसरे का सुराग नहीं

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