अपनी मनपसंद भाषा में पढ़ें :
Pakur (Jaydev Kumar) : शारदीय नवरात्रि के पावन मौके पर शहर में भक्ति, उल्लास और परंपरा का अनोखा संगम देखने को मिला। पाकुड़ के मारवाड़ी धर्मशाला में भव्य डांडिया उत्सव का आयोजन किया गया, जहां शहर भर से पहुंची महिलाओं और युवतियों ने पूरे उत्साह के साथ हिस्सा लिया। रंग-बिरंगे पारंपरिक परिधानों में सजी महिलाओं ने हाथ में डांडिया थामकर मां दुर्गा की आराधना की और भक्तिमय धुनों पर देर रात तक थिरकती रहीं। पूरे परिसर में खनकती डांडिया स्टिक्स और गुजराती-राजस्थानी गीतों ने उत्सव का माहौल बांध दिया।
मां भगवती की महाआरती से हुई कार्यक्रम की शुरुआत
उत्सव की शुरुआत विधि-विधान के साथ मां दुर्गा की पूजा-अर्चना और महाआरती से हुई। धर्मशाला परिसर में माता रानी की सुंदर झांकी सजाई गई थी। सभी महिलाओं ने सामूहिक रूप से आरती गाकर मां का आशीर्वाद लिया और शहर की सुख-समृद्धि की कामना की। आरती संपन्न होते ही भक्ति गीतों का सिलसिला शुरू हुआ और पूरा माहौल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। इसके बाद पारंपरिक परिधान, यानी चनिया-चोली और राजस्थानी लहंगों में सजी महिलाओं ने ताल से ताल मिलाकर गरबा और डांडिया खेलना शुरू किया।

डांडिया केवल मनोरंजन नहीं, मां दुर्गा की तलवार का प्रतीक
समारोह में शामिल महिलाओं ने डांडिया के धार्मिक महत्व पर बात करते हुए बताया कि यह केवल मौज-मस्ती या लोकनृत्य नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध देवी दुर्गा की महिषासुर पर हुई विजय से है। उन्होंने बताया कि डांडिया में उपयोग होने वाली सजी-धजी लकड़ियां असल में मां दुर्गा की तलवार का प्रतीक मानी जाती हैं। यही वजह है कि इसे पारंपरिक रूप से तलवार नृत्य के तौर पर भी देखा जाता है। इस नृत्य के जरिए बुराई पर अच्छाई की जीत का उत्सव मनाया जाता है।

मेलजोल और प्रतिभा दिखाने का मिला शानदार मंच
महिलाओं ने कहा कि रोजमर्रा की भागदौड़ भरी जिंदगी में ऐसे आयोजन सभी को एक मंच पर लाते हैं। इससे न केवल धार्मिक आस्था मजबूत होती है, बल्कि आपस में मेलजोल बढ़ता है और महिलाओं को अपनी कला और प्रतिभा दिखाने का मौका मिलता है। आयोजन के दौरान कई सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी हुईं, जिसने मौजूद दर्शकों का मन मोह लिया। देर रात तक चले इस कार्यक्रम में भक्ति, भारतीय संस्कृति, उत्साह और सामाजिक एकजुटता का खूबसूरत नजारा देखने को मिला।
इसे भी पढ़ें : झारखंड में कल हटेगी बालू पर लगी NGT की रोक, सिर्फ 14 घाटों से होगा उठाव


