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Patna : बिहार में रबी मौसम की शुरुआत के साथ ही राज्य सरकार ने किसानों को आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक तरीकों से जोड़ने की बड़ी पहल की है। गुरुवार को मुख्यमंत्री सचिवालय स्थित ‘संवाद’ परिसर से मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने वासंतिक (रबी) महाअभियान-2026 की शुरुआत की। उन्होंने हरी झंडी दिखाकर 38 किसान जागरूकता वाहनों और 2 ज्ञान वाहनों को जिलों के लिए रवाना किया। कुल 40 प्रचार वाहन राज्य के अलग-अलग कोनों में घूम-घूमकर किसानों को सरकारी योजनाओं, उन्नत बीजों और खेती के नए तौर-तरीकों की जानकारी देंगे, जिससे लागत घटे और किसानों की आमदनी में इजाफा हो सके।
आधुनिक मशीनों और वैज्ञानिक खेती से घटेगी लागत
इस महाअभियान के तहत गांवों में किसानों को गेहूं, मक्का, दलहन और तिलहन की वैज्ञानिक ढंग से बुआई करने के गुर सिखाए जाएंगे। सरकार का खास जोर इस बात पर है कि किसान पारंपरिक तरीकों के बदले आधुनिक मशीनों का इस्तेमाल करें। खासकर गेहूं की बुआई के लिए जीरो टिलेज और सीड ड्रिल मशीनों के उपयोग को बढ़ावा दिया जाएगा, ताकि जुताई का खर्च कम हो और पैदावार ज्यादा मिले। इसके अलावा, प्रखंड स्तर पर किसानों को रियायती दरों पर जरूरी कृषि सामग्री और उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे। सभी पात्र किसानों को योजनाओं का अनुदान सीधा उनके बैंक खाते में (डीबीटी के जरिए) भेजा जाएगा।

खेत बचाओ चौपाल, ड्रोन तकनीक और मिट्टी जांच पर रहेगा जोर
अभियान के दौरान सिर्फ गाड़ियों से प्रचार ही नहीं होगा, बल्कि धरातल पर कई कार्यक्रम भी चलेंगे। इसके तहत किसान चौपाल, किसान पाठशाला, प्रशिक्षण शिविर और किसान मेलों का आयोजन किया जाएगा। साथ ही ‘कृषि जन कल्याण चौपाल-सह-खेत बचाओ अभियान’ के जरिए किसानों से सीधे बातचीत कर उनकी खेती से जुड़ी समस्याओं का हल निकाला जाएगा। किसानों को खेतों में संतुलित खाद डालने, मिट्टी की जांच कराने और जैविक खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा। अब खेती में ड्रोन के इस्तेमाल को भी बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि दवा और खाद का छिड़काव आसानी से हो सके।
कार्यक्रम के दौरान उप मुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी, कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा, कृषि विभाग के प्रधान सचिव नर्मदेश्वर लाल, मुख्यमंत्री के सचिव संजय कुमार सिंह और कृषि निदेशक मुकेश कुमार लाल सहित विभाग के कई आला अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों का मानना है कि सही समय पर सही जानकारी और सरकारी मदद मिलने से राज्य में रबी फसलों का उत्पादन और उत्पादकता दोनों बढ़ेंगे।

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