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Ramgarh (Dharmendra Pradhan) : पतरातू घाटी के घुमावदार रास्तों से गुजरते हुए जब ठंडी हवाएं चेहरे को छूती हैं, तो दूर से ही नजर आती हैं आधुनिक उद्योग की वो विशाल संरचनाएं, जो राज्य के भविष्य को नई रोशनी देने का ताना-बाना बुन रही हैं। PVUNL यानी पतरातू विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड ने अपने सफर के 12 साल पूरे कर लिए हैं। परियोजना कार्यालय के कॉन्फ्रेंस हॉल में जब स्थापना दिवस का उत्सव शुरू हुआ, तो माहौल केवल एक औपचारिक सरकारी कार्यक्रम भर नहीं था। वहां मौजूद हर चेहरे पर उस 12 साल की मेहनत, चुनौतियों और आगे बढ़ते रहने का संतोष साफ झलक रहा था।
रंग-बिरंगे गुब्बारे, कटता केक और अपनों के बीच बंटी खुशियां
समारोह की शुरुआत महाप्रबंधक (परियोजना) बिष्णु दत्ता दाश द्वारा PVUNL का ध्वज फहराने के साथ हुई। ध्वजारोहण के ठीक बाद नीले आसमान में उड़ते रंग-बिरंगे गुब्बारों ने जैसे इस बात का संदेश दिया कि यह उपक्रम अब नई ऊंचाइयों को छूने के लिए पूरी तरह तैयार है। इसके बाद हॉल में जब केक काटा गया, तो तालियों की गड़गड़ाहट के साथ सभी ने एक-दूसरे का मुंह मीठा कराया। इस खास मौके पर महाप्रबंधक (संचालन) प्रशांत पाटिल और महाप्रबंधक (अनुरक्षण) आरके निरंजन समेत सभी विभागों के प्रमुख और कर्मचारी एक परिवार की तरह जुटे। किसी भी बड़े प्रोजेक्ट की असली रीढ़ उसके कर्मचारी होते हैं, और इस पूरे आयोजन में वही अपनापन और सामूहिकता साफ महसूस की जा सकती थी।

स्क्रीन के उस पार से आया भरोसा और मिला आगे बढ़ने का नया हौसला
तकनीक के इस दौर में दूरी कोई बाधा नहीं बनती। इस उत्सव में दिल्ली से ऑनलाइन जुड़े PVUNL के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ए.के. सहगल और पीवीयूएनएल अध्यक्ष सह एनटीपीसी के निदेशक (परियोजनाएं) के.एस. सुंदरम। दोनों शीर्ष अधिकारियों ने टीम के साथ सीधा संवाद साधा। सीईओ एके सहगल ने अपनी बात रखते हुए कर्मचारियों के पसीने और लगन को सराहा। उन्होंने कहा कि प्लांट के बुनियादी ढांचे को खड़ा करने से लेकर बान्हरडीह कोयला खनन परियोजना के काम को आगे बढ़ाने तक, टीम ने हर मोर्चे पर अपनी काबिलियत साबित की है। साथ ही उन्होंने यह भी याद दिलाया कि कंपनी सिर्फ बिजली बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि आसपास के गांवों और स्थानीय लोगों के जीवन को बेहतर बनाने की जिम्मेदारी भी पूरी निष्ठा से निभा रही है। वहीं केएस सुंदरम ने कर्मचारियों के साथ-साथ उनके परिवारों के त्याग और सहयोग को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि कोई भी बड़ा संयंत्र सिर्फ मशीनों से नहीं चलता, उसके पीछे उन परिवारों का संबल होता है जो अपने सदस्यों को दिन-रात काम करने का हौसला देते हैं।

एक छोटी सी फिल्म में सिमट आया 12 वर्षों का लंबा सफर
कार्यक्रम के दौरान एक विशेष वीडियो प्रस्तुति दिखाई गई। इस छोटी सी डॉक्यूमेंट्री में 12 साल पहले खाली पड़ी जमीन से लेकर आज के इस विशाल परिसर तक की पूरी कहानी दर्ज थी। पत्थरों को तराशने, भारी-भरकम मशीनों को लगाने, विपरीत मौसम में काम करने और हर तकनीकी बाधा को पार करने के दृश्यों ने हॉल में बैठे पुराने कर्मचारियों को भावुक कर दिया। यह सिर्फ एक प्रोजेक्ट की प्रगति रिपोर्ट नहीं थी, बल्कि यह गवाही थी उस वादे की जो झारखंड के विकास और यहां के लोगों के जीवन स्तर को ऊंचा उठाने के लिए किया गया था। उत्सव के अंत में सभी ने एक नए संकल्प के साथ हाथ मिलाया कि आने वाले समय में राज्य को निर्बाध बिजली देकर प्रगति के रास्ते पर और तेजी से आगे बढ़ाया जाएगा।

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