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Patna : बिहार के सरकारी स्कूलों की दशा सुधारने के लिए राज्य सरकार ने खजाना खोल दिया है। कायाकल्प अभियान के तहत प्रदेश के सभी जिलों को कुल 275 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। इस बजट से प्राथमिक से लेकर उच्च विद्यालयों में जरूरी सुविधाओं का विस्तार होगा और बुनियादी ढांचे को दुरुस्त किया जाएगा। शिक्षा विभाग की कोशिश है कि गांव और कस्बों के बच्चों को भी साफ-सुथरे और सुसज्जित माहौल में पढ़ने का मौका मिले।
प्राइमरी से लेकर हाई स्कूल तक का तय हुआ बजट
सरकार ने स्कूलों की श्रेणी के हिसाब से राशि तय की है। प्राथमिक विद्यालयों को उनकी जरूरत के मुताबिक 30 से 40 हजार रुपये दिए जा रहे हैं। वहीं, उच्च विद्यालयों को 50 हजार रुपये की राशि आवंटित की गई है। इस फंड का इस्तेमाल कक्षाओं की छोटी-मोटी मरम्मत, पेयजल की व्यवस्था, शौचालयों की देखरेख और शिक्षण सामग्री जैसी प्राथमिक जरूरतों को पूरा करने में किया जाएगा। स्थानीय स्तर पर बजट मिलने से अब स्कूलों को छोटे-छोटे कामों के लिए जिला मुख्यालय के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।
30 अक्टूबर तक प्रबंध समिति की बैठक करना जरूरी
शिक्षा विभाग ने साफ कर दिया है कि पैसे का इस्तेमाल मनमाने तरीके से नहीं होगा। इसके लिए 30 अक्टूबर से पहले हर विद्यालय में विद्यालय प्रबंध समिति की बैठक बुलाना अनिवार्य कर दिया गया है। बैठक में स्कूल की सबसे जरूरी प्राथमिकताओं पर चर्चा होगी और वहीं पर तय होगा कि किस मद में कितना खर्च किया जाना है। समिति की औपचारिक मंजूरी मिलने के बाद ही विकास कार्यों की शुरुआत की जा सकेगी।
तय समय में काम पूरा कराने का सख्त निर्देश
विभाग ने जिला स्तर के अधिकारियों को पूरी प्रक्रिया पर सीधी नजर रखने को कहा है। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे तय समय-सीमा के भीतर बैठकें पूरी कराएं और प्रस्तावों को मंजूरी दिलाएं। सरकार की मंशा है कि आवंटित राशि का एक-एक पैसा सही जगह खर्च हो और तय समय के भीतर स्कूलों की तस्वीर बदलती हुई नजर आए।
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