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Ranchi : रोज सुबह समय पर दफ्तर पहुंचना, कंप्यूटर स्क्रीन के सामने बैठकर कोलियरी के हिसाब-किताब और जरूरी फाइलों में उलझे रहना। अमूमन यही सीसीएल की महिला अधिकारियों और कर्मचारियों की दिनचर्या होती है। लेकिन मंगलवार का दिन कुछ अलग था। फॉर्मल कपड़ों और काम के तनाव को पीछे छोड़ जब ये महिलाएं सफेद किट, जूते और कैप पहनकर गांधीनगर के महात्मा गांधी क्रीड़ांगन में उतरीं, तो उनका अंदाज देखते ही बनता था। मौका था सीसीएल की एकदिवसीय महिला क्रिकेट प्रतियोगिता का, जहां दफ्तर में गंभीर दिखने वाली महिला कर्मियों ने मैदान पर जमकर पसीना बहाया और चौके-छक्कों की बरसात कर दी।
दिन की शुरुआत भी काफी दिलचस्प रही। जब प्रतियोगिता का उद्घाटन करने पहुंचे सीसीएल के निदेशक (वित्त) पवन कुमार मिश्रा, निदेशक (मानव संसाधन) हर्ष नाथ मिश्र और सीवीओ पंकज कुमार ने खुद बैट और बॉल थाम ली, तो पूरा मैदान तालियों से गूंज उठा। अधिकारियों ने कुछ गेंदें खेलकर टूर्नामेंट का आगाज किया और महिला खिलाड़ियों का जोश दोगुना कर दिया। पवन कुमार मिश्रा ने कहा कि खेल का मैदान असल जिंदगी में आगे बढ़ने का हौसला देता है। वहीं, हर्ष नाथ मिश्र और पंकज कुमार ने माना कि इस तरह के आयोजनों से काम का दबाव हल्का होता है और आपस में जुड़ाव और भरोसा गहरा होता है।
जब पैंथर्स, टाइटन्स और वॉरियर्स के बीच शुरू हुआ रन बनाने का मुकाबला
मैदान पर मुकाबला तीन टीमों के बीच था—सीसीएल पैंथर्स, सीसीएल टाइटन्स और सीसीएल वॉरियर्स। पहले लीग मैच में पैंथर्स ने टाइटन्स को 27 रनों से पछाड़कर अपनी ताकत दिखाई। पैंथर्स ने 91 रन बनाए थे, जिसके आगे टाइटन्स 64 रन ही जोड़ सकी। इसके बाद दूसरे मैच में भी पैंथर्स का दबदबा कायम रहा और उसने वॉरियर्स को 30 रनों से मात देकर सीधे फाइनल का टिकट कटा लिया।
असली रोमांच देखने को मिला तीसरे लीग मुकाबले में, जहां वॉरियर्स और टाइटन्स के बीच फाइनल में पहुंचने की जंग थी। वॉरियर्स की खिलाड़ियों ने ऐसी आक्रामक बल्लेबाजी की कि विपक्षी टीम देखती रह गई। वॉरियर्स ने केवल 2 विकेट पर 130 रनों का पहाड़ जैसा स्कोर खड़ा कर दिया। जवाब में टाइटन्स की टीम 79 रन ही जुटा पाई और वॉरियर्स ने 51 रन के बड़े अंतर से मैच जीतकर खिताबी मुकाबले में एंट्री मार ली।
फाइनल का रोमांच : पैंथर्स ने 137 रन बनाकर वॉरियर्स से छीन ली ट्रॉफी
दोपहर साढ़े बारह बजे जब 10-10 ओवरों का फाइनल मुकाबला शुरू हुआ, तो दोनों टीमों के समर्थकों का शोर चरम पर था। पैंथर्स की टीम पहले बैटिंग करने उतरी और उसके इरादे बिल्कुल साफ थे। बल्लेबाजों ने बिना किसी झिझक के गेंद को सीमा रेखा के पार भेजना शुरू किया। पैंथर्स ने निर्धारित 10 ओवर में महज एक विकेट के नुकसान पर 137 रनों का विशाल स्कोर बोर्ड पर टांग दिया।
जीत के लिए 138 रनों की चुनौती लेकर उतरी वॉरियर्स की टीम ने भी हिम्मत नहीं हारी, लेकिन पैंथर्स की कसी हुई लाइन-लेंथ के सामने उनके नियमित अंतराल पर विकेट गिरते रहे। वॉरियर्स की टीम 10 ओवर में 6 विकेट खोकर 111 रन तक ही पहुंच सकी। इसके साथ ही पैंथर्स ने 26 रन से खिताबी मुकाबला जीतकर ट्रॉफी अपने नाम कर ली। मैच के बाद जब तालियों की गड़गड़ाहट के बीच विजेता और उपविजेता टीमों को ट्रॉफी और मेडल सौंपे गए, तो हार-जीत से परे हर चेहरे पर एक अलग ही चमक और आत्मविश्वास साफ नजर आ रहा था।
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