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Patna : पटना के प्रतिष्ठित पीएमसीएच में स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार के निरीक्षण के बाद बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की गई है। अस्पताल के प्राचार्य डॉ. नरेंद्र प्रताप सिंह को उनके पद से हटा दिया गया है। विभाग की ओर से यह कार्रवाई इसलिए की गई क्योंकि स्वास्थ्य मंत्री के दौरे के दौरान वे ड्यूटी पर मौजूद नहीं थे।जानकारी के अनुसार, 23 जून को स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार अचानक पीएमसीएच पहुंचे थे। निरीक्षण के दौरान उन्होंने अस्पताल की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। इसी दौरान पता चला कि प्राचार्य डॉ. नरेंद्र प्रताप सिंह अस्पताल में मौजूद नहीं हैं।
फोन करने पर भी नहीं मिला जवाब
निरीक्षण के दौरान स्वास्थ्य मंत्री ने प्राचार्य से संपर्क करने की कोशिश की। बताया जा रहा है कि उन्हें फोन भी किया गया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद विभागीय अधिकारियों से जानकारी ली गई तो पता चला कि प्राचार्य ने छुट्टी के लिए कोई आवेदन नहीं दिया था।साथ ही उन्होंने अपनी अनुपस्थिति के दौरान किसी अन्य अधिकारी को प्रभार भी नहीं सौंपा था। इसे प्रशासनिक नियमों का उल्लंघन माना गया और विभाग ने मामले को गंभीरता से लिया।
स्वास्थ्य विभाग ने की कार्रवाई
मामले की जानकारी मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए डॉ. नरेंद्र प्रताप सिंह को प्राचार्य पद से हटा दिया। विभाग का मानना है कि इतने महत्वपूर्ण पद पर बैठे अधिकारी का बिना सूचना अनुपस्थित रहना उचित नहीं है, खासकर तब जब अस्पताल का निरीक्षण किया जा रहा हो।
प्राचार्य ने दी अपनी सफाई
दूसरी ओर, डॉ. नरेंद्र प्रताप सिंह ने अपने ऊपर हुई कार्रवाई को गलत बताया है। उनका कहना है कि वे जानबूझकर ड्यूटी से गैरहाजिर नहीं थे, बल्कि एक दुर्घटना के कारण अस्पताल नहीं पहुंच सके।उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य मंत्री के निरीक्षण से पहले उनका एक्सीडेंट हो गया था। इसी वजह से वे ड्यूटी पर नहीं आ पाए। उनका यह भी कहना है कि विभाग ने उनका पक्ष सुने बिना कार्रवाई कर दी।
बोले, मुझे स्पष्टीकरण देने का मौका मिलना चाहिए था
डॉ. नरेंद्र प्रताप सिंह का कहना है कि किसी भी प्रशासनिक कार्रवाई से पहले संबंधित अधिकारी को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर विभाग उनसे स्पष्टीकरण मांगता तो वे अपनी स्थिति स्पष्ट कर सकते थे।प्राचार्य के अनुसार, दुर्घटना के कारण उनकी तबीयत खराब थी और इसी वजह से वे अस्पताल नहीं पहुंच सके। अब इस मामले को लेकर विभाग और प्राचार्य के बीच अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं। ऐसे में आगे विभाग की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर सभी की नजर बनी हुई है।

