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News Samvad : अक्सर जब जिंदगी में अकेलेपन या लाचारी का अंधेरा घिरता है, तो इंसान सबसे पहले एक सुरक्षित छत और अपनेपन की तलाश करता है। खासकर उन माता-पिता के दिल से पूछिए, जिनके बच्चे दिव्यांग हैं या जो खुद ढलती उम्र में बिल्कुल तन्हा रह गए हैं। उनके मन में हमेशा एक टीस उठती है कि हमारे जाने के बाद इन मासूमों का क्या होगा। इसी गहरी फिक्र और लाचारी को सुकून में बदलने के लिए महाराष्ट्र के कर्जत की हरी-भरी वादियों में एक नई दुनिया की नींव रखी गई है। रिलायंस फाउंडेशन की चेयरपर्सन नीता अंबानी ने रविवार को अपने जन्मदिन के खास मौके पर ‘नीता मुकेश अंबानी अनंत आश्रय’ का भूमिपूजन किया। करीब 100 एकड़ जमीन पर फैलने वाला यह ठिकाना आने वाले दिनों में 5 हजार से ज्यादा अनाथ बच्चों, बुजुर्गों और दिव्यांगों का नया घर बनेगा।
यह सिर्फ रहने की छत नहीं, दिल से जुड़ा एक परिवार है
आम तौर पर जब हम किसी अनाथालय या वृद्धाश्रम की तस्वीर सोचते हैं, तो आंखों के सामने लंबी-लंबी कतारें, फीकी दीवारें और बेबसी का माहौल उभरता है। अनंत आश्रय इस पुरानी सोच को पूरी तरह बदलने जा रहा है। यहां बड़ी-बड़ी ठंडी इमारतों के बजाय छोटे-छोटे सुंदर घर बनाए जाएंगे, जहां लोग बिल्कुल एक संयुक्त परिवार की तरह मिल-जुलकर रहेंगे। इन घरों में रहने वाले बच्चों और बुजुर्गों की दिनचर्या और देखभाल के लिए खास तौर पर प्रशिक्षित केयरटेकर मौजूद रहेंगे। भूमिपूजन के दौरान अपनी बेटी ईशा अंबानी के साथ पहुंचीं नीता अंबानी ने बेहद भावुक होकर कहा कि एक मां होने के नाते वह उस दर्द को समझती हैं जो किसी बेसहारा बच्चे के माता-पिता महसूस करते हैं। उनका मकसद यही है कि हर माता-पिता इस सुकून के साथ जी सकें कि उनके बाद भी उनके बच्चों के सिर पर एक मजबूत हाथ और प्यार भरा परिवार हमेशा रहेगा।
हुनर तराशेंगे, अस्पताल भी होगा और खिलखिलाएगी जिंदगी
अनंत आश्रय में रहने वालों को केवल दो वक्त की रोटी देकर नहीं छोड़ा जाएगा, बल्कि उन्हें अपने पैरों पर खड़ा होने का हौसला भी मिलेगा। परिसर में एक आधुनिक अस्पताल, रिहैबिलिटेशन सेंटर और फिजियोथेरेपी की पूरी व्यवस्था होगी ताकि हर किसी की सेहत का पूरा ख्याल रखा जा सके। इसके साथ ही पढ़ाई-लिखाई, खेलकूद, संगीत और चित्रकला जैसी कलाओं के जरिए प्रतिभाओं को निखारा जाएगा। युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए यहां खुद के कैफे, बेकरी और हैंडीक्राफ्ट सेंटर खोले जाएंगे, जहां वे काम सीखकर कमाई भी कर सकेंगे। परिसर में मंदिर और सुंदर बगीचों के अलावा ‘वंतारा’ की मदद से एक पेट फार्म भी तैयार किया जा रहा है। यहां लोग बेजुबान जानवरों के साथ वक्त बिताकर अपने मानसिक तनाव और अकेलेपन को दूर कर सकेंगे।
15 हजार लोगों का जीवंत शहर, जहां हर दिन होगी नई सुबह
यह प्रोजेक्ट सिर्फ चारदीवारी तक सिमट कर नहीं रहेगा, बल्कि यह करीब 15 हजार लोगों की चहल-पहल वाला एक पूरा कस्बा बनेगा। यहां रहने वाले जरूरतमंदों के साथ-साथ डॉक्टर, थेरेपिस्ट, शिक्षक, स्टाफ और उनके परिवार भी इसी परिसर में बसेंगे। इससे यहां एक ऐसा सामाजिक ताना-बाना बुनेगा जहां कोई भी खुद को बेगाना महसूस नहीं करेगा। इसके अलावा, आसपास के ग्रामीण इलाकों के लोगों को भी यहां के अस्पतालों और जरूरी सुविधाओं का सीधा लाभ मिलेगा। सभी कानूनी और प्रशासनिक मंजूरियां मिलने के बाद इस बड़े प्रोजेक्ट को चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा। नीता अंबानी ने इसे अपने जन्मदिन पर देश की माताओं और भारत मां के चरणों में एक छोटी सी भेंट बताया है, जो आने वाले वक्त में हजारों चेहरों पर मुस्कान लौटाने का जरिया बनेगी।
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