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Bokaro : बोकारो के चन्द्रपुरा की जमुनिया नदी इन दिनों सिर्फ एक नदी नहीं, बल्कि एक खौफनाक राज की गवाह बन गई है। नदी के किनारे रहने वाले लोगों ने शायद कभी नहीं सोचा था कि बहते पानी में एक प्लास्टिक के बोरे के अंदर किसी महिला की लाश मिलेगी, और उस लाश के पीछे 40 हजार रुपये की सुपारी, पुरानी पहचान और गहरी साजिश की इतनी डरावनी कहानी छिपी होगी। जिस महिला का शव नदी से बरामद हुआ, वह कोई अनजान चेहरा नहीं थी। वह बेबी देवी थीं। एक पत्नी, एक मां, एक परिवार की जिम्मेदारी। लेकिन किसी के लिए वह इतनी बड़ी परेशानी बन गईं कि उनकी जिंदगी की कीमत सिर्फ 40 हजार रुपये लगा दी गई।
23 अप्रैल की सुबह नदी ने उगली लाश
23 अप्रैल की सुबह चन्द्रपुरा थाना क्षेत्र के तरंगा पंचायत स्थित चिरूबाद गांव के पास लोगों की नजर जमुनिया नदी में तैरते एक बड़े प्लास्टिक बोरे पर पड़ी। पहले लोगों ने सोचा कोई कचरा होगा, लेकिन जब बोरा किनारे लाया गया तो वहां मौजूद लोगों के पैरों तले जमीन खिसक गई। बोरे के अंदर एक महिला का शव था। खबर फैलते ही पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। गांव में दहशत, लोगों के चेहरों पर डर और पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती सामने थी। आखिर कौन थी यह महिला? किसने इतनी बेरहमी से उसकी हत्या की? और शव को बोरे में बंद कर नदी में क्यों फेंका गया?
गुमशुदगी से हत्या तक का सफर
चन्द्रपुरा थाना में कांड संख्या 45/26 दर्ज हुआ और जांच शुरू हुई। बोकारो एसपी नाथू सिंह मीणा के निर्देश पर बेरमो एसडीपीओ के नेतृत्व में एसआईटी बनाई गई। जांच आगे बढ़ी तो पता चला कि चास थाना क्षेत्र से 20 अप्रैल को एक महिला लापता हुई थी। शक गहराया। पोस्टमार्टम के बाद शव को पहचान के लिए चन्द्रपुरा स्थित डीवीसी अस्पताल के शवगृह में रखा गया। जब बेबी देवी के पति और बेटे वहां पहुंचे, तो उनकी दुनिया उजड़ गई। सामने पड़ी लाश उनकी अपनी बेबी देवी की थी। एक पति की आंखों में अविश्वास था, बेटे की आंखों में डर। परिवार के लिए यह सिर्फ एक हत्या नहीं, बल्कि पूरी जिंदगी के टूट जाने जैसा था।
शक की सुई गई पुराने परिचित पर
परिजनों ने कुछ लोगों पर संदेह जताया। पुलिस ने तकनीकी साक्ष्य जुटाए और जांच की दिशा बदल गई। सबसे पहले पुलिस ने गुड्डू वर्णवाल उर्फ मुकेश और अनिल को सेक्टर-9 इलाके से उठा लिया। पूछताछ शुरू हुई तो कहानी की परतें खुलने लगीं। गुड्डू कोई अजनबी नहीं था। बेबी देवी और गुड्डू के बीच पहले से जान-पहचान थी। यही पहचान धीरे-धीरे विवाद में बदली और फिर मौत की वजह बन गई।
40 हजार में तय हुआ था मौत का सौदा
पूछताछ में जो सामने आया, उसने पुलिस को भी चौंका दिया। गुड्डू वर्णवाल ने अपने साथियों के साथ मिलकर बेबी देवी की हत्या की साजिश रची। शौकत राजा उर्फ गुड्डू अंसारी, जागेश्वर महतो, अनिल कुमार और विवेक कुमार इस साजिश का हिस्सा बने। बेबी देवी को मौत की नींद सुलाने का सौदा महज 40 हजार रुपये में तय किया गया। तय रकम अपराधियों को दे दी गयी। इसके बाद प्लानिंग के तहत महिला की नृशंष हत्या कर दी गयी।
कार बनी हत्या की सबसे बड़ी गवाह
आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस ने स्विफ्ट कार (JH09BG6008) बरामद की। यही कार इस पूरे हत्याकांड की सबसे बड़ी गवाह बनी। कार की जांच में महिला के लंबे बाल मिले। पिछली सीट के नीचे खून के निशान भी पाए गए। साफ था कि हत्या के बाद शव को इसी कार में ले जाया गया। इसके बाद पहचान मिटाने की कोशिश में शव को प्लास्टिक के बोरे में बंद किया गया और जमुनिया नदी में फेंक दिया गया। मानो पानी सब कुछ छिपा देगा। लेकिन सच देर से सही, बाहर आ ही गया।
पांच गिरफ्तार, लेकिन सवाल अभी बाकी
पुलिस ने इस मामले में पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। इनमें गुड्डू वर्णवाल उर्फ मुकेश कुमार, शौकत राजा उर्फ गुड्डू अंसारी, जागेश्वर महतो, अनिल कुमार और विवेक कुमार शामिल हैं। पुलिस ने 8 मोबाइल फोन भी बरामद किए हैं। अब यह जांच की जा रही है कि इस हत्या की साजिश में और कौन-कौन शामिल थे।
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