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राशि। ज्योतिष शास्त्र में नवग्रहों का वर्णन किया गया है। जिसमें शनि ग्रह को महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है।
- शनि को कर्मफल दाता और न्यायदेवता कहा जाता है।
- शनि आयु, रोग, पीड़ा, लोहा, खनिज, सेवक और जल के कारक माने जाते हैं।
- शनि कुंभ और मकर राशि के स्वामी हैं।
- ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, शनि तुला राशि में उच्च और मेष राशि में नीच के माने जाते हैं।
- शनि अपनी स्वराशि कुंभ में गोचर करने जा रहे हैं।
- कुंभ राशि वालों के लिए यह समय कठिन रहने वाला है।
- शनि को सबसे धीमी गति का ग्रह माना जाता है, इसलिए किसी भी राशि पर इनका प्रभाव ज्यादा दिनों तक रहता है।
कुंभ राशि पर शुरू होगा दूसरा चरण
29 अप्रैल को शनि राशि परिवर्तन के साथ ही कुंभ राशि पर शनि की साढ़े साती का दूसरा चरण शुरू होगा। इस चरण को शिखर चरण भी कहते हैं। कहते हैं कि इस चरण में शनि की साढ़े साती अपने चरम पर होती है। इसे कष्टदायी माना जाता है। कुंभ राशि वालों के अलावा कर्क व वृश्चिक राशि के जातकों को सावधान रहना होगा। इन दोनों राशियों से जुड़े लोगों पर शनि ढैय्या 12 जुलाई से प्रारंभ होगी।

