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Home » पूर्वोत्तर में हिंसा के बीच राष्ट्रपति ने दी कैब को मंजूरी
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पूर्वोत्तर में हिंसा के बीच राष्ट्रपति ने दी कैब को मंजूरी

December 13, 2019No Comments7 Mins Read
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अपनी मनपसंद भाषा में पढ़ें :

तिनसुकिया, डिब्रूगढ़ और गोलाघाट के आरएसएस कार्यालयों पर उपद्रवियों ने किया हमला
कृषक मुक्ति संग्राम समिति (केएमएसएस) के प्रमुख अखिल गोगोई गिरफ्तार
असम के 12 जिलों में मोबाइल इंटरनेट पर प्रतिबंध को 48 घंटे तक बढ़ाया
केंद्रीय मंत्री रामेश्वर तेली, भाजपा विधायकों प्रशांत फूकन और बिनोद हजारिका के घरों पर आगजनी का प्रयास
डिब्रूगढ़ और गुवाहाटी में शुक्रवार सुबह 6 बजे से अपराह्न एक बजे तक कर्फ्यू में ढील

नई दिल्ली/गुवाहाटी। असम में पिछले तीन दिन से जारी हिंसक प्रदर्शनों के बीच राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने गुरुवार शाम नागरिकता संशोधन विधेयक (कैब) को मंजूरी प्रदान कर दी। इसके साथ ही सरकार ने इसकी अधिसूचना भी जारी कर दी। लिहाजा अब इस विधेयक ने कानून का रूप ले लिया है। लोकसभा ने सोमवार को इस विधेयक को पारित किया था जबकि संसद के ऊपरी सदन राज्यसभा ने बुधवार को इसे पास किया था। इस नए कानून में पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आने वाले गैर-मुस्लिम शरणार्थियों को भारत की नागरिकता देने का प्रावधान किया गया है।

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गुरुवार देर रात केंद्रीय कानून मंत्रालय ने एक आधिकारिक अधिसूचना जारी करते हुए कहा कि राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने विधेयक पर अपनी सहमति दी है। इसमें 31 दिसम्बर, 2014 तक पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से भारत में आए हिंदुओं, सिखों, बौद्धों, ईसाइयों, जैनियों और पारसियों को नागरिकता देने का प्रावधान है।

इस बीच, असम समेत पूर्वोत्तर के कई राज्यों में बवाल जारी है। बिल को लोकसभा में पेश किए जाने के दिन से जारी प्रदर्शन अब हिंसक हो उठा है। गुरुवार को गुवाहाटी में कर्फ्यू का उल्लंघन कर हजारों लोग सड़कों पर उतर आए। पुलिस को हालात काबू में करने के लिए फायरिंग करनी पड़ी। पुलिस की गोली से तीन लोगों की मौत हो गई। कुछ लोग घायल हुए हैं। कहा जा रहा है कि ये मौतें पुलिस गोलीबारी के दौरान हुई हैं। दो रेलवे स्टेशनों और एक सरकारी कार्यालय में तोड़फोड़ की गई। दो भाजपा विधायकों के घरों पर हमला किया गया और प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच सड़क पर झड़पें हुईं, जो गुरुवार से पूरे असम में नागरिकता (संशोधन) के खिलाफ हिंसक विरोध के रूप में सामने आई हैं।

इससे पहले, गुवाहाटी पुलिस के सूत्रों ने शहर में “संघर्ष में मारे गए लोगों” की पहचान दीपांजल दास (21) और सैम स्टाफोर्ड (32) के रूप में की। तीसरी मृतक महिला है, जिसका नाम बेगम है। उन्होंने कहा कि हिंसा में 12 अन्य घायल हो गए, जिनमें कई गुवाहाटी मेडिकल कॉलेज में भर्ती हैं। उनमें से एक आईसीयू में जिंदगी के लिए जूझ रहा है। घायलों में चार महिलाओं की हालत भी गंभीर बताई गई है। कामरूप जिले के दीपांजल दास के रिश्तेदारों ने बताया कि वह गुवाहाटी के सैनिक भवन कैंटीन में कर्मचारी था और रिक्शा चालक का बेटा था।

राज्यपाल जगदीश मुखी और मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने राज्य के लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है। सोनोवाल ने प्रदर्शनकारियों से हिंसा का रास्ता नहीं अपनाने का अनुरोध किया और आंदोलनकारी नेताओं के साथ बातचीत करने की बात कही। पता चला है कि इसके बावजूद सोनोवाल के गृह नगर डिब्रूगढ़ के चबुआ में प्रदर्शनकारियों ने सर्किल कार्यालय और रेलवे स्टेशन पर तोड़फोड़ की। प्रदर्शनकारियों ने पनीटोला के एक अन्य स्टेशन को भी निशाना बनाया है। केंद्र ने असम और त्रिपुरा में रेल सेवाओं को निलंबित कर दिया है। लंबी दूरी की ट्रेनों को गुवाहाटी और कामाख्या में रोक दिया गया है। उन्हें यहीं से चलाया जा रहा है। रेलवे सुरक्षा विशेष बल की 12 कंपनियों को तैनात किया गया है।

इस बीच, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की लगभग 20 कंपनियों को (लगभग 2,000 जवानों को) शुक्रवार को असम जाने के लिए तैयार रखने का निर्देश दिया है। सूबे के 12 जिलों में मोबाइल इंटरनेट पर प्रतिबंध को 48 घंटे तक बढ़ा दिया, जबकि गुवाहाटी में अनिश्चितकालीन कर्फ्यू जारी है। हालांकि डिब्रूगढ़ और गुवाहाटी में शुक्रवार सुबह छह बजे से अपराह्न एक बजे तक कर्फ्यू में ढील दी गई है। आधिकारिक सूत्रों की मानें तो गैर-बीएसएनएल ब्रॉडबैंड सेवाओं को भी निलंबित कर दिया गया है।
पूर्वोत्तर के अन्य राज्यों के साथ ही असम में भी बुधवार को अचानक विरोध प्रदर्शन तेज हो गया। आंदोलनकारियों से निपटने में विफल रहने पर असम के एडीजी (कानून व्यवस्था) और गुवाहाटी के पुलिस कमिश्नर तथा वहां को चारों डीसीपी को हटा दिया गया। उनके स्थान पर नए अधिकारियों की तैनाती की गई है।

सूत्रों का कहना है कि जोरहाट में पुलिस ने कृषक मुक्ति संग्राम समिति (केएमएसएस) के प्रमुख अखिल गोगोई को गिरफ्तार किया है, जो विरोध प्रदर्शनों में शामिल प्रमुख संगठनों में से एक है। गोगोई को गोलाघाट से गुरुवार देर रात एक वरिष्ठ अधिवक्ता के घर से पुलिस ने गिरफ्तार किया है। राज्य के एक शीर्ष पुलिस अधिकारी ने कहा कि जमीन पर स्थिति “गंभीर” बनी हुई है। एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि ” गुवाहाटी की स्थिति नियंत्रण में है लेकिन पूरे राज्य में झड़पें हो रही हैं। गुवाहाटी के चांदमारी इलाके में आसू के नेतृत्व में सांस्कृतिक और शिल्पी समाज के लोग शुक्रवार तड़के से सड़क पर बैठकर शांतिपूर्ण तरीके से कैब का विरोध कर रहे हैं।
एक पुलिस अधिकारी ने कहा, ” इससे पहले जहां कहीं भी बर्बरता की खबरें आई हैं, हम उन क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। हम भीड़ को तितर-बितर करने की कोशिश कर रहे हैं।” गुवाहाटी हवाई अड्डे पर एक अधिकारी ने कहा कि यात्रियों की आवाजाही के लिए बसों को तैनात करने से पहले प्रदर्शनकारियों ने वाहनों को क्षेत्र में प्रवेश करने से रोक दिया।

उधर, डिब्रूगढ़ में प्रदर्शनकारियों ने सांसद एवं केंद्रीय राज्य मंत्री रामेश्वर तेली और दो भाजपा विधायकों प्रशांत फूकन और बिनोद हजारिका के घरों पर आगजनी का प्रयास किया। उपद्रवियों को काबू में करने के लिए पुलिस ने हवाई फायरिंग की और जिले के विभिन्न अन्य स्थानों पर आंसू गैस का इस्तेमाल किया। अधिकारियों ने कहा कि तिनसुकिया, डिब्रूगढ़ और गोलाघाट के आरएसएस कार्यालयों पर भी उपद्रवियों ने हमला किया। डिब्रूगढ़ में एक कार्यालय के सामने कुछ मोटरसाइकिलों में आग लगा दी गई, जो आरएसएस से संबंधित लोगों की थीं। भाजपा विधायक प्रशांत फूकन ने कहा, “ घर पर हमले के दौरान कुछ कांच की खिड़कियां टूट गईं और एक कार की स्क्रीन टूट गयी। आंदोलन उपद्रवियों के हाथों में चला गया है, कोई नहीं जानता कि कौन क्या कर रहा है? ”

असम विधानसभा के स्पीकर हितेंद्र नाथ गोस्वामी, जो जोरहाट निर्वाचन क्षेत्र से भाजपा के विधायक हैं, ने कहा, “नागरिकता संशोधन विधेयक (कैब) राज्य के विभिन्न समुदायों के बीच नफरत पैदा करेगा। मैं यह बहुत पहले से कह रहा हूं।”
गुवाहाटी में कर्फ्यू की अनदेखी कर हजारों लोग गुरुवार को लतासिल मैदान में इकट्ठा हुए, जहां छात्र नेताओं, कार्यकर्ताओं, सांस्कृतिक प्रतीक, बुद्धिजीवियों और वरिष्ठ संपादकों ने “शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक विरोध आंदोलन” जारी रखने पर जोर दिया। ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (आसू) के सलाहकार और सभा के मुख्य आयोजकों में से एक, समुज्जल भट्टाचार्य ने कहा, “सांसदों ने इस विधेयक को वोटों के माध्यम से पारित किया। आज लोगों ने इसे अपने वोटों से खारिज कर दिया। उन्होंने कर्फ्यू का उल्लंघन किया और कैब को नकार दिया। उन्होंने कहा कि अब आगे का आंदोलन अहिंसक और अनुशासित होगा। हम अपने वकीलों के साथ चर्चा कर रहे हैं। उनकी सलाह के अनुसार हम कैब के मुद्दे पर अदालतों का रुख करेंगे।

इस बीच, पड़ोसी मेघालय की राजधानी शिलॉन्ग में जिला प्रशासन ने अगले आदेश तक गुरुवार रात 10 बजे से लुमडिन्गजरी और सदर के दो पुलिस थाना क्षेत्रों में कर्फ्यू लगा दिया है। राज्य में गुरुवार शाम 5 बजे से 48 घंटों के लिए मोबाइल इंटरनेट और एसएमएस सेवाओं को निलंबित कर दिया गया है।

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