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Ranchi : झारखंड सरकार की समन्वय समिति के सदस्य और पूर्व मंत्री बंधु तिर्की ने राज्य में मंत्रियों और वीआईपी सुरक्षा को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने सीधे शब्दों में कहा कि अगर ड्यूटी पर तैनात सुरक्षाकर्मी खुद ही सुरक्षित नहीं रहेंगे, तो वे सूबे के वरिष्ठ और अनुभवी मंत्री राधाकृष्ण किशोर की सुरक्षा कैसे कर पाएंगे?
बंधु तिर्की ने DGP और पुलिस के आला अधिकारियों को दो टूक कहा है कि वे दफ्तरों में बैठकर नियम तय करने के बजाय जमीनी और व्यावहारिक हकीकत को देखें। उन्होंने मांग की है कि नियमों और प्रोटोकॉल के तहत इस मामले में तुरंत सटीक फैसला लिया जाना चाहिए।
बंधु तिर्की का सवाल- 2 गाड़ियों में 16 सुरक्षाकर्मी चलेंगे, तो अलर्ट कैसे रहेंगे?
बंधु तिर्की ने कहा कि वित्त, वाणिज्य कर, योजना एवं विकास और संसदीय कार्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर के पास लंबा संसदीय और प्रशासनिक अनुभव है। उन्होंने कोई राजनीतिक बयानबाजी नहीं की है और न ही सरकार या प्रशासन के खिलाफ कोई बात कही है। उन्होंने तो सिर्फ व्यवस्था की उस व्यावहारिक कमी को उजागर किया है, जिससे सीधे तौर पर सुरक्षाकर्मियों की जान जोखिम में पड़ रही है। तिर्की ने सवाल उठाया कि आखिर 16 सुरक्षाकर्मी सिर्फ दो गाड़ियों में ठंसकर सफर करते हुए अपनी ड्यूटी मुस्तैदी से कैसे निभा सकते हैं?
‘मंत्री की बात को हल्के में न ले पुलिस प्रशासन’
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता बंधु तिर्की ने पुलिस महकमे को चेतावनी देते हुए कहा कि सुरक्षाकर्मी की सुरक्षा सीधे तौर पर उस व्यक्ति की सुरक्षा से जुड़ी होती है, जिसकी हिफाजत के लिए उन्हें तैनात किया गया है। इसलिए माननीय मंत्री की बातों को किसी भी नजरिए से हल्के में लेना ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि तय प्रोटोकॉल और नियमों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए, वरना इसका गलत असर हमारी पूरी संसदीय और विधायी व्यवस्था पर पड़ेगा। वरिष्ठ मंत्री की सुरक्षा से खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
नक्सलियों के निशाने पर रहे हैं मंत्री किशोर, पहले भी हो चुका है हमला
मामले की गंभीरता बताते हुए बंधु तिर्की ने याद दिलाया कि मंत्री राधाकृष्ण किशोर पर पहले भी नक्सलियों द्वारा जानलेवा हमला किया जा चुका है। वे जिस क्षेत्र से आते हैं, वह हमेशा से नक्सल प्रभावित रहा है। झारखंड और यहां की जनता के हित में बड़े फैसले लेने और अपनी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों को निभाने के कारण वे हमेशा से नक्सलियों और उन तत्वों के निशाने पर रहे हैं, जो झारखंड का भला नहीं चाहते।
देर होने से खराब होगी झारखंड की छवि
तिर्की ने कहा कि जिस तरह से यह पूरा मामला सामने आया है, उससे न सिर्फ सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं बल्कि पूरे झारखंड की छवि भी खराब हो रही है। यह मामला सिर्फ एक मंत्री का नहीं, बल्कि राज्य के सभी वीआईपी और आम जनता के भरोसे से जुड़ा हुआ है। इसलिए डीजीपी को इस पर बिना देर किए व्यावहारिक और ठोस निर्णय लेना चाहिए, ताकि समाज में एक अच्छा संदेश जाए और पुलिस प्रशासन पर सबका भरोसा कायम रहे।
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