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Ranchi : राजधानी रांची की गलियों में इस समय एक अजीब-सी हलचल है। कहीं कुम्हार की आरी की आवाज है तो कहीं बच्चों की हंसी-ठिठोली। कहीं दुकानों पर खरीदारों की भीड़, तो चौक-चौराहों पर सजती झालरें और मूर्तिकारों की व्यस्त हथौड़ी की खनक बता रही हैं कि मां अम्बे यानी दुर्गा मइया का आगमन बस होने ही वाला है। लेकिन इस उमंग और उल्लास के बीच प्रशासन की जिम्मेदारियां भी उतनी ही बढ़ जाती हैं। हर कोई यही चाहता है कि इस बार की दुर्गा पूजा सिर्फ भव्य ही नहीं, बल्कि सुरक्षित और सौहार्दपूर्ण भी हो।
पूजा की रौनक और प्रशासन की चिंता
जहां एक ओर घर-घर में पूजा की तैयारी हो रही है, वहीं प्रशासन के माथे पर जिम्मेदारी की शिकन साफ दिखाई देती है। हर साल लाखों लोग पंडालों में उमड़ते हैं, झांकियों को निहारते हैं और माता के जयकारे लगाते हैं। इस भीड़ को संभालना, सुरक्षा देना और शांति बनाए रखना किसी चुनौती से कम नहीं। इसी को लेकर शनिवार को समाहरणालय सभागार में रांची के DC मंजूनाथ भजंत्री और DIG सह पुलिस कप्तान चंदन कुमार सिन्हा ने बैठक की। मकसद था शांति और सुरक्षा को लेकर समितियों के तमाम सदस्यों और समाजसेवियों के साथ विचार-विमर्श करना। मौके पर DC और SSP ने कई निर्देश दिये। यह बैठक महज़ औपचारिकता नहीं, बल्कि भरोसे की एक डोर थी… जहां हर कोई एक ही मकसद के लिए जुटा था कि “मां दुर्गा की पूजा बिना किसी बाधा के, मिल-जुलकर हो।”
समिति के लोगों ने दिये सुझाव
बैठक में समितियों के सुझाव सीधे आम लोगों की परेशानियों को बयान कर रहे थे। सबका यही कहना था कि पंडालों के पास साफ-सफाई हो, पानी समय पर मिले, बिजली बिना कटे जलती रहे, महिलाओं की सुरक्षा मजबूत हो, और विसर्जन में कोई अव्यवस्था न हो।
फेक न्यूज पर शिकंजा कसने को बनेगी निगरानी टीम
पहले जमाने में अफवाहें चौराहों तक सीमित रहती थीं, लेकिन आज सोशल मीडिया की दुनिया में एक झूठी खबर मिनटों में शहर का माहौल बिगाड़ सकती है। इसलिए प्रशासन फेक न्यूज पर शिकंजा कसने की तैयारी कर रही है। इसके लिए खास निगरानी टीम बनाने ऐलान किया गया है।
पूजा समितियां ही प्रशासन की “आंख, कान और पैर” : SSP
ड्रोन, सीसीटीवी, महिला पुलिस बल, ट्रैफिक प्लान… सबकी व्यवस्था की जा रही है। लेकिन असली सुरक्षा लोगों के विश्वास और सहयोग से ही बनती है। SSP चंदन सिन्हा ने भी यही कहा कि पूजा समितियां ही प्रशासन की “आंख, कान और पैर” हैं। बिना उनके सहयोग के इतना बड़ा आयोजन सफल नहीं हो सकता।
पूजा तभी सफल होगी जब हर कोई अपनी जिम्मेदारी निभाएगा : DC
बैठक के DC मंजूनाथ भजंत्री ने साफ कहा… “हम 24 घंटे जनता के साथ हैं, बस नागरिक भी सहयोग करें। प्रशासन और जनता का रिश्ता दोतरफा है। पूजा तभी सफल होगी जब हर कोई अपनी जिम्मेदारी निभाएगा। चाहे वह एक वॉलंटियर हो या घर से पंडाल घूमने निकला कोई श्रद्धालु।

डीसी मंजूनाथ भजंत्री ने दिये ये निर्देश
- दुर्गा पूजा के दौरान कानून-व्यवस्था और लोगों की सुरक्षा प्रशासन की सबसे बड़ी प्राथमिकता होगी।
- सभी पूजा समितियां बिजली का लोड, वायरिंग और फायर सेफ्टी की जांच कराएँ और संबंधित पदाधिकारी से एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) लें।
- असामाजिक तत्वों पर प्रशासन जीरो टॉलरेंस नीति अपनाएगा।
- सभी पंडालों में सीसीटीवी कैमरे, वॉलिंटियर्स के आईडी कार्ड और यूनिफॉर्म की व्यवस्था हो।
- थाना प्रभारी अपने-अपने क्षेत्र के पंडालों से लगातार संपर्क में रहें। बिना पुलिस बल के विसर्जन नहीं होगा।
- विसर्जन में जाने वाले वाहनों की फिटनेस जांच होगी। ड्राइवर की भी जांच होगी और शराब पीकर गाड़ी चलाने पर सख्त पाबंदी रहेगी।
- किसी भी संदिग्ध वस्तु मिलने पर तुरंत पुलिस को सूचना दें।
- जो पूजा समिति सबसे अच्छा समन्वय और सुरक्षा व्यवस्था करेगी, उसे पुरस्कृत किया जाएगा।
- लाउडस्पीकर और डीजे का इस्तेमाल नियमों के तहत हो। ध्वनि प्रदूषण और आपत्तिजनक गीतों से बचें।
- पंडाल बनाने से यातायात बाधित नहीं होना चाहिए।
SSP चंदन कुमार सिन्हा ने दिये ये निर्देश
- पूजा समितियां प्रशासन की आंख, कान, नाक और पैर हैं। उनके सहयोग से ही शांति व्यवस्था संभव है।
- बिजली की वायरिंग को कभी हल्के में न लें, सुरक्षा सबसे जरूरी है।
- हर पूजा समिति अपने 5 वॉलिंटियर्स को प्रशिक्षण में भेजे और उनकी सूची स्थानीय थाना प्रभारी को दे।
- सोशल मीडिया पर भड़काऊ संदेश या वीडियो न डालें। अगर ऐसी कोई चीज मिले तो तुरंत पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना दें।
- धर्म या संप्रदाय के नाम पर माहौल बिगाड़ने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
- पंडालों में महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग प्रवेश व्यवस्था हो। तोरण द्वार (गेट) की खुद जांच करें और वॉलिंटियर्स साफ छवि वाले युवाओं को बनाएं।
- महिला पुलिस बल की तैनाती की जाएगी। समितियां भी महिला वॉलिंटियर्स नियुक्त करें।
जब ढाक की थाप बजेगी…
जब ढाक की थाप बजेगी, अष्टमी की आरती होगी और विसर्जन के समय “आसीचे बोछोर आबार हाबे” (अगले साल फिर आएंगी) की गूंज पूरे शहर में फैल जाएगी… तब यह साफ हो जाएगा कि रांची ने न केवल मां दुर्गा की पूजा की, बल्कि आपसी सहयोग, एकता और विश्वास की भी सबसे बड़ी मिसाल पेश की।
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