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Pakur (Jaydev Kumar) : पाकुड़ जिले के हिरणपुर प्रखंड का छोटा-सा गांव तारापुर इस बार दुर्गा पूजा के रंग में कुछ अलग ही नजर आया। ढोल-नगाड़ों की गूंज और देवी मां की भव्य प्रतिमा के बीच इस पूजा पंडाल में सिर्फ आस्था ही नहीं, बल्कि इंसानियत की खुशबू भी बिखरी थी। यहाँ पूजा समिति ने यह साबित कर दिया कि त्यौहार केवल आनंद और श्रद्धा तक सीमित नहीं होते, बल्कि समाज को नई दिशा देने का जरिया भी बन सकते हैं।
आस्था के पर्व से जुड़कर और पवित्र हो गया रक्तदान : डीसी
दुर्गा पूजा के पंडाल में जब रक्तदान शिविर की शुरुआत हुई, तो माहौल श्रद्धा से सेवा की ओर मुड़ गया। मंच पर डीसी मनीष कुमार ने फीता काटकर शुभारंभ किया और मुस्कुराते हुए रक्तदाताओं से कहा – “रक्तदान महादान है, और जब इसे आस्था के पर्व से जोड़ा जाता है तो यह और भी पवित्र हो जाता है।”
16 रक्तवीरों ने दान किया खून
कुल 16 रक्तवीर इस शिविर में आगे आए। उनमें कोई कॉलेज की छात्रा स्वीटी कुमारी थी, तो कोई व्यवसायी सोनू साहा, कोई किसान परिवार से आने वाले चंद्रयान साहा। सभी का एक ही विश्वास था – “शायद आज हमारे खून से किसी अजनबी की जिंदगी बच जाए।” यह जज्बा पंडाल में मौजूद हर शख्स को छू गया।
सामाजिक संदेशों से सजा पंडाल
तारापुर का दुर्गा पंडाल इस बार सिर्फ रोशनी और सजावट का नहीं, बल्कि जागरूकता का प्रतीक भी बना। पंडाल की दीवारों पर बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, स्वच्छता अभियान और कालाजार मिटाने जैसे संदेश बड़े-बड़े अक्षरों में लिखे थे। जब उपायुक्त मनीष कुमार ने इन संदेशों को देखा तो उन्होंने कहा – “यह आयोजन पूजा ही नहीं, समाज को दिशा देने का माध्यम है।”
समिति की मेहनत, गांव की शान
इस आयोजन के पीछे श्री श्री 108 सार्वजनिक दुर्गा पूजा समिति की महीनों की मेहनत थी। अध्यक्ष नंदकिशोर मंडल, उपाध्यक्ष चंद्रयान साहा और सचिव पंकज साहा ने अपने गाँव के युवाओं के साथ मिलकर यह सपना साकार किया। अंत में उपायुक्त ने सभी को धन्यवाद देते हुए कहा कि “आस्था और सेवा का यह मेल आने वाले समय में समाज के लिए आदर्श बनेगा।”
त्योहार से निकला संदेश
तारापुर का यह पंडाल सिर्फ पूजा का स्थल नहीं, बल्कि उम्मीद और इंसानियत का संदेशवाहक बन गया। यहाँ की गूंज सिर्फ “जय मां दुर्गा” की नहीं थी, बल्कि यह भी थी – “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ… रक्तदान महादान।”
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