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Pakur (Jaydev Kumar) : दुर्गापूजा का समय है… जब शहर और गांव दोनों में न केवल भक्ति का माहौल फैलता है, बल्कि कलात्मक पंडालों की रौनक भी लोगों को मंत्रमुग्ध कर देती है। इस बार पाकुड़ जिला प्रशासन ने इसे और भी खास बनाने का फैसला किया है। दुर्गापूजा 2025 में सिर्फ भक्ति और सजावट ही नहीं, बल्कि स्वच्छता, सुरक्षा और सामाजिक जिम्मेदारी के लिए भी पुरस्कार दिए जाएंगे। डीसी मनीष कुमार के अनुसार, इस पहल का मकसद पूजा को केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित न रखना है। “हम चाहते हैं कि दुर्गापूजा 2025 में हर पंडाल स्वच्छ, सुरक्षित और सामाजिक रूप से जिम्मेदार दिखाई दे। यह पर्व भक्ति के साथ-साथ समाज में जागरूकता का संदेश भी दे,” उन्होंने बताया।
जिला प्रशासन ने पंडालों को तीन श्रेणियों में बांटा है…
- छोटे पंडाल : 1000–1500 श्रद्धालु
- मध्यम पंडाल : 1000–5000 श्रद्धालु
- बड़े पंडाल : 5000 से अधिक श्रद्धालु
हर पंडाल की मूल्यांकन प्रक्रिया में तीन स्तर होंगे…
- आत्म-मूल्यांकन (Google फॉर्म/डॉक्यूमेंट) – 50% वेटेज
- जिला टीम मूल्यांकन – 30% वेटेज
- जन प्रतिक्रिया (QR कोड रेटिंग) – 20% वेटेज
इस प्रक्रिया से यह सुनिश्चित होगा कि मूल्यांकन सभी के लिए निष्पक्ष और पारदर्शी हो।
पुरस्कार मापदंड : कला के साथ सामाजिक जिम्मेदारी
पुरस्कार केवल सुंदरता और भक्ति के लिए नहीं हैं। पंडालों की सामाजिक और पर्यावरणीय जिम्मेदारी भी देखी जाएगी।
कुछ मुख्य मापदंड :
- सामाजिक कार्य : रक्तदान शिविर, टीबी मरीज गोद लेना
- पर्यावरण जागरूकता : मूर्ति निर्माण में बायोडिग्रेडेबल सामग्री, प्लास्टिक मुक्त आयोजन
- जागरूकता संदेश : बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, पोषण माह, स्वस्थ नारी
- स्वच्छता और सुरक्षा : डस्टबिन, CCTV कवरेज, हेल्प डेस्क
- संस्कृति और परंपरा : पारंपरिक खान-पान, प्रसाद वितरण
- प्रकाश और ध्वनि नियंत्रण : तार सुरक्षित, लाउडस्पीकर समय सीमा में
इसके अलावा, विसर्जन प्रबंधन, यातायात और पार्किंग नियंत्रण भी अंक देने में शामिल होंगे।
पुरस्कार वितरण और सम्मान
तीनों श्रेणियों में प्रथम से पंचम स्थान तक के पंडालों को पुरस्कृत किया जाएगा। साथ ही तीन सांत्वना पुरस्कार भी दिए जाएंगे। यह सुनिश्चित करेगा कि सभी समितियों को उनकी मेहनत के लिए सम्मान मिले।
भागीदारी से बनेगा पर्व और भी खास : डीसी
डीसी मनीष कुमार ने सभी पूजा समितियों से अपील की… हमारा लक्ष्य केवल भक्ति तक सीमित नहीं है। हर पंडाल को स्वच्छ, सुरक्षित और सामाजिक रूप से जिम्मेदार बनाकर हम समाज में जागरूकता फैलाना चाहते हैं। हम चाहते हैं कि सभी समितियां इस पहल में सक्रिय रूप से भाग लें।

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