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Home » छठ पूजा 2025: जानिए खरना की पूजा-विधि, प्रसाद और धार्मिक महत्व
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छठ पूजा 2025: जानिए खरना की पूजा-विधि, प्रसाद और धार्मिक महत्व

October 26, 2025No Comments2 Mins Read
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News Samvad : लोक आस्था के चार दिवसीय महापर्व छठ का दूसरा दिन “खरना” के नाम से जाना जाता है। यह दिन व्रतियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण होता है क्योंकि इसी दिन से सूर्य उपासना के कठिन तप की शुरुआत होती है। सुबह से व्रती निर्जल उपवास रखते हैं और सूर्यास्त के बाद प्रसाद ग्रहण करते हैं।

खरना का धार्मिक महत्व

‘खरना’ शब्द का अर्थ है शुद्धिकरण और आत्मसंयम। पंडित प्रेमसागर पांडे बताते हैं कि यह दिन शरीर और मन की पवित्रता का प्रतीक है। व्रती पूरे दिन जल और अन्न का त्याग करते हुए आत्मनियंत्रण का पालन करते हैं। यह व्रत व्यक्ति को मानसिक और शारीरिक शुद्धि की ओर अग्रसर करता है।

पूजा-विधि और प्रसाद की तैयारी

संध्या समय व्रती स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनते हैं। घर में मिट्टी या पीतल के चूल्हे पर गुड़ की खीर, रोटी और केले का प्रसाद तैयार किया जाता है। सूर्य देव और छठी मइया की आराधना के बाद व्रती स्वयं प्रसाद ग्रहण करते हैं, जिसे “खरना प्रसाद” कहा जाता है।

शुद्धता और अनुशासन की परीक्षा

इस दिन पूरे घर की सफाई की जाती है। पूजा स्थल पर पवित्रता का विशेष ध्यान रखा जाता है। नमक, तेल या मसालों के बिना बना सात्विक भोजन व्रती के तन और मन को शुद्ध रखता है। खरना का दिन आत्मसंयम और अनुशासन की चरम परीक्षा माना जाता है।

खरना के बाद 36 घंटे का निर्जल व्रत

खरना के बाद व्रती अगले 36 घंटे तक जल तक नहीं पीते। यह तप मानव सहनशक्ति और आत्मबल की चरम सीमा दर्शाता है। खरना के बाद व्रती घाटों की तैयारी करते हैं और सूर्य देव को संध्या व उषा अर्घ्य अर्पित करने की परंपरा निभाते हैं।

खरना प्रसाद: श्रद्धा और एकता का प्रतीक

खरना के प्रसाद को व्रती अकेले नहीं खाते, बल्कि परिवार, पड़ोसी और श्रद्धालुओं के बीच बांटते हैं। यह परंपरा लोक आस्था, एकता और सामूहिक भक्ति की मिसाल है।

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