अपनी मनपसंद भाषा में पढ़ें :
Ranchi : बेड़ो अनुमंडल के गांव इन दिनों नए माहौल में सांस ले रहे हैं। पहले जहां पुलिस का मतलब सिर्फ गश्ती या कार्रवाई समझा जाता था, वहीं अब लोग खुद पुलिस टीम को चौपालों, खेल मैदानों और पंचायत भवनों में अपने साथ बैठा देख रहे हैं। यह बदलाव अचानक नहीं आया। इसके पीछे रांची के पुलिस कप्तान राकेश रंजन की वह सोच है, जिसमें उन्होंने पुलिस को लोगों के और करीब लाने का लक्ष्य तय किया।
गांवों में पहुंची पुलिस, हर सवाल का मिला जवाब
लापुंग के एक ग्रामीण ने मुस्कुराते हुए कहा, “पहली बार पुलिस वाले हमारे सवाल ध्यान से सुन रहे थे। ऐसा लगा कि वे हमारे लिए ही आए हैं।” यही अनुभूति इटकी, बेड़ों और नरकोपी के कई ग्रामीणों ने साझा की। चारों थाना क्षेत्रों में पुलिस टीम ने पंचायतों के बीच बैठकर महिलाओं, बुजुर्गों और युवाओं से खुलकर बात की। हर मुद्दे पर जवाब मिला, चाहे वह साइबर अपराध हो या घरेलू हिंसा।
पुलिसकर्मियों ने की खिलाड़ियों की हौसला अफजाई
फुटबॉल टूर्नामेंट के दौरान बच्चों की हंसी और युवाओं के उत्साह ने माहौल बदल दिया। पुलिसकर्मी भी खिलाड़ियों की हौसला अफजाई करते दिखे। कई युवाओं ने कहा कि इस आयोजन से उन्हें यह महसूस हुआ कि पुलिस सिर्फ नियम लागू करने वाली संस्था नहीं, बल्कि उनका साथी भी है।

महिलाओं ने जताया भरोसा
जागरूकता कार्यक्रम में महिलाओं की उपस्थिति सबसे खास रही। कई महिलाओं ने खुलकर बताया कि वे सोशल मीडिया के जोखिमों या छेड़खानी जैसे मामलों के बारे में ठीक से नहीं जानती थीं। पुलिस टीम ने सरल भाषा में उन्हें बताया कि कैसे डिजिटल गिरफ्तारी जैसी धोखाधड़ी से बचा जा सकता है और मुश्किल आने पर किस नंबर पर मदद मिल सकती है। एक महिला ने कहा, “हमने पहली बार जाना कि 1930 पर साइबर शिकायत की जा सकती है। यह जानकारी हमारे लिए बहुत जरूरी थी।”
एसएसपी की स्पष्ट सोच ने बनाया अंतर
अभियान में शामिल अधिकारियों ने बताया कि यह पूरा कार्यक्रम एसएसपी राकेश रंजन की प्राथमिकता का हिस्सा है। उनका मानना है कि ग्रामीण सुरक्षा तभी मजबूत होगी जब लोग कानून को समझेंगे और डर नहीं, भरोसा महसूस करेंगे। रुरल एसपी प्रवीण पुष्कर की टीम ने भी गांवों में जाकर साफ किया कि पुलिस का उद्देश्य लोगों की जिंदगी आसान बनाना है। यह संदेश लोगों ने दिल से स्वीकार किया।

नशा और ट्रैफिक नियम पर चर्चा
कई युवा पुलिस अधिकारियों से नशे की आदत के नुकसान और सड़क सुरक्षा पर सवाल पूछते दिखे। अधिकारियों ने कहा कि किसी हादसे में कुछ सेकंड की लापरवाही कितना बड़ा नुकसान कर सकती है। इस बातचीत का असर भी लोगों पर साफ दिखा।
साझा किये गये जरूरी हेल्पलाइन नंबर
कार्यक्रम के अंत में पुलिस टीम ने जरूरी हेल्पलाइन नंबर साझा किए। नशापान के दुष्परिणाम, यातायात के नियम, डायल 112, डायल 100 एवं साईबर अपराध से संबंधित शिकायत दर्ज कराने के लिए डायल 1930 के संबंध में बतलाया गया। ग्रामीणों ने कहा कि अब वे जान गए हैं कि मदद कैसे और कहां मिल सकती है। कई युवाओं ने यह भी बताया कि अब वे अपने दोस्तों को भी इन नंबरों के बारे में बताएंगे।

बनता दिख रहा भरोसे का पुल
बेड़ो अनुमंडल के लोगों का कहना है कि यह सिर्फ अभियान नहीं, रिश्ते बनाने की पहल है। एसएसपी राकेश रंजन की सोच ने पुलिस और जनता के बीच एक ऐसा पुल तैयार किया है, जो अब मजबूत होता जा रहा है। गांवों की गलियों में बच्चों की हंसी, महिलाओं की संतुष्टि और युवाओं का उत्साह यही बता रहा है कि बदलाव शुरू हो चुका है।

इसे भी पढ़ें : जब प्रशासन खुद गांव पहुंचा, उम्मीदों की कतार में खड़े लोग मुस्कुरा उठे

