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Home » ‘झारखंड में अफसर बनने का रेट 40 लाख रुपए’, बाबूलाल का हेमंत सरकार पर तीखा हमला
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‘झारखंड में अफसर बनने का रेट 40 लाख रुपए’, बाबूलाल का हेमंत सरकार पर तीखा हमला

July 26, 2026No Comments4 Mins Read
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बाबूलाल
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Ranchi : झारखंड में 14वीं JPSC परीक्षा में हुई गड़बड़ी को लेकर राजनीति गरमा गई है। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर सीधा निशाना साधा है। रांची स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय में एक प्रेस वार्ता के दौरान मरांडी ने आरोप लगाया कि झारखंड में युवाओं का भविष्य बेचा जा रहा है और राज्य सरकार सीआईडी जांच के नाम पर सिर्फ लीपापोती कर रही है। उन्होंने साफ कहा कि अगर मुख्यमंत्री इस मामले में पूरी तरह साफ-सुथरे हैं, तो उन्हें सीबीआई जांच से डर क्यों लग रहा है?

‘अफसर बनने के लिए रेट कार्ड तय, PT से इंटरव्यू तक के अलग-अलग दाम’

प्रेस कॉन्फ्रेंस में बाबूलाल मरांडी ने चौंकाने वाला दावा किया। उन्होंने कहा कि झारखंड में एक अफसर बनने के लिए बाकायदा 40 लाख रुपए का रेट चार्ट चल रहा है। उनके पास मौजूद जानकारी के मुताबिक:

  • पीटी (PT) परीक्षा पास करने के लिए : 5 लाख रुपए
  • मेन्स (Mains) परीक्षा के लिए : 25 लाख रुपए
  • इंटरव्यू (Interview) पास करने के लिए : 10 लाख रुपए

मरांडी ने कहा कि जिस संस्थान पर राज्य के युवाओं का भविष्य टिका है, अगर उसकी बुनियाद ही भ्रष्टाचार पर रखी जाएगी तो झारखंड में अच्छे अफसर कभी नहीं आ पाएंगे।

सीआईडी जांच सच निकालने के लिए नहीं, सबूत मिटाने के लिए हो रही

बाबूलाल मरांडी ने सीआईडी जांच की नीयत पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार जल्दबाजी में कार्रवाई का नाटक कर रही है, लेकिन सच यह है कि सीआईडी जांच छात्रों को न्याय दिलाने के लिए नहीं बल्कि घोटालेबाजों को बचाने के लिए की जा रही है।

उन्होंने शराब घोटाले और JSSC CGL परीक्षा का उदाहरण देते हुए कहा कि सीआईडी का ट्रैक रिकॉर्ड सब जानते हैं। यह एजेंसी सिर्फ कागजों का हेर-फेर करती है, कभी चार्जशीट तक दाखिल नहीं कर पाती। सीआईडी की छापेमारी का असली मकसद सबूतों को सामने लाना नहीं, बल्कि उन्हें हमेशा के लिए मिटाना है।

कमजोर FIR पर उठाए सवाल, पूछा- किसके बयान पर दर्ज हुई शिकायत?

नेता प्रतिपक्ष ने मामले में दर्ज FIR पर भी उंगली उठाई। उन्होंने कहा कि अभी तक यह साफ नहीं है कि एफआईआर किसके बयान पर दर्ज की गई है और इसे पब्लिक डोमेन में क्यों नहीं रखा गया? सबसे बड़ी बात यह है कि इतनी बड़ी धांधली के बावजूद इस केस को ‘भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम’ (Anti-Corruption Act) के तहत दर्ज नहीं किया गया है। एफआईआर को जानबूझकर कमजोर बनाया गया है ताकि आरोपी कोर्ट में आसानी से बच निकलें।

CID के एडीजी मनोज कौशिक को सलाह- पुराने अफसरों का हश्र याद रखें

बाबूलाल मरांडी ने सीआईडी के ADG मनोज कौशिक की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि मनोज कौशिक को तीन-तीन पदों की जिम्मेदारी दी गई है और वे मुख्यमंत्री के काफी पसंदीदा बने हुए हैं। मरांडी ने उन्हें सलाह देते हुए कहा, “आप सीएम के पहले पसंदीदा अफसर नहीं हैं। इससे पहले विनय चौबे और अनुराग गुप्ता भी बहुत खास हुआ करते थे। आज उनका क्या हाल है, यह बताने की जरूरत नहीं है। अगर आप भी गड़बड़ी करेंगे तो आपका हश्र भी उन्हीं अफसरों जैसा होगा। सीआईडी को राज्य के बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ बंद करना चाहिए।”

पूर्व अध्यक्ष एल. ख्यांग्ते पर दर्ज हो FIR, किया जाए गिरफ्तार

मरांडी ने एक बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि कर्नाटक के एक छात्र ने जनवरी में ही JPSC के तत्कालीन अध्यक्ष एल. ख्यांग्ते को पत्र भेजकर ओएमआर (OMR) शीट में गड़बड़ी और TDPL कर्मचारी अभय तिवारी की हरकतों के बारे में आगाह किया था। इससे पहले रेंज अफसर परीक्षा में भी गड़बड़ी की बात सामने आई थी, लेकिन ख्यांग्ते ने कोई कदम नहीं उठाया। उन्होंने कहा कि सिर्फ इस्तीफा दे देने से कोई अपनी जिम्मेदारी से नहीं भाग सकता। सरकार को एल. ख्यांग्ते के खिलाफ तुरंत एफआईआर दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार करना चाहिए।

केवल सीबीआई जांच से ही आएगा सच बाहर

प्रेस कांफ्रेंस के अंत में बाबूलाल मरांडी ने दोहराया कि राज्य की सभी भर्ती परीक्षाओं में धांधली हो रही है और यह सब सरकार के संरक्षण में चल रहा है। सीआईडी महज एक कठपुतली है, इसलिए इस पूरे मामले की जांच बिना किसी देरी के सीबीआई को सौंपी जानी चाहिए। तभी झारखंड के युवाओं को न्याय मिल पाएगा और असली गुनहगार जेल जाएंगे। इस दौरान बीजेपी के प्रदेश मीडिया प्रभारी योगेन्द्र प्रताप सिंह और प्रदेश प्रवक्ता राफिया नाज भी मौजूद रहीं।

इसे भी पढ़ें : पहले सुनी ‘मन की बात’, फिर हरियाली के संकल्प के साथ पौधे बांट गये डॉ. प्रदीप वर्मा

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