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Pakur (Jaydev Kumar) : पाकुड़ में झारखंड सहायक अध्यापक संघर्ष मोर्चा ने सोमवार को मुख्यमंत्री के नाम एक विस्तृत ज्ञापन राजमहल के सांसद विजय हांसदा को सौंपा। संगठन ने कहा कि शिक्षा विभाग द्वारा लागू की गई सेवा नियमावली एक सितंबर 2025 से प्रभावी है, लेकिन यह व्यावहारिक नहीं है और इसमें कई महत्वपूर्ण बिंदुओं की अनदेखी की गई है।
62 हजार सहायक शिक्षकों के हित प्रभावित
संगठन का कहना है कि राज्य में करीब 62 हजार सहायक शिक्षक वर्षों से सेवा दे रहे हैं, फिर भी उनका सेवा निर्धारण लंबित है। इन शिक्षकों ने प्रशिक्षण, योग्यता और नियुक्ति संबंधी सभी प्रक्रियाएं पूरी कर ली हैं, लेकिन उन्हें स्थायी सेवा का लाभ नहीं दिया जा रहा।
2009 और 2010 के बाद नियुक्त शिक्षकों की स्थिति अस्पष्ट
ज्ञापन में यह भी कहा गया कि वर्ष 2009 और 2010 के बाद नियुक्त शिक्षकों की स्थिति अब तक साफ नहीं हुई है। मोर्चा ने पुरानी नियुक्ति नियमावली के आधार पर सेवा निर्धारण लागू करने की मांग रखी।
झारखंड सहायक अध्यापक संघर्ष मोर्चा ने सीएम के नाम सांसद विजय हांसदा को ज्ञापन देकर सेवा नियमावली 2025 में संशोधन की मांग की है। क्या बोले सांसद विजय हांसदा और झारखंड सहायक अध्यापक संघर्ष मोर्चा पाकुड़ के जिलाध्यक्ष अजीजुल हक… देखें pic.twitter.com/HJoh9LvM5O
— News Samvad (@newssamvaad) December 1, 2025
RTE लागू होने के बाद भी अधिकार से वंचित
संगठन ने बताया कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 लागू होने के बावजूद प्रशिक्षित और योग्य शिक्षकों को उनका अधिकार नहीं मिला है। कई जिलों में सेवा निर्धारण की फाइलें रुकी हुई हैं, जिससे शिक्षकों के भविष्य पर असर पड़ रहा है।
समीक्षा और संशोधन की मांग, आंदोलन की चेतावनी
मोर्चा ने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया कि न्यायालय के आदेशों के अनुसार सेवा नियमावली 2025 की समीक्षा की जाए और इसे संशोधित किया जाए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो राज्यभर में सहायक शिक्षक आंदोलन शुरू करेंगे।
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