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Pakur (Jaydev Kumar) : रविन्द्र भवन का बड़ा हॉल सोमवार को सुबह कुछ अलग ही ऊर्जा से भरा हुआ था। दीवारों पर लगी रोशनियां हल्की चमक रही थीं और मंच के सामने बैठे युवा चेहरे उम्मीद से चमक उठते थे। ये सिर्फ विद्यार्थी नहीं थे, ये पाकुड़ के वो सपने थे जो अपने भविष्य को बदलने के लिए आज एक नए सफर की शुरुआत करने आए थे। वे सभी झारखंड की प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं, JPSC और JSSC की तैयारी के लिए चुने गए छात्र थे। और आज, प्रोजेक्ट प्रयास – हुनर से होनहार तक का सफर की ओर से उनके लिए एक विशेष उन्मुखीकरण कार्यक्रम आयोजित हुआ था।
रोशनी से शुरू हुआ उम्मीदों का दिन
कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन से हुई। जैसे ही डीसी मनीष कुमार और जिला शिक्षा पदाधिकारी ने दीप जलाया, हॉल में हल्की सी रोशनी फैल गई। यह रोशनी उन युवाओं की आंखों में चमकती उम्मीदों से मिलकर एक प्रतीक बन गई। अंधकार से उजाले की ओर बढ़ते सफर का प्रतीक। कई छात्र पहली बार किसी बड़े अधिकारी को इतने करीब से देख रहे थे। उनके चेहरों पर उत्सुकता और घबराहट एक साथ दिखाई दे रही थी।
“चुनौतियां आए, तो रुकना नहीं है”… डीसी की दिल छू लेने वाली बात
डीसी मनीष कुमार का संबोधन किसी औपचारिक भाषण की तरह नहीं था। उनकी बातें छात्रों के जीवन से जुड़ी, सरल और वास्तविक थीं। उन्होंने कहा, “तैयारी के दौरान मुश्किलें आएंगी। कभी थकान आएगी, कभी निराशा। लेकिन इन्हें रुकावट नहीं, अवसर समझें। संकट हमेशा राह रोकने नहीं आते, कभी-कभी दिशा दिखाने भी आते हैं।” यह सुनते ही भीड़ में बैठी रेशमा नाम की एक छात्रा मुस्कुरा उठी। वह पिछले छह महीने से खुद से पढ़ाई कर रही थी और कई बार हार मान चुकी थी। आज उसकी आँखों में फिर से उम्मीद लौट आई।

एक दिन, जिसने कई सपनों में जान डाल दी
डीसी ने न सिर्फ प्रेरक बातें की बल्कि तैयारी से जुड़ी छोटी-छोटी व्यावहारिक बातें भी साझा की। कैसे समय का प्रबंधन करें, कैसे रोज थोड़ा-थोड़ा पढ़ना बड़ा फर्क डालता है, और कैसे सकारात्मक सोच, कठिन से कठिन अध्याय को आसान बना देती है। हॉल में बैठे छात्रों ने हर बात को ध्यान से सुना। कोई नोट्स लिख रहा था, कोई सिर हिलाकर सहमति जता रहा था। ऐसा लग रहा था मानो हर शब्द सीधे उनके दिल में उतर रहा हो।
युवाओं के लिए एक मौका, जो बदलेगा कल
प्रोजेक्ट प्रयास सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं है। यह उन विद्यार्थियों के लिए दरवाजा है जिनके पास मेहनत तो है, पर संसाधनों की कमी है। निःशुल्क कोचिंग, नियमित मॉनिटरिंग और अनुभवी शिक्षकों का मार्गदर्शन, यह सब मिलकर युवाओं को उस मंच पर खड़ा करता है जहाँ से जीवन बदलना शुरू होता है। कार्यक्रम खत्म होने के बाद जब छात्र बाहर निकल रहे थे, उनके कदम पहले से ज्यादा दृढ़ थे। कई छात्रों की आँखों में जो आत्मविश्वास था, वह बताता था कि आज का दिन उनके सफर की नई शुरुआत बन गया है।
पाकुड़ के युवाओं में जगा नया विश्वास
रविन्द्र भवन से निकलते सूरज की रोशनी अब शाम में बदल रही थी, लेकिन उन युवाओं के भीतर जो नई रोशनी जली थी, वह लंबे समय तक बुझने वाली नहीं थी। प्रोजेक्ट प्रयास ने उन्हें यह एहसास कराया कि अवसर केवल बड़े शहरों में नहीं बनते, मेहनत जहां भी हो, उसी जगह किस्मतें लिखी जाती हैं।
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