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Kolkata : पश्चिम बंगाल के चर्चित प्राथमिक शिक्षक भर्ती घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ नेता और सांसद Abhishek Banerjee को पूछताछ के लिए तलब किया है। ED ने उन्हें सोमवार को कोलकाता स्थित अपने जोनल कार्यालय में पेश होने के लिए समन भेजा है। इस घटनाक्रम के बाद एक बार फिर राज्य का बहुचर्चित भर्ती घोटाला सुर्खियों में आ गया है।
क्यों चर्चा में है यह मामला
पश्चिम बंगाल में शिक्षक भर्ती को लेकर विवाद कई वर्षों से चल रहा है। आरोप है कि भर्ती प्रक्रिया के दौरान नियमों की अनदेखी की गई और कई ऐसे उम्मीदवारों को नौकरी दी गई, जो मेरिट सूची में नहीं थे या जिनकी रैंकिंग कम थी। दूसरी तरफ कई योग्य अभ्यर्थियों को चयन से बाहर कर दिया गया। इन्हीं आरोपों के आधार पर मामले की जांच शुरू हुई और बाद में इसमें कथित भ्रष्टाचार तथा अवैध धन के लेनदेन की भी जांच शुरू कर दी गई। इसी सिलसिले में ED मनी लॉन्ड्रिंग के पहलू की पड़ताल कर रही है।
हाई कोर्ट के आदेश के बाद शुरू हुई जांच
इस मामले की जांच कलकत्ता हाई कोर्ट के आदेश के बाद शुरू हुई थी। इसके बाद CBI ने एफआईआर दर्ज कर भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की जांच शुरू की। CBI का आरोप है कि भर्ती प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए सुनियोजित तरीके से नियमों का उल्लंघन किया गया। जांच एजेंसियों का मानना है कि नियुक्तियों के बदले अवैध धन का लेनदेन भी हुआ, जिसके कारण मनी लॉन्ड्रिंग का मामला सामने आया।
चंद्रनाथ सिन्हा पर भी कसा शिकंजा
इस मामले में ED पहले भी कई लोगों के खिलाफ कार्रवाई कर चुकी है। 6 अगस्त 2025 को एजेंसी ने अपनी छठी पूरक अभियोजन शिकायत दाखिल करते हुए चंद्रनाथ सिन्हा को आरोपी बनाया था। मार्च 2024 में उनके ठिकानों पर छापेमारी के दौरान ED ने 41 लाख रुपये नकद और कई अहम दस्तावेज बरामद किए थे। जांच में यह भी सामने आया कि उनके नियंत्रण वाले बैंक खातों में बड़ी मात्रा में नकद जमा किया गया था। एजेंसी का दावा है कि उन्होंने बीरभूम जिले के बोलपुर इलाके में परिवार के सदस्यों के नाम पर कई संपत्तियां खरीदी थीं। इन संपत्तियों को अस्थायी रूप से जब्त किया जा चुका है।
पार्थ चटर्जी और अर्पिता मुखर्जी की गिरफ्तारी ने बढ़ाई थी हलचल
भर्ती घोटाले की जांच के दौरान सबसे ज्यादा चर्चा तब हुई थी जब पश्चिम बंगाल के पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी और उनकी करीबी सहयोगी अर्पिता मुखर्जी के खिलाफ कार्रवाई हुई। अर्पिता मुखर्जी के परिसरों पर छापेमारी के दौरान ED ने करीब 49.80 करोड़ रुपये नकद और 5.08 करोड़ रुपये मूल्य के सोने के आभूषण बरामद किए थे। इतनी बड़ी नकदी की बरामदगी ने पूरे देश का ध्यान इस मामले की ओर खींच लिया था और पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा विवाद खड़ा हो गया था।
अब तक सात लोगों की हो चुकी है गिरफ्तारी
ED के मुताबिक, इस मामले में अब तक सात लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। गिरफ्तार लोगों में पार्थ चटर्जी और अर्पिता मुखर्जी जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं। जांच एजेंसी अब तक करीब 98.65 करोड़ रुपये की संपत्तियां अस्थायी रूप से कुर्क कर चुकी है। वहीं प्राथमिक शिक्षक भर्ती घोटाले से जुड़े मामलों में कुल जब्ती और कुर्की की राशि लगभग 154.91 करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है।
54 लोगों और संस्थाओं के खिलाफ आरोप
ED ने 19 सितंबर 2022 को इस मामले में पहली अभियोजन शिकायत दाखिल की थी। इसके बाद छह पूरक शिकायतें भी अदालत में दायर की गईं। एजेंसी के अनुसार अब तक 54 व्यक्तियों और संस्थाओं के खिलाफ आरोप तय किए जा चुके हैं। इनमें पार्थ चटर्जी, अर्पिता मुखर्जी और पूर्व विधायक माणिक भट्टाचार्य जैसे नाम शामिल हैं। जांच एजेंसियां अभी भी नए सबूत जुटाने में लगी हुई हैं और मामले की जांच जारी है।
दूसरे भर्ती घोटालों की भी हो रही जांच
ED सिर्फ प्राथमिक शिक्षक भर्ती घोटाले की ही जांच नहीं कर रही है। एजेंसी SSC सहायक शिक्षक भर्ती, ग्रुप-सी और ग्रुप-डी भर्ती से जुड़े कथित घोटालों की भी पड़ताल कर रही है। एजेंसी के मुताबिक इन मामलों में अब तक लगभग 486 करोड़ रुपये की संपत्तियां कुर्क की जा चुकी हैं। वहीं भर्ती घोटालों से जुड़े विभिन्न मामलों में कोलकाता ED कार्यालय द्वारा कुल मिलाकर करीब 641 करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच की जा चुकी हैं।
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