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Pakur (Jaydev Kumar) : सुबह-सुबह खेतों में हल चलाने वाले किसान लाल मोहम्मद शेख की आंखों में चिंता साफ झलक रही है। वह बताते हैं, “हमने सोचा था कि पीएम कुसुम योजना से हमारी खेती आसान होगी, लेकिन अब हमारी मेहनत और पैसों की कीमत किसी ने ठगी कर ली।” लाल मोहम्मद जैसे ही कई किसान हैं, जो योजना के नाम पर बिचौलियों के जाल में फंस गए। महेशपुर प्रखंड के चांचकी और पकड़ीपाड़ा के ग्रामीणों का कहना है कि बोरिंग कराने के नाम पर बिचौलिए प्रत्येक परिवार से 45 से 50 हजार रुपये वसूले। लेकिन योजना के असली लाभ यानी वॉटर पंप और सोलर पैनल किसानों तक नहीं पहुंचे।
योजना का नाम, असली मकसद खो गया
जिला कृषि पदाधिकारी मृत्युंजय कुमार का कहना है कि पीएम कुसुम योजना में केवल वॉटर पंप और सोलर पैनल का प्रावधान है। बोरिंग का कोई प्रावधान नहीं है। फिर भी, बिचौलियों ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि बोरिंग कराते ही उन्हें मुफ्त मोटर और सोलर पैनल मिलेगा। किसानों ने बताया कि बोरिंग के बाद मशीन और मोटर अगले ही दिन ले ली गई, और किसी को योजना का लाभ नहीं मिला। कई किसान पेट्रोल पंप से उधारी में तेल लेकर बोरिंग करवा रहे थे, ताकि उनका काम जल्दी हो जाए।
बिचौलियों की चाल
महेशपुर का एक बिचौलिया छोटे बोरवेल वाहन का मालिक है। उसने पोस्टर चिपकाकर लोगों को भरोसा दिलाया कि बोरिंग के साथ वॉटर पंप और सोलर मुफ्त मिलेगा। किसानों से जमीन का पर्चा, महिला का आधार कार्ड और फोटो भी जमा कराया गया। लाल मोहम्मद जैसे ग्रामीणों की उम्मीदें टूट गईं, और करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ।
प्रशासन ने लिया संज्ञान
शिकायत के बाद उपविकास आयुक्त ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं। जिला कृषि पदाधिकारी ने कहा, “अगर योजना के नाम पर किसी ने भी ठगी की है, तो विभाग सख्त कार्रवाई करेगा।” किसानों की मानवीय कहानी यही दिखाती है कि सरकारी योजनाओं का असली लाभ लोगों तक कैसे नहीं पहुँच पाता, और कैसे कुछ लोग उनके विश्वास का फायदा उठाकर उन्हें ठगा लेते हैं।
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