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Deoghar : देवघर के केकेएन स्टेडियम में मंगलवार की सुबह आम दिनों से अलग थी। गेट के भीतर कदम रखते ही समझ आ गया कि आज कोई खास मौका है। खिलाड़ियों की आंखों में चमक थी, बच्चों के चेहरे पर उत्सुकता और बुजुर्ग दर्शकों के बीच भी वही अपनापन, जो किसी बड़े सपने को पास से देखने पर महसूस होता है। वजह थी बीसीसीआई की सैयद मुश्ताक अली टी-20 ट्रॉफी, जो पहली बार देवघर के खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों के सामने रखी गई।
देवघर डिस्ट्रिक्ट क्रिकेट एसोसिएशन के आयोजन में जैसे ही ट्रॉफी का अनावरण हुआ, तालियों की गूंज पूरे स्टेडियम में फैल गई। यह सिर्फ एक ट्रॉफी नहीं थी, बल्कि उन हजारों घंटों की मेहनत की पहचान थी, जो झारखंड के खिलाड़ियों ने मैदान पर बहाए हैं। हरियाणा को 69 रनों से हराकर झारखंड की ऐतिहासिक जीत अब किताबों तक सीमित नहीं रही, वह देवघर के इस मैदान पर जीवंत हो उठी।
बच्चों की आंखों में भविष्य की तस्वीर
स्टेडियम के एक कोने में खड़े कुछ बच्चे ट्रॉफी को बिना पलक झपकाए देख रहे थे। शायद वे खुद को किसी फाइनल मैच में खेलते हुए देख रहे थे। किसी ने धीमी आवाज में कहा, “एक दिन हम भी यही ट्रॉफी जीतेंगे।” यही पल इस आयोजन की असली सफलता थे, जब सपनों को नाम और आकार मिल जाता है।

डीसी बोले- देवघर में प्रतिभा की कमी नहीं
कार्यक्रम में डीसी नमन प्रियेश लकड़ा ने भावुक अंदाज में कहा कि यह आयोजन गर्व का विषय है। उन्होंने बताया कि देवघर के दो खिलाड़ी झारखंड टीम का हिस्सा रहे हैं और विजय झा का सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में मैनेजर की भूमिका निभाना जिले के लिए बड़ी बात है। डीसी ने कहा कि झारखंड के पास प्रतिभाओं का बड़ा समूह है और देवघर से लगातार अच्छे खिलाड़ी निकल रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि क्रिकेट के साथ-साथ हॉकी और तीरंदाजी में भी झारखंड के खिलाड़ी देश और दुनिया में नाम कमा रहे हैं। खेल भावना और कड़ी मेहनत ही सफलता की असली कुंजी है।
देवघर में अंतर्राष्ट्रीय स्टेडियम का सपना
डीसी ने मंच से यह भी संकेत दिया कि देवघर में अंतर्राष्ट्रीय स्तर का क्रिकेट स्टेडियम बनने का रास्ता अब साफ दिख रहा है। अगले एक महीने में बेहतर स्थल का चयन किया जाएगा। इसके बाद जेएससीए और बीसीसीआई के सहयोग से सभी मानकों के अनुरूप स्टेडियम का निर्माण होगा। यह खबर सुनते ही दर्शक दीर्घा में बैठे युवाओं के चेहरे खिल उठे।
एसपी का संदेश- मेहनत कभी बेकार नहीं जाती
एसपी सौरभ ने खिलाड़ियों से सीधे संवाद करते हुए कहा कि यह ट्रॉफी खिलाड़ियों के जोश और मेहनत का नतीजा है। उन्होंने 1983 विश्व कप का जिक्र करते हुए कहा कि जिस तरह उस जीत ने पूरे देश को प्रेरित किया, उसी तरह यह ट्रॉफी झारखंड की आने वाली पीढ़ियों के लिए रास्ता दिखाएगी। उन्होंने युवाओं से अभी से अगली जीत की तैयारी में जुट जाने की अपील की।
सौरभ तिवारी बोले- मैदान मिलेगा तो मेहनत रंग लाएगी
झारखंड स्टेट क्रिकेट एसोसिएशन के सचिव और अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी सौरभ तिवारी ने कहा कि जैसे ही मैदान उपलब्ध होगा, एक साल के भीतर उसे विकसित कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि संताल परगना में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। जरूरत है नियमित अभ्यास और धैर्य की। बच्चों को खेल के लिए परिवार का सहयोग भी उतना ही जरूरी है।
एक ट्रॉफी, कई कहानियां
कार्यक्रम के अंत में जब लोग धीरे-धीरे स्टेडियम से बाहर निकल रहे थे, तब भी ट्रॉफी के आसपास भीड़ बनी रही। कोई फोटो खिंचवा रहा था, कोई चुपचाप देख रहा था। शायद हर कोई अपने भीतर एक नई कहानी लिख रहा था। सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी उस दिन देवघर में सिर्फ दिखाई नहीं दी, उसने यहां के खिलाड़ियों को यह भरोसा भी दिया कि सपने अगर मैदान से जुड़े हों, तो एक दिन सच जरूर होते हैं।
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