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Pakur (Jaydev Kumar) : छोटे से जिले पाकुड़ में तकनीक और शिक्षा का मेल अब राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने लगा है। “प्रोजेक्ट दीप– डिजिटली एजुकेटिंग एंड एम्पावरिंग पाकुड़” ने गवर्नेंस नाउ 6th डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन अवॉर्ड–2026 में जिले का नाम रोशन किया। यह सिर्फ एक पुरस्कार नहीं, बल्कि उन हजारों बच्चों और युवाओं की मेहनत और उम्मीदों का सम्मान है जिन्हें यह परियोजना सीधे लाभ पहुंचा रही है।
डिजिटल शिक्षा की नई राह
पाकुड़ के गाँवों में रहने वाले छोटे बच्चों से लेकर कॉलेज के युवाओं तक, “प्रोजेक्ट दीप” ने उन्हें डिजिटल दुनिया से जोड़ने का काम किया है। अब बच्चे मोबाइल या कंप्यूटर के माध्यम से नई चीजें सीख सकते हैं, अपनी काबिलियत बढ़ा सकते हैं और अपनी पढ़ाई में पिछड़ने का डर नहीं रखते। सुमित, एक स्थानीय छात्र, कहते हैं, “पहले हमारे पास कंप्यूटर या इंटरनेट की सुविधा नहीं थी। अब मैं ऑनलाइन कक्षाओं और डिजिटल टेस्ट के माध्यम से अपनी पढ़ाई सुधार पा रहा हूँ। यह हमारे भविष्य को बदल रहा है।”
सीमित संसाधनों में बड़ी उपलब्धि
जिले में संसाधन सीमित हैं, फिर भी प्रशासन ने तकनीक के माध्यम से शिक्षा और कौशल विकास में बड़ी सफलता हासिल की। यह मॉडल ग्रामीण स्तर पर डिजिटल परिवर्तन की मिसाल बन चुका है। जिला सूचना एवं विज्ञान पदाधिकारी ने बताया, “हमारा लक्ष्य सिर्फ शिक्षा देना नहीं, बल्कि युवाओं को आत्मनिर्भर बनाना है। प्रोजेक्ट दीप ने बच्चों को डिजिटल उपकरणों और प्लेटफॉर्म के साथ सहज किया है, जिससे उनकी सीखने की क्षमता बढ़ी है।”
राष्ट्रीय मंच पर पहचान
16 जनवरी 2026 को नई दिल्ली में आयोजित पुरस्कार समारोह में जिला प्रशासन को “प्रोजेक्ट दीप” के लिए सम्मानित किया गया। डीसी मनीष कुमार ने कहा, “यह पुरस्कार हमारी टीम के समर्पण, नवाचार और दूरदर्शिता का नतीजा है। हम चाहते हैं कि पाकुड़ में डिजिटल शिक्षा हर बच्चे तक पहुँचे और उन्हें नए अवसर मिलें।”

टीमवर्क और प्रेरणा
इस परियोजना के पीछे केवल तकनीक नहीं, बल्कि एक पूरी टीम का जुनून है। अधिकारियों और शिक्षकों की मेहनत ने इस प्रोजेक्ट को जमीनी स्तर पर सफल बनाया। शिक्षिका रेखा देवी बताती हैं, “जब बच्चों की आंखों में उत्साह और आत्मविश्वास बढ़ता है, तो लगता है कि हमारी मेहनत सफल हो रही है। यही असली इनाम है।”
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