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Ranchi : झारखंड के बिजली क्षेत्र में काम कर रहे कई कामगारों के वेतन से कथित तौर पर की गई अवैध कटौती को लेकर मामला गरमा गया है। झारखंड ऊर्जा विकास श्रमिक संघ ने इस पर कड़ा विरोध जताते हुए प्रबंधन से तुरंत हस्तक्षेप की मांग की है। संघ के केंद्रीय अध्यक्ष अजय राय ने इस संबंध में Jharkhand Urja Vikas Nigam Limited के अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक को ईमेल के माध्यम से ज्ञापन भेजा है और पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है। संघ का कहना है कि राज्य के विभिन्न विद्युत सप्लाई क्षेत्रों और संचरण प्रक्षेत्रों में एजेंसी के माध्यम से काम कर रहे मजदूरों के वेतन से बिना जानकारी और सहमति के पैसे काटे गए हैं, जिससे कामगारों में काफी नाराजगी है।
वेतन से तीन हजार रुपये तक काटे जाने का आरोप
श्रमिक संघ के मुताबिक, गीतराज एजेंसी के माध्यम से काम कर रहे कई कामगारों के वेतन से दिसंबर 2025 और फरवरी 2026 के दौरान करीब तीन हजार रुपये तक की राशि काट ली गई। यह कटौती “ग्रुप इंश्योरेंस” और “एक्सीडेंटल इंश्योरेंस” के नाम पर की गई बताई जा रही है। संघ का कहना है कि कामगारों को पहले से इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई थी। न ही उनसे किसी तरह की लिखित सहमति ली गई। ऐसे में अचानक वेतन से इतनी राशि कटने से मजदूरों में असंतोष फैल गया है।
बिना सहमति कटौती करना नियम के खिलाफ
संघ के अध्यक्ष अजय राय ने कहा कि कामगारों के वेतन से इस तरह की कटौती करना पूरी तरह अनुचित है। उनका कहना है कि यह कदम Industrial Disputes Act, 1947 की भावना के भी खिलाफ है। उन्होंने बताया कि यदि किसी तरह की बीमा योजना लागू की जाती है तो पहले कामगारों को उसकी पूरी जानकारी देना और उनकी सहमति लेना जरूरी होता है। लेकिन इस मामले में एजेंसी ने ऐसी कोई प्रक्रिया नहीं अपनाई। इससे कामगारों के बीच अविश्वास की स्थिति बन गई है।
निष्पक्ष जांच और पैसे लौटाने की मांग
श्रमिक संघ ने प्रबंधन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यह स्पष्ट किया जाए कि आखिर किस आदेश के आधार पर कामगारों के वेतन से यह राशि काटी गई। साथ ही संघ ने यह भी मांग की है कि एजेंसी द्वारा की जा रही इस तरह की कटौती पर तुरंत रोक लगाई जाए और दिसंबर व जनवरी महीने में काटी गई रकम कामगारों के खाते में वापस कराई जाए।
सरकारी एजेंसी को काम देने की भी उठी मांग
संघ ने इस मुद्दे के साथ एक और मांग उठाई है। संघ ने झारखंड सरकार के वित्त विभाग के आदेश संख्या 478, दिनांक 17 फरवरी 2026 का हवाला देते हुए कहा है कि छोटे निजी ठेकेदारों की जगह सरकारी एजेंसी JAP-IT को ही काम दिया जाए। संघ का कहना है कि राज्य के कई विभागों में जैप आईटी पहले से सफलतापूर्वक काम कर रही है। यदि बिजली विभाग में भी उसी एजेंसी को काम दिया जाए तो पारदर्शिता और जवाबदेही बेहतर होगी।
प्रबंधन से जल्द कार्रवाई की उम्मीद
अजय राय ने उम्मीद जताई है कि प्रबंधन इस पूरे मामले को गंभीरता से लेगा और कामगारों के हित में जल्द फैसला करेगा। साथ ही जिन लोगों की वजह से यह कटौती हुई है, उनके खिलाफ भी उचित कार्रवाई की जाएगी। संघ का कहना है कि अगर समय रहते इस मुद्दे का समाधान नहीं हुआ तो कामगारों के बीच असंतोष और बढ़ सकता है।
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