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Home » बिहार के इस गांव में पानी के लिए हाहाकार, नल-जल योजना फेल
बिहार

बिहार के इस गांव में पानी के लिए हाहाकार, नल-जल योजना फेल

March 14, 2026No Comments4 Mins Read
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Kaimur : साफ और स्वच्छ पानी हर इंसान की बुनियादी जरूरत है। यही वजह है कि साफ पानी को संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का हिस्सा माना जाता है। बिहार सरकार की महत्वाकांक्षी नल-जल योजना का उद्देश्य भी यही है कि हर घर तक साफ पेयजल पहुंचे। लेकिन कैमूर जिले के कई इलाकों में आज भी लोग पानी के लिए परेशान हैं। भभुआ प्रखंड के रतवार पंचायत का भरीगांवा इसका एक बड़ा उदाहरण बन गया है, जहां नल तो लगे हैं लेकिन उनमें पानी नहीं आता।

पाइप बिछी, नल लगे… लेकिन पानी गायब

भरीगांवा गांव की गलियों में नल जल योजना के तहत पाइपलाइन बिछाई गई है और घर-घर नल भी लगाए गए हैं। लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि जब से पाइप बिछी है, तब से आज तक इन नलों से पानी नहीं आया।

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गांव के लोग आज भी अपनी प्यास बुझाने के लिए कुएं और तालाब के पानी पर निर्भर हैं। गर्मी शुरू होने से पहले ही गांव में भीषण जल संकट देखने को मिल रहा है।

700-800 घरों पर पानी का संकट

भरीगांवा के वार्ड नंबर 14 और 15 में करीब 700 से 800 घर हैं। इन घरों के लोगों को पीने के लिए साफ पानी नहीं मिल पा रहा है। मजबूरी में ग्रामीण प्रदूषित कुएं का पानी पीते हैं, जिससे कई तरह की बीमारियों का खतरा बना रहता है।

गांव वालों का कहना है कि गांव में सरकारी हैंडपंप भी नहीं हैं। कुछ निजी हैंडपंप जरूर हैं, लेकिन वहां से सभी को पानी भरने नहीं दिया जाता।

महिलाओं ने बताई पानी की परेशानी

गांव में जब इस समस्या को लेकर बातचीत की गई तो सुराही देवी, सोन मती देवी और शिवनाथ बिंद ने बताया कि गांव में पानी की भारी किल्लत है।

उनका कहना है कि साफ पानी नहीं मिलने से घर के लोगों की सेहत पर भी असर पड़ रहा है। कई बार प्रशासन से शिकायत की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला।

“हमें साफ पानी चाहिए” – ग्रामीणों की मांग

ग्रामीणों का कहना है कि आजादी के 70 साल से ज्यादा बीत जाने के बाद भी उनके गांव की मूलभूत समस्या खत्म नहीं हुई है।

लोगों की मांग है कि सरकार और प्रशासन जल्द से जल्द गांव में पेयजल की स्थायी व्यवस्था करे ताकि लोगों को राहत मिल सके।

वार्ड सदस्य ने बताई असली वजह

गांव के वार्ड सदस्य सुशील कुमार के अनुसार इलाके में जलस्तर करीब 300 फीट नीचे चला गया है। इस कारण हर कोई बोरिंग नहीं करा पाता।

उन्होंने बताया कि गांव में दो पानी की टंकियां नल जल योजना के तहत लगाई गई थीं। एक टंकी से कुछ हद तक पानी मिल रहा है, लेकिन दूसरी टंकी से आज तक पानी की सप्लाई शुरू नहीं हो पाई है।

उनका कहना है कि ठेकेदार की लापरवाही के कारण ग्रामीणों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।

लोक स्वास्थ्य विभाग ने क्या कहा

इस मामले में कैमूर के लोक स्वास्थ्य प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता रवि प्रकाश ने बताया कि जिले में बंद पड़े चापाकलों की मरम्मत के लिए टीम भेजी गई है।

विभाग के अनुसार जिले में 2164 बंद पड़े चापाकलों को ठीक करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए हर प्रखंड में चार-चार लोगों की टीम बनाई गई है।

उन्होंने बताया कि अगर किसी इलाके में चापाकल खराब है तो लोग 06189-223445 नंबर पर कंट्रोल रूम में सूचना दे सकते हैं।

एक महीने में मरम्मत का लक्ष्य

विभाग का कहना है कि गर्मी में जलस्तर नीचे जाने से कई चापाकलों का पानी बंद हो जाता है। ऐसे चापाकलों में पाइप, छड़ और वॉशर बदलकर उन्हें फिर से चालू किया जाएगा।

अधिकारियों का दावा है कि एक महीने के भीतर सभी खराब चापाकलों की मरम्मत पूरी करने की कोशिश की जाएगी।

पहाड़ी इलाके के कई गांवों में पानी की किल्लत

कैमूर जिले के अधौरा पहाड़ी क्षेत्र में करीब 108 गांव बसे हुए हैं। इनमें कई गांव ऐसे हैं जहां आज भी लोगों को शुद्ध पेयजल नहीं मिल पाता।

अब देखने वाली बात यह होगी कि जिला प्रशासन और संबंधित विभाग इस समस्या को कितनी जल्दी हल कर पाते हैं, ताकि भरीगांवा जैसे गांवों में रहने वाले लोगों को बूंद-बूंद पानी के लिए तरसना न पड़े।

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