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Home » झारखंड की मिट्टी से निकलेगी डिजिटल कहानी, दुनिया तक पहुंचेगी पहचान
झारखंड

झारखंड की मिट्टी से निकलेगी डिजिटल कहानी, दुनिया तक पहुंचेगी पहचान

May 11, 2026No Comments4 Mins Read
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Ranchi (Rudra Ranjeet) : झारखंड की पहचान लंबे समय तक उसके खनिज, जंगल और संघर्ष की कहानियों से जुड़ी रही। लेकिन अब तस्वीर बदल रही है। अब झारखंड अपनी खूबसूरती, संस्कृति, स्वाद और पर्यटन की कहानियों के जरिए नई पहचान बनाना चाहता है। इस बदलाव की झलक पतरातू की हसीन वादियों में देखने को मिली, जहां झारखंड पर्यटन विभाग ने ‘राज्य स्तरीय इन्फ्लुएंसर मीट 2026’ का आयोजन किया। होटल पर्यटन विहार में जुटे 80 से ज्यादा सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स सिर्फ मेहमान नहीं थे, बल्कि वे उस नई रणनीति का हिस्सा थे, जिसके जरिए झारखंड खुद को डिजिटल दुनिया में मजबूती से पेश करना चाहता है।

अब पोस्ट, रील और वीडियो से बनेगी झारखंड की पहचान

आज के दौर में लोग किसी जगह पर जाने से पहले सोशल मीडिया पर उसकी तस्वीरें देखते हैं, वीडियो देखते हैं, लोगों के अनुभव सुनते हैं। ऐसे में झारखंड पर्यटन विभाग ने समझ लिया है कि अब पर्यटन का प्रचार सिर्फ ब्रोशर, पोस्टर और विज्ञापनों से नहीं चलेगा। इसी सोच के साथ ‘इन्फ्लुएंसर एंगेजमेंट पोर्टल’ लॉन्च किया गया। यह पोर्टल राज्य के कंटेंट क्रिएटर्स और इन्फ्लुएंसर्स को पर्यटन विभाग से सीधे जोड़ने का माध्यम बनेगा। यानी अब झारखंड के युवा क्रिएटर्स सरकारी स्तर पर पर्यटन प्रचार का हिस्सा बन सकेंगे। यह सिर्फ एक पोर्टल नहीं, बल्कि झारखंड के पर्यटन प्रचार के तरीके में बड़ा बदलाव है।

सरकार की नई सोच, अपने लोगों से अपनी कहानी

कार्यक्रम में मौजूद पर्यटन मंत्री सुदिव्य कुमार ने जो बात कही, वह इस पूरी पहल का सार समझाती है। उनका कहना था कि झारखंड को दिखाने के लिए बाहर के बड़े शहरों के क्रिएटर्स को बुलाया जा सकता था, लेकिन इस मिट्टी की असली खुशबू, यहां के त्योहार, गांवों की सादगी, आदिवासी संस्कृति और स्थानीय जीवन को झारखंड के लोग ही सबसे बेहतर तरीके से समझते हैं। यही वजह है कि इस बार फोकस स्थानीय क्रिएटर्स पर रखा गया। सरकार का मानना है कि जब स्थानीय युवा अपने कैमरे से अपने राज्य को दिखाएंगे, तो कहानी ज्यादा सच्ची और असरदार होगी।

सिर्फ पर्यटन नहीं, युवाओं के लिए अवसर भी

इस पहल का एक बड़ा पहलू रोजगार और अवसर से भी जुड़ा है। आज बड़ी संख्या में युवा कंटेंट क्रिएशन, वीडियो मेकिंग, ट्रैवल ब्लॉगिंग और सोशल मीडिया के जरिए करियर बना रहे हैं। ऐसे में अगर सरकार उन्हें आधिकारिक मंच देती है, तो यह उनके लिए पहचान और कमाई दोनों का जरिया बन सकता है। सोचिए, कोई युवा नेतरहाट की सुबह, बेतला के जंगल, पतरातू वैली की सड़कें या झारखंड के पारंपरिक व्यंजन दुनिया को दिखा रहा हो, और उसी के जरिए पर्यटक यहां आने लगें। इसका फायदा सिर्फ उस क्रिएटर को नहीं, बल्कि होटल मालिक, स्थानीय दुकानदार, गाइड, ड्राइवर और छोटे कारोबारियों तक पहुंचेगा।

संवाद में सामने आए नए आइडिया

कार्यक्रम में सिर्फ मंचीय भाषण नहीं हुए। इन्फ्लुएंसर्स के साथ खुलकर बातचीत भी हुई। डिजिटल स्टोरीटेलिंग कैसे बेहतर हो, पर्यटन स्थलों को किस तरह नए अंदाज में पेश किया जाए, क्या स्थानीय संस्कृति को छोटे वीडियो के जरिए दुनिया तक पहुंचाया जा सकता है, ऐसे कई मुद्दों पर चर्चा हुई। कई इन्फ्लुएंसर्स ने सुझाव दिया कि झारखंड के कम चर्चित पर्यटन स्थलों को भी सामने लाया जाए। सिर्फ मशहूर जगहों तक सीमित रहने के बजाय गांवों, लोककला, हस्तशिल्प और खानपान को भी डिजिटल कंटेंट का हिस्सा बनाया जाए।

झारखंड की इमेज बदलने की कोशिश

सच यह है कि देश के कई हिस्सों में आज भी झारखंड की छवि पूरी तरह पर्यटन राज्य की नहीं है। बहुत से लोग इसे सिर्फ उद्योग, खनन या पुराने नक्सल प्रभावित इलाकों के नजरिए से देखते हैं। लेकिन झारखंड की असली तस्वीर इससे कहीं बड़ी है। यहां झरने हैं, पहाड़ हैं, जंगल हैं, धार्मिक स्थल हैं, लोककला है, आदिवासी संस्कृति है, और ऐसा खानपान है जो लोगों को अपनी ओर खींच सकता है। अब सरकार उसी तस्वीर को सामने लाना चाहती है।

पतरातू से निकली डिजिटल पर्यटन की नई राह

पतरातू की वादियों से निकला यह संदेश साफ है कि झारखंड अब खुद को नए अंदाज में पेश करना चाहता है। अगर यह पहल जमीन पर सही तरीके से आगे बढ़ी, तो आने वाले दिनों में सोशल मीडिया पर झारखंड सिर्फ खबरों में नहीं, बल्कि ट्रैवल डेस्टिनेशन के तौर पर भी ट्रेंड करता दिख सकता है। और तब शायद कोई पर्यटक यह न पूछे कि झारखंड में देखने लायक क्या है, बल्कि यह पूछे कि पहले कहां जाएं।

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