अपनी मनपसंद भाषा में पढ़ें :
Ramgarh (Dharmendra Pradhan) : मई की तपती दोपहर और थानों में रोजाना की तरह से चलता काम। पुलिसकर्मी अपनी-अपनी फाइलों और कागजों में मशगूल थे कि अचानक थाने के सामने सायरन बजाती गाड़ी आकर रुकी। गाड़ी से उतरे रामगढ़ के SP मुकेश लुनायत। एसपी को अचानक सामने देख थाने के भीतर एक पल के लिए सन्नाटा पसर गया और फिर अचानक से हड़कंप मच गया। मंगलवार, 19 मई 2026 को जिला कप्तान का यह कोई तय दौरा नहीं था, बल्कि यह था एक औचक निरीक्षण—एक ऐसा ऑन-द-स्पॉट टेस्ट, जिसने पुलिस महकमे की तैयारियों और सतर्कता की पोल खोलकर रख दी। एसपी ने एक-एक कर गोला और बरलंगा, दोनों थानों की नब्ज टटोली।

भूगोल की समझ से शुरू हुई क्लास
थाने के भीतर दाखिल होते ही एसपी मुकेश लुनायत ने सबसे पहले पुलिस अधिकारियों की जमीनी समझ को परखा। उन्होंने दोनों थाना क्षेत्रों के भौगोलिक परिदृश्य की जानकारी ली। पुलिस कप्तान का मानना था कि जब तक किसी पुलिसकर्मी को अपने इलाके के चप्पे-चप्पे, रास्तों और संवेदनशील इलाकों की भौगोलिक समझ नहीं होगी, तब तक वह अपराध पर लगाम नहीं लगा सकता। इसके बाद उन्होंने टेबल पर रखी फाइलों को पलटना शुरू किया और यह देखा कि थाने में तैनात अफसरों के बीच काम का बंटवारा किस तरह किया गया है।

धूल फांकते रिकॉर्ड और पेंडिंग वारंट पर खिंचाई
जब बात थानों के सिरिस्ता यानी ऑफिस रिकॉर्ड की आई, तो एसपी का रुख कड़ा हो गया। फाइलों के रख-रखाव को देखकर उन्होंने साफ कहा कि कागजी काम में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कोर्ट से जारी होने वाले वारंट, कुर्की और सम्मन की फाइलों को देखते हुए उन्होंने पूछा कि जब आदेश आ चुके हैं, तो कार्रवाई में देरी क्यों हो रही है? उन्होंने कड़े लहजे में निर्देश दिया कि लंबित वारंट का निष्पादन जल्द से जल्द होना चाहिए।

‘फरार अपराधी जेल में हों, आम जनता के काम समय पर हों’
निरीक्षण के दौरान एसपी ने साफ कर दिया कि पुलिस का खौफ अपराधियों में होना चाहिए, न कि आम जनता में। उन्होंने आदेश दिया कि जो अपराधी चार्जशीटेड हैं या लंबे समय से फरार चल रहे हैं, उनके ठिकानों का भौतिक सत्यापन किया जाए और उन्हें सलाखों के पीछे भेजा जाए। इसके साथ ही उन्होंने पुलिस के मानवीय चेहरे को भी याद दिलाया। एसपी ने कहा कि पासपोर्ट और चरित्र प्रमाण पत्र (कैरेक्टर सर्टिफिकेट) के वेरिफिकेशन के लिए आने वाले आम लोगों को परेशान न होना पड़े। इन कामों को बेवजह लटकाने के बजाय समय सीमा के भीतर पूरा किया जाए।

डिजिटल युग की पुलिसिंग का भी लिया जायजा
आज की पुलिसिंग सिर्फ लाठी और बंदूक तक सीमित नहीं है, वह डिजिटल भी हो चुकी है। एसपी मुकेश लुनायत ने थानों में चल रहे सीसीटीएनएस (CCTNS) सिस्टम को भी बारीकी से देखा और केस डायरी की ऑनलाइन प्रविष्टि की जांच की। इसके अलावा, नए कानूनों के तहत जरूरी ‘ई-साक्ष्य’ (डिजिटल सबूतों) के रख-रखाव की भी समीक्षा की गई।

दौरे के अंत में पुराने और पेंडिंग पड़े मुकदमों की फाइलों को खंगालते हुए एसपी ने सभी अनुसंधानकर्ताओं (IO) को सख्त हिदायत दी कि मामलों की जांच में तेजी लाएं और समय पर केस का निपटारा करें, ताकि पीड़ितों को जल्द से जल्द न्याय मिल सके। पुलिस कप्तान के इस अचानक हुए दौरे ने साफ संदेश दे दिया है कि रामगढ़ पुलिस को अब अपनी सुस्ती छोड़नी होगी और हर वक्त अलर्ट पर रहना होगा।
इसे भी पढ़ें : रामगढ़ की पहाड़ी पर फंदे से लटका मिला बेंगलुरु के DRDO कर्मी का शव, सनसनी

