अपनी मनपसंद भाषा में पढ़ें :
Pakur (Jaydev Kumar) : माहवारी यानी पीरियड्स को लेकर समाज में फैली झिझक, संकोच और गलत धारणाओं को तोड़ने की दिशा में पाकुड़ जिला प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। अब स्कूलों, पंचायतों और गांवों में खुलकर माहवारी स्वास्थ्य पर बात होगी। किशोरियों और महिलाओं को न सिर्फ बेहतर सुविधाएं मिलेंगी, बल्कि पुरुषों और लड़कों को भी इस अभियान का हिस्सा बनाया जाएगा, ताकि इस विषय को लेकर समाज में सकारात्मक सोच विकसित हो सके। इसी सोच के साथ डीसी मेघा भारद्वाज की अध्यक्षता में स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) और जल जीवन मिशन की समीक्षात्मक बैठक आयोजित की गई। बैठक में माहवारी स्वास्थ्य प्रबंधन, स्वच्छता और ठोस कचरा प्रबंधन को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। अधिकारियों को साफ निर्देश दिया गया कि योजनाओं का लाभ सीधे लोगों तक पहुंचे और हर स्तर पर जागरूकता बढ़ाई जाए।
माहवारी पर चुप्पी तोड़ने की पहल
ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी माहवारी को लेकर कई तरह की सामाजिक व सांस्कृतिक धारणाएं मौजूद हैं। कई किशोरियां इस विषय पर खुलकर बात नहीं कर पातीं, जिससे स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी बढ़ जाती हैं। इसी चुनौती को देखते हुए 28 मई से 4 जून तक जिले में “चुप्पी तोड़ो स्वस्थ रहो” अभियान चलाया जा रहा है। डीसी ने कहा कि यह केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं बल्कि सामाजिक बदलाव का अभियान है। इसका उद्देश्य महिलाओं और किशोरियों को माहवारी स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना और उनसे जुड़ी भ्रांतियों को खत्म करना है।

स्कूलों में सुविधाएं होंगी मजबूत
बैठक में विशेष रूप से बालिका विद्यालयों की सुविधाओं पर चर्चा हुई। उपायुक्त ने निर्देश दिया कि सभी कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों और अन्य बालिका स्कूलों में स्थापित नैपकिन वेंडिंग मशीन और इंसेनरेटर पूरी तरह कार्यशील रहें। उन्होंने कहा कि केवल मशीन लगाना पर्याप्त नहीं है। उनका नियमित रखरखाव भी जरूरी है, ताकि छात्राओं को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। कई बार तकनीकी खराबी या देखरेख के अभाव में ये मशीनें बंद हो जाती हैं, जिससे उनका उद्देश्य प्रभावित होता है। इसलिए संबंधित अधिकारियों को नियमित निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई।
बदलाव की शुरुआत घर से होगी
प्रशासन का मानना है कि माहवारी स्वास्थ्य को केवल महिलाओं का विषय मानकर नहीं देखा जा सकता। जब तक परिवार और समाज में इस विषय को लेकर सहज वातावरण नहीं बनेगा, तब तक जागरूकता का उद्देश्य पूरा नहीं होगा। इसी वजह से इस अभियान में पुरुषों और लड़कों को भी शामिल करने की रणनीति बनाई गई है। अधिकारियों का मानना है कि जब परिवार के सभी सदस्य इस विषय को समझेंगे, तब महिलाओं और किशोरियों को बेहतर सहयोग मिलेगा।
गांव-गांव में उतरेंगी जागरूकता की टीमें
अभियान को प्रभावी बनाने के लिए पंचायत और गांव स्तर पर व्यापक जागरूकता कार्यक्रम चलाने की तैयारी की गई है। इसमें आंगनबाड़ी सेविकाएं, स्वास्थ्य सहियाएं, स्वयं सहायता समूह की महिलाएं और जलसहिया दीदियां महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। ये टीमें ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर लोगों को माहवारी स्वच्छता, सुरक्षित सैनिटरी उत्पादों के उपयोग और स्वास्थ्य संबंधी सावधानियों की जानकारी देंगी। प्रशासन का उद्देश्य है कि यह संदेश हर घर तक पहुंचे।
जनप्रतिनिधियों को भी दी गई जिम्मेदारी
उपायुक्त ने कहा कि किसी भी सामाजिक अभियान की सफलता में स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। इसलिए प्रखंड और पंचायत स्तर पर आयोजित कार्यक्रमों में प्रमुख, उप-प्रमुख, मुखिया और अन्य जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। इसके अलावा सामाजिक संस्थाओं और स्वयंसेवी संगठनों को भी अभियान से जोड़ने की योजना बनाई गई है, ताकि जागरूकता का दायरा और व्यापक हो सके।
अब कचरे पर भी होगी सख्ती
बैठक में ठोस कचरा प्रबंधन का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। तेजी से बढ़ते कचरे और उसके निस्तारण की चुनौती को देखते हुए उपायुक्त ने अधिकारियों को सुप्रीम कोर्ट की वर्ष 2026 की गाइडलाइन के अनुरूप कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि कचरा प्रबंधन केवल सफाई कर्मचारियों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह जनभागीदारी से ही सफल हो सकता है। इसके लिए ऐसी व्यवस्था विकसित की जाए जिससे कचरे का वैज्ञानिक तरीके से संग्रहण, पृथक्करण और निस्तारण सुनिश्चित हो सके।
स्वच्छता और स्वास्थ्य को जोड़ने की कोशिश
विशेषज्ञों का मानना है कि स्वच्छता, सुरक्षित पेयजल और माहवारी स्वास्थ्य एक-दूसरे से जुड़े हुए विषय हैं। यदि किसी क्षेत्र में स्वच्छता की स्थिति बेहतर होती है तो वहां बीमारियों का खतरा भी कम होता है। पाकुड़ प्रशासन की यह पहल इसी व्यापक सोच का हिस्सा मानी जा रही है, जहां एक तरफ महिलाओं और किशोरियों के स्वास्थ्य पर ध्यान दिया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ स्वच्छ वातावरण तैयार करने की दिशा में भी कदम बढ़ाए जा रहे हैं।
स्वस्थ समाज की ओर बढ़ता पाकुड़
बैठक के अंत में डीसी मेघा भारद्वाज ने स्पष्ट किया कि योजनाओं का वास्तविक उद्देश्य लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी योजनाओं को समयबद्ध तरीके से लागू किया जाए और उनकी नियमित समीक्षा भी की जाए।
इसे भी पढ़ें : सीएम हेमंत की दो टूक… नदी-तालाब की जमीन पर कब्जा किया तो चलेगा बुलडोजर

