अपनी मनपसंद भाषा में पढ़ें :
New Delhi/Ranchi : राजधानी दिल्ली के प्रगति मैदान में बने आलीशान भारत मंडपम में इन दिनों पैर रखने की जगह नहीं है। वजह है वहां चल रहा महाकपड़ा मेला… ‘भारत टेक्स 2026’। वैसे तो यहां देश-दुनिया के एक से बढ़कर एक स्टॉल लगे हैं, लेकिन अगर आप झारखंड पवेलियन की तरफ रुख करेंगे, तो वहां नजारा कुछ अलग ही दिखेगा। 14 जुलाई से शुरू हुए इस चार दिवसीय मेले के तीसरे दिन यानी गुरुवार को भी यहां पैर रखने की जगह नहीं थी। क्या आम लोग, क्या विदेशी खरीदार और क्या बड़े-बड़े व्यापारी, हर कोई एक खास स्टॉल पर टकटकी लगाए खड़ा था। इस भारी भीड़ की वजह कोई चमचमाता हुआ कपड़ा नहीं, बल्कि झारखंड के कारीगरों द्वारा बनाई गई बांस की स्टील बोतल और मग हैं। पारंपरिक हुनर और आधुनिक जरूरत के इस अनोखे मेल ने मेले में सबका दिल जीत लिया है।
तकनीक और परंपरा का बेजोड़ संगम
आखिर इन बोतलों में ऐसा क्या खास है जो लोग इसे देखते ही खरीदने के लिए खिंचे चले आ रहे हैं? दरअसल, यह कमाल है झारखंड के जमसेदपुर जिले के बहरागोड़ा में स्थित ‘अनजनेया बांस क्लस्टर’ का। यहां के कारीगरों ने पुरानी सोच को छोड़कर कुछ नया करने की ठानी। उन्होंने बाहर से दिखने वाली खूबसूरत बांस की फिनिशिंग के अंदर स्टेनलेस स्टील को फिट किया है। नतीजा यह हुआ कि यह बोतल पर्यावरण के अनुकूल तो है ही, साथ ही इसमें रखा ठंडा या गर्म पानी करीब 12 से 14 घंटे तक अपने तापमान में बना रहता है। वहीं, इसी तकनीक से तैयार किया गया मग भी किसी भी चाय या कॉफी को 3 से 4 घंटे तक गर्म रख सकता है। आज के इस दौर में, जहाँ लोग प्लास्टिक को छोड़कर प्रकृति के करीब आ रहे हैं, यह बोतल एक परफेक्ट लाइफस्टाइल प्रोडक्ट बन गई है।
बहरागोड़ा के कारीगरों ने सीखे हाई-टेक हुनर
झारखंड की बांस शिल्पकला बहुत पुरानी है, लेकिन अनजनेया बांस क्लस्टर ने इसे एक नया जीवन दिया है। यहां के स्थानीय कारीगर अब सिर्फ हाथ से टोकरियां या चटाई नहीं बनाते, बल्कि वे लेजर कटिंग, लेजर एनग्रेविंग (बांस पर नक्काशी) और सीएनसी राउटिंग जैसी एडवांस मशीनों का इस्तेमाल कर रहे हैं। इस आधुनिक तकनीक की मदद से वे अंतरराष्ट्रीय स्तर के कस्टमाइज्ड उत्पाद तैयार कर रहे हैं। यहाँ बांस से बने खूबसूरत घरेलू सजावटी सामान, मजबूत फर्नीचर और रोजमर्रा के इस्तेमाल की चीजें बनाई जा रही हैं, जो सीधे तौर पर विदेशी बाजारों को टक्कर दे रही हैं।
‘लोकल’ से ‘ग्लोबल’ होने का सपना हो रहा सच
भारत टेक्स 2026 जैसे बड़े मंच पर झारखंड राज्य अपनी ‘लोकल टू ग्लोबल’ की सोच को हकीकत में बदलता हुआ दिख रहा है। पवेलियन में सिर्फ बांस की बोतलें ही नहीं, बल्कि राज्य की पहचान माना जाने वाला मशहूर तसर सिल्क, भौगोलिक संकेतक (GI Tag) प्राप्त उत्पाद, हस्तशिल्प और हथकरघा के बेहतरीन नमूने भी सजाए गए हैं। यह मेला बहरागोड़ा जैसे छोटे गांवों के कारीगरों के लिए सीधे वैश्विक बाजार का दरवाजा खोल रहा है। छोटे-छोटे उद्यमियों को अब अपनी पहचान बनाने के लिए बिचौलियों की जरूरत नहीं पड़ रही, वे खुद दुनिया के सामने अपना हुनर पेश कर रहे हैं।
झारखंड के लिए खुलेगा अवसरों का नया आसमान
इस वैश्विक मेले की अहमियत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इसमें दुनिया भर के 130 से ज्यादा देशों के करीब 6,000 अंतरराष्ट्रीय खरीदार और 1.3 लाख से अधिक व्यापारिक मेहमान पहुंचे हैं। झारखंड के छोटे और मझोले उद्योगों (MSME), बुनकरों और ग्रामीण कारीगरों के लिए यह किसी वरदान से कम नहीं है। झारखंड पवेलियन में उमड़ रही यह भीड़ सिर्फ तारीफ बटोरने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आने वाले समय में राज्य के लिए बड़े निर्यात आर्डर्स और निवेश की नई राहें भी तैयार कर रही है। साफ़ है कि झारखंड का यह पारंपरिक हुनर अब दुनिया भर के बाजारों में अपनी धाक जमाने के लिए पूरी तरह तैयार है।
इसे भी पढ़ें : झारखंड प्रतिभाओं की धरती है, यहां के युवाओं में आगे बढ़ने का जज्बा : सीएम हेमंत

