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Lucknow (Pawan Kumar) : राजधानी लखनऊ में जमीन से जुड़े एक बड़े फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। आरोप है कि सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज जमीन के पुराने बैनामों का सहारा लेकर एक किसान की जमीन हड़पने की साजिश रची गई। मामला तब खुला जब जमीन पर कब्जा करने की कोशिश का किसान ने विरोध किया। इसके बाद उसने पुलिस और आला अधिकारियों से शिकायत की। करीब आठ महीने तक चली जांच के बाद इंदिरा नगर थाने में धोखाधड़ी, कूटरचना, दस्तावेजों में हेरफेर और एससी-एसटी एक्ट की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस के मुताबिक मामले की जांच पुलिस उपायुक्त पूर्वी कार्यालय की ओर से कराई गई थी। जांच में कई ऐसे तथ्य सामने आए, जिनके आधार पर आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया गया।
सरकारी घोषित जमीन का हुआ था बैनामा
एफआईआर के अनुसार बख्शी का तालाब तहसील के रसूलपुर सादात गांव स्थित खसरा संख्या 712 को वर्ष 2005 में उप जिलाधिकारी द्वारा निष्क्रांत घोषित कर दिया गया था। यानी यह जमीन सरकारी रिकॉर्ड में अलग स्थिति में दर्ज थी। इसके बावजूद वर्ष 2007 में बाबूलाल, नीलकंठ और कमलेश नामक व्यक्तियों ने दो अलग-अलग बैनामों के जरिए करीब 12,040 वर्ग फीट जमीन शकुंतला सिंह के नाम बेच दी। इन बैनामों का पंजीकरण भी बख्शी का तालाब उप निबंधक कार्यालय में कराया गया। यहीं से पूरे मामले की कहानी शुरू हुई।
पांच साल बाद बदली गई खसरा संख्या
शिकायत के अनुसार करीब पांच साल बाद वर्ष 2012 में एक नया मोड़ आया। उस समय विक्रेता और खरीदार की ओर से दो शुद्धि पत्र तैयार किए गए। इनमें दावा किया गया कि मूल बैनामे में टाइपिंग की गलती हो गई थी और खसरा संख्या 239 की जगह 712 दर्ज हो गया था। इसके बाद इन शुद्धि पत्रों के आधार पर वर्ष 2013 में जमीन का दोबारा क्रय-विक्रय किया गया। आरोप है कि यहीं से दस्तावेजों में बदलाव कर जमीन के वास्तविक स्वरूप को बदलने का खेल शुरू हुआ।
2022 में चौहद्दी और रकबा भी बदल दिया गया
पुलिस जांच में सामने आया है कि वर्ष 2022 में एक बार फिर पुराने बैनामों का इस्तेमाल किया गया। इस बार आरोपियों ने चौहद्दी और क्षेत्रफल में भी बदलाव कर दिया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि दस्तावेजों को इस तरह तैयार किया गया कि उनका स्वरूप उसकी खाली पड़ी जमीन से मेल खाने लगे। बताया जा रहा है कि इसी आधार पर अक्षय सेवा संस्थान के अध्यक्ष डॉ. आर.एस. दुबे और कारोबारी रतन लालवानी के नाम से दो बैनामे पंजीकृत कराए गए। किसान का कहना है कि फर्जी दस्तावेजों के सहारे उसकी जमीन पर कब्जा करने की तैयारी चल रही थी।
कब्जे की कोशिश हुई तो खुला पूरा मामला
पीड़ित किसान को पूरे फर्जीवाड़े की जानकारी तब हुई जब कथित तौर पर उसकी जमीन पर कब्जा करने की कोशिश की गई। किसान ने इसका विरोध किया और जमीन से जुड़े दस्तावेजों की जांच शुरू कराई। जांच के दौरान उसे पता चला कि वर्षों से अलग-अलग दस्तावेजों, शुद्धि पत्रों और बैनामों के जरिए जमीन के रिकॉर्ड में बदलाव किया जाता रहा है। इसके बाद उसने पुलिस और वरिष्ठ अधिकारियों से न्याय की गुहार लगाई।
उप निबंधक कार्यालय की भूमिका पर भी सवाल
इस मामले में बख्शी का तालाब उप निबंधक कार्यालय की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ गई है। सवाल उठ रहा है कि जब खसरा संख्या 712 सरकारी रिकॉर्ड में निष्क्रांत दर्ज थी तो उसका बैनामा आखिर कैसे पंजीकृत हो गया। कानूनी जानकारों का मानना है कि यदि पंजीकरण के समय राजस्व रिकॉर्ड का ठीक से सत्यापन किया गया होता तो आगे चलकर इतना बड़ा विवाद खड़ा नहीं होता। अब जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि दस्तावेज तैयार करने और पंजीकरण कराने की प्रक्रिया में किन-किन लोगों की भूमिका रही।
दो नामजद, अन्य की तलाश जारी
इंदिरा नगर थाना पुलिस ने रतन लालवानी समेत दो अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस का कहना है कि पूरे षड्यंत्र में शामिल अन्य लोगों की पहचान की जा रही है। दस्तावेजों की फोरेंसिक और कानूनी जांच भी कराई जा रही है।
डीसीपी बोले- किसी को नहीं मिलेगी राहत
डीसीपी पूर्वी ने बताया कि मामले में एफआईआर दर्ज कर ली गई है और जांच तेजी से आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि जो भी व्यक्ति इस षड्यंत्र में शामिल पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा और जल्द ही आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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