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Muzaffarpur/Sitamarhi : पुलिस की वर्दी पहनकर कानून की रक्षा करने की जिम्मेदारी निभाने वाले एक ASI को आखिरकार अपने कृत्य की कीमत चुकानी पड़ी। एक महिला को शादी का सपना दिखाकर तीन साल तक उसका यौन शोषण करने वाले ASI शांति प्रकाश कुजूर को बिहार पुलिस ने सेवा से बर्खास्त कर दिया है। तिरहुत रेंज के डीआईजी चंदन कुशवाहा ने विभागीय जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद यह कड़ा फैसला लिया।
मामला उस समय का है जब शांति प्रकाश कुजूर सीतामढ़ी जिले के महिन्दवारा थाना में तैनात थे। इल्जाम है कि उन्होंने एक महिला से नजदीकी बढ़ाई और शादी का भरोसा देकर उसके साथ लगातार शारीरिक संबंध बनाए। महिला को लंबे समय तक उम्मीद रही कि दोनों का रिश्ता शादी तक पहुंचेगा, लेकिन समय बीतने के साथ उसे एहसास हुआ कि उसके साथ छल किया गया है।
जब भरोसा टूटा तो पहुंची थाने
महिला ने आखिरकार हिम्मत जुटाई और पुलिस के पास शिकायत लेकर पहुंची। उसने आरोप लगाया कि शादी का वादा करके उसके साथ वर्षों तक शारीरिक संबंध बनाए गए। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए 3 दिसंबर 2021 को पुपरी थाना में दुष्कर्म का मामला दर्ज किया गया। एफआईआर दर्ज होते ही पुलिस हरकत में आई और आरोपी एएसआई को गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तारी के बाद उसे न्यायिक हिरासत में भेजा गया। मामले की जांच पूरी होने पर उसके खिलाफ अदालत में आरोप पत्र भी दाखिल किया गया।
जेल जाने के बाद विभाग ने भी दिखाई सख्ती
आपराधिक मामला दर्ज होने के बाद पुलिस विभाग ने भी अलग से कार्रवाई शुरू की। 17 फरवरी 2022 को शांति प्रकाश कुजूर को निलंबित कर दिया गया। इसके साथ ही उनके खिलाफ विभागीय जांच बैठाई गई। सीतामढ़ी के तत्कालीन डीएसपी (मुख्यालय) नजीब अनवर को जांच अधिकारी बनाया गया। जांच के दौरान शिकायतकर्ता महिला के बयान, उपलब्ध साक्ष्यों और अन्य दस्तावेजों की बारीकी से पड़ताल की गई।
जांच रिपोर्ट ने बढ़ाई मुश्किलें
कई चरणों तक चली विभागीय जांच के बाद जांच अधिकारी ने अपनी रिपोर्ट में ASI को आरोपों का दोषी माना। रिपोर्ट में कहा गया कि महिला द्वारा लगाए गए आरोपों की पुष्टि होती है और संबंधित पुलिस पदाधिकारी का आचरण सेवा नियमों के विपरीत है। इसके बाद सीतामढ़ी के एसपी ने भी जांच रिपोर्ट से सहमति जताई और कड़ी सजा की अनुशंसा करते हुए मामला तिरहुत क्षेत्र के डीआईजी कार्यालय को भेज दिया।
डीआईजी बोले- ऐसे लोगों की वर्दी में जगह नहीं
डीआईजी चंदन कुशवाहा ने जारी आदेश में कहा है कि पुलिस विभाग एक अनुशासित संगठन है और यहां कार्यरत हर अधिकारी व कर्मी का चरित्र और आचरण भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है जितना उसका कामकाज। आदेश में स्पष्ट कहा गया कि नैतिक अधमता और भ्रष्ट आचरण जैसे गंभीर आरोप साबित होने के बाद ऐसे व्यक्ति को पुलिस सेवा में बनाए रखना न तो विभाग के हित में है और न ही समाज के लिए उचित है। इससे आम लोगों का पुलिस पर भरोसा कमजोर पड़ सकता है और संगठन के भीतर भी गलत संदेश जाता है।
चार साल तक चली कार्रवाई, आखिरकार गई नौकरी
महिला की शिकायत से शुरू हुई कार्रवाई करीब साढ़े चार साल तक चली। इस दौरान आरोपी ASI को पहले गिरफ्तार किया गया, फिर निलंबित किया गया और विभागीय जांच कराई गई। सभी स्तरों पर आरोप सही पाए जाने के बाद आखिरकार आज यानि 9 जून 2026 को एएसआई को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। डीआईजी का साफ संदेश है कि वर्दी की आड़ में कानून तोड़ने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
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