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Patna : बिहार में सरकारी ठेकों में कथित कमीशनखोरी, भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े बहुचर्चित रिशु श्री प्रकरण में जांच एजेंसियों की कार्रवाई लगातार तेज होती जा रही है। विशेष निगरानी इकाई (एसवीयू) ने इस मामले में अब तक वित्त विभाग की संयुक्त सचिव मुमुक्षु चौधरी, पूर्व मुख्य अभियंता तारिणी दास और इंजीनियर उमेश कुमार सिंह को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं, इस पूरे मामले में नाम आने के बाद आईएएस अधिकारी संजीव हंस की गिरफ्तारी के लिए भी छापेमारी तेज कर दी गई है। जांच एजेंसियों का दावा है कि यह मामला सिर्फ एक ठेकेदार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें अधिकारियों और ठेकेदारों के बीच एक मजबूत गठजोड़ काम कर रहा था। आरोप है कि इसी नेटवर्क के जरिए सरकारी ठेकों के आवंटन में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां की गईं और बदले में करोड़ों रुपये का लेनदेन हुआ।
अधिकारियों और ठेकेदारों के गठजोड़ की जांच
जांच एजेंसियों के मुताबिक, ठेकेदार रिशु श्री को केंद्र में रखकर एक ऐसा तंत्र बनाया गया था, जिसके जरिए विभिन्न विभागों में सरकारी ठेकों का आवंटन प्रभावित किया जाता था। आरोप है कि प्रभावशाली पदों पर बैठे कुछ अधिकारियों ने अपने अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए रिशु श्री की कंपनियों को फायदा पहुंचाया। बदले में कथित तौर पर भारी कमीशन लिया गया। जांच में यह भी सामने आया है कि इस रकम को सीधे तौर पर रखने के बजाय अलग-अलग कंपनियों और वित्तीय लेनदेन के जरिए वैध दिखाने की कोशिश की गई। एजेंसियां अब इसी नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हैं।
मुमुक्षु चौधरी पर क्या हैं आरोप
इस मामले में गिरफ्तार वित्त विभाग की संयुक्त सचिव मुमुक्षु चौधरी के खिलाफ जांच एजेंसियों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। दावा किया गया है कि सीतामढ़ी और सहरसा में नगर आयुक्त के रूप में तैनाती के दौरान उन्होंने रिशु श्री से जुड़ी कंपनियों को अनुचित लाभ पहुंचाया। जांच एजेंसियों का कहना है कि इसके बदले उन्हें मोटी रकम मिली। इससे पहले 27 मार्च 2025 को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने उनके ठिकानों पर छापेमारी की थी। उस दौरान करीब दो करोड़ रुपये नकद बरामद होने का दावा किया गया था। अब इन पैसों और कथित ठेका आवंटन के बीच संबंधों की भी जांच की जा रही है।
संजीव हंस की भूमिका पर एजेंसियों की नजर
इस पूरे प्रकरण में बिहार कैडर के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी संजीव हंस का नाम भी प्रमुखता से सामने आया है। जल संसाधन और ऊर्जा जैसे महत्वपूर्ण विभागों में शीर्ष पदों पर रह चुके संजीव हंस पर आरोप है कि उन्होंने अपने प्रभाव वाले विभागों में रिशु श्री की कंपनियों को करोड़ों रुपये के टेंडर दिलाने में भूमिका निभाई। सूत्रों के अनुसार, ईडी, सीबीआई और एसवीयू तीनों एजेंसियां अलग-अलग पहलुओं से उनकी भूमिका की जांच कर रही हैं। बताया जा रहा है कि फिलहाल वे एजेंसियों की पहुंच से बाहर हैं। उनकी गिरफ्तारी के लिए कई संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दी जा रही है।
इंजीनियरों की गिरफ्तारी से खुल रहे नए राज
पूर्व मुख्य अभियंता तारिणी दास और इंजीनियर उमेश कुमार सिंह की गिरफ्तारी को जांच में बड़ी सफलता माना जा रहा है। जांच एजेंसियों का मानना है कि तकनीकी विभागों में ठेकों की प्रक्रिया और भुगतान से जुड़ी कई अहम जानकारियां इन दोनों से मिल सकती हैं। तारिणी दास के ठिकानों पर पहले हुई ईडी की कार्रवाई में भी करोड़ों रुपये की नकदी मिलने का दावा किया गया था। इसके बाद से ही उनकी भूमिका जांच एजेंसियों के निशाने पर थी।
मनी लॉन्ड्रिंग का पूरा नेटवर्क खंगाल रही जांच एजेंसियां
जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि कथित रूप से हासिल की गई रकम को सीधे इस्तेमाल करने के बजाय उसे अलग-अलग माध्यमों से घुमाया जाता था। एजेंसियों को जानकारी मिली है कि रिशु श्री से जुड़ी एक शेल कंपनी के जरिए पैसों को वैध दिखाने का प्रयास किया गया। अब जांच एजेंसियां बैंक खातों, कंपनियों के दस्तावेजों, संपत्तियों और वित्तीय लेनदेन की बारीकी से पड़ताल कर रही हैं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।
आगे और बढ़ सकती है कार्रवाई
जांच एजेंसियों का कहना है कि गिरफ्तार अधिकारियों और इंजीनियरों से पूछताछ के आधार पर नए नाम सामने आ सकते हैं। कई अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में बताई जा रही है। फिलहाल एजेंसियों का फोकस फरार बताए जा रहे आईएएस अधिकारी संजीव हंस की तलाश और कथित मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क की पूरी परत खोलने पर है। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे इस बहुचर्चित प्रकरण में नए तथ्य सामने आने की संभावना भी बढ़ती जा रही है।
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