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Ramgarh (Dharmendra Pradhan) : आने वाले दिनों में रामगढ़ की स्वास्थ्य व्यवस्था में कई बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। जिले के अस्पतालों में मरीजों की बढ़ती संख्या और बेहतर इलाज की जरूरत को देखते हुए झारखंड सरकार ने स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। इसी कड़ी में स्वास्थ्य, चिकित्सा एवं परिवार कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने रामगढ़ पहुंचकर अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों का निरीक्षण किया। उनके दौरे के दौरान सिर्फ मौजूदा व्यवस्थाओं का जायजा ही नहीं लिया गया, बल्कि भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कई महत्वपूर्ण योजनाओं पर भी चर्चा हुई। इनमें ट्रॉमा सेंटर के विस्तार से लेकर सदर अस्पताल में 250 अतिरिक्त बेड की व्यवस्था और स्वास्थ्यकर्मियों के लिए आधुनिक आवासीय परिसर का निर्माण शामिल है।
ट्रॉमा सेंटर को और सक्षम बनाने की तैयारी
कांकेबार स्थित ट्रॉमा सेंटर लंबे समय से जिले और आसपास के क्षेत्रों के लोगों के लिए राहत का केंद्र बना हुआ है। सड़क दुर्घटनाओं और गंभीर मामलों में यहां बड़ी संख्या में मरीज पहुंचते हैं। निरीक्षण के दौरान अपर मुख्य सचिव ने ट्रॉमा सेंटर की मौजूदा सुविधाओं, उपलब्ध उपकरणों और आपातकालीन सेवाओं की जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि भविष्य में बढ़ने वाले दबाव को देखते हुए ट्रॉमा सेंटर की क्षमता बढ़ाने की दिशा में काम किया जाए। भवन के पहले तल पर अतिरिक्त निर्माण और मॉड्यूलर सिस्टम के उन्नयन को लेकर तकनीकी प्रस्ताव तैयार करने की बात कही गई। माना जा रहा है कि इन योजनाओं के लागू होने के बाद गंभीर मरीजों को और बेहतर तथा त्वरित इलाज मिल सकेगा।
सदर अस्पताल में सुविधाओं का विस्तार होगा
अपर मुख्य सचिव ने सदर अस्पताल रामगढ़ का भी विस्तृत निरीक्षण किया। उन्होंने गायनेकोलॉजी, ईएनटी, नेत्र रोग और डेंटल ओपीडी समेत कई विभागों का जायजा लिया। इसके अलावा ऑपरेशन थिएटर, एसएनसीयू, डायलिसिस सेंटर और अन्य महत्वपूर्ण इकाइयों की व्यवस्था को भी देखा। निरीक्षण के दौरान मरीजों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया गया। अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया गया कि अस्पताल में इलाज की गुणवत्ता और मरीजों की सुविधा दोनों को प्राथमिकता दी जाए।
250 नए बेड से मरीजों को मिलेगी बड़ी राहत
दौरे का सबसे महत्वपूर्ण पहलू सदर अस्पताल परिसर में प्रस्तावित 250 अतिरिक्त बेड क्षमता वाले जी+6 भवन को लेकर हुई चर्चा रही। वर्तमान में मरीजों की बढ़ती संख्या के कारण अस्पताल पर दबाव बढ़ रहा है। ऐसे में नए भवन के निर्माण से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। बैठक में निर्माण कार्य को जल्द शुरू करने, गुणवत्ता बनाए रखने और सभी तकनीकी मानकों का पालन सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि अतिरिक्त बेड उपलब्ध होने से मरीजों को बेहतर इलाज मिलेगा और रेफरल की समस्या भी काफी हद तक कम होगी।
डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के लिए भी बनेगी बेहतर व्यवस्था
स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता केवल भवन और मशीनों से नहीं, बल्कि डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की उपलब्धता से भी तय होती है। इसी को ध्यान में रखते हुए पुराने डॉक्टर और स्टाफ क्वार्टर की जगह आधुनिक सुविधाओं से युक्त 10 मंजिला आवासीय भवन बनाने की संभावना पर भी विचार किया गया। यदि यह योजना धरातल पर उतरती है तो डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों को बेहतर आवासीय सुविधा मिलेगी, जिससे उन्हें अस्पताल परिसर के आसपास रहने में सहूलियत होगी और मरीजों को भी इसका लाभ मिलेगा।
योजनाओं की प्रगति पर भी हुई समीक्षा
अस्पतालों के निरीक्षण के बाद अपर मुख्य सचिव ने सिविल सर्जन कार्यालय पहुंचकर स्वास्थ्य विभाग की विभिन्न योजनाओं और प्रशासनिक कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों से योजनाओं की प्रगति, चुनौतियों और भविष्य की जरूरतों के बारे में जानकारी ली। उन्होंने कहा कि सरकार की स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए और इसके लिए सभी स्तरों पर बेहतर समन्वय जरूरी है।
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