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Ranchi : कभी नौकरी की तलाश में बड़े शहरों की ओर रुख करने वाले झारखंड के युवाओं के लिए अब तस्वीर बदलती नजर आ रही है। राज्य में ऐसा माहौल तैयार करने की कोशिश हो रही है, जहां युवा नौकरी मांगने वाले नहीं, बल्कि नौकरी देने वाले बनें। इसी सोच को आगे बढ़ाने के लिए रांची में “स्टार्टअप इंडिया–TEJAS” पहल पर एक बड़ी राज्य स्तरीय कार्यशाला आयोजित की गई, जिसमें सरकार, उद्योग जगत, शिक्षण संस्थानों और स्टार्टअप्स से जुड़े लोगों ने एक साथ बैठकर झारखंड के भविष्य की नई तस्वीर पर चर्चा की। रैडिसन ब्लू में आयोजित इस कार्यक्रम में सिर्फ योजनाओं की बातें नहीं हुईं, बल्कि यह भी बताया गया कि गांव, कस्बों और छोटे जिलों में छिपे आइडिया को कैसे राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाया जा सकता है।
अब सिर्फ आइडिया नहीं, उसे जमीन पर उतारने की होगी तैयारी
कार्यक्रम के दौरान सबसे ज्यादा चर्चा जिस बात की हुई, वह थी स्टार्टअप्स की “एक्जीक्यूशन कैपेबिलिटी” यानी किसी आइडिया को सफल कारोबार में बदलने की क्षमता। JIIDCO के प्रबंध निदेशक वरुण रंजन ने साफ कहा कि आज के दौर में सिर्फ अच्छा आइडिया होना काफी नहीं है। असली चुनौती उस आइडिया को बाजार तक पहुंचाने और उसे टिकाऊ व्यवसाय में बदलने की है। उन्होंने कहा कि कई बार शानदार विचार होने के बावजूद युवा सही मार्गदर्शन और संसाधनों के अभाव में आगे नहीं बढ़ पाते। इसलिए अब झारखंड में ऐसी व्यवस्था विकसित की जा रही है, जहां स्टार्टअप्स को हर स्तर पर मदद मिले।

जिला स्तर से राष्ट्रीय मंच तक पहुंचेगा नवाचार
कार्यशाला में पेश की गई “डिस्ट्रिक्ट टू नेशनल इनक्यूबेशन लैडर” की अवधारणा को झारखंड के स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए बड़ा कदम माना जा रहा है। इस मॉडल का उद्देश्य यह है कि किसी जिले या छोटे शहर में जन्मा कोई नया विचार वहीं दबकर न रह जाए। उसे प्रशिक्षण, तकनीकी सहयोग, निवेशकों से संपर्क और बाजार तक पहुंच जैसी सुविधाएं मिलें, ताकि वह राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सके। सरकार का मानना है कि झारखंड के दूरदराज इलाकों में प्रतिभा और नवाचार की कोई कमी नहीं है। जरूरत सिर्फ सही मंच और मार्गदर्शन की है।
XLRI के साथ साझेदारी से खुलेगा नया रास्ता
कार्यक्रम के दौरान XLRI जमशेदपुर के साथ हुए समझौता ज्ञापन की भी चर्चा रही। इस साझेदारी के तहत राज्य स्तरीय इनक्यूबेशन सेंटर स्थापित किया जाएगा। इस सेंटर के जरिए स्टार्टअप्स को व्यवसायिक सलाह, मेंटरशिप, नेटवर्किंग और निवेश से जुड़ी मदद मिलेगी। खास बात यह है कि इसका लाभ सिर्फ रांची या बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जिला स्तर के नवाचारों को भी इससे जोड़ा जाएगा।
युवाओं को मिला बड़ा संदेश, नौकरी के साथ उद्यमिता पर भी सोचें
कार्यक्रम में मौजूद अधिकारियों और विशेषज्ञों ने युवाओं से कहा कि आज का दौर नए अवसरों का दौर है। डिजिटल तकनीक और इंटरनेट ने कारोबार शुरू करना पहले की तुलना में काफी आसान बना दिया है। हस्तकरघा, हस्तशिल्प एवं रेशम निदेशालय की निदेशक प्रीति रानी ने कहा कि स्टार्टअप्स केवल कारोबार नहीं हैं, बल्कि वे रोजगार पैदा करने और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने का माध्यम भी हैं। उन्होंने युवाओं से जोखिम लेने और नए क्षेत्रों में काम करने का आह्वान किया।
जब सफल उद्यमियों ने सुनाई अपनी कहानी
कार्यशाला का सबसे प्रेरक हिस्सा वह रहा, जब झारखंड के युवा उद्यमियों ने अपने अनुभव साझा किए। Elyven Technologies के नवनीत कुमार और Vardaan Enterprises की अनीशा पांडे ने बताया कि कारोबार शुरू करने का सफर आसान नहीं था। शुरुआती दौर में कई चुनौतियां आईं, लेकिन लगातार प्रयास और सीखने की इच्छा ने उन्हें आगे बढ़ने का रास्ता दिखाया। उनकी बातों ने कार्यक्रम में मौजूद युवाओं को यह भरोसा दिया कि अगर सोच मजबूत हो और मेहनत लगातार की जाए, तो सफलता हासिल की जा सकती है।
झारखंड के स्टार्टअप्स ने दिखाई अपनी ताकत
कार्यक्रम में छह स्टार्टअप्स ने अपने उत्पाद और तकनीकी समाधान भी प्रदर्शित किए। इनमें पर्यावरण संरक्षण, औद्योगिक उत्पाद, जल शोधन तकनीक, मसाला प्रसंस्करण और ड्रोन तकनीक जैसे क्षेत्र शामिल रहे। इन स्टार्टअप्स ने यह दिखाया कि झारखंड अब केवल खनिज संपदा के लिए ही नहीं, बल्कि नवाचार और तकनीक के क्षेत्र में भी अपनी पहचान बना रहा है।
बदल रही है झारखंड की तस्वीर
कुछ साल पहले तक स्टार्टअप्स की चर्चा मुख्य रूप से बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे या दिल्ली जैसे शहरों तक सीमित रहती थी। लेकिन अब झारखंड भी इस दौड़ में तेजी से आगे बढ़ रहा है। सरकार, शिक्षण संस्थानों और उद्योग जगत के साझा प्रयासों से ऐसा माहौल बनाने की कोशिश हो रही है, जहां युवाओं को अपने सपनों को साकार करने के लिए राज्य से बाहर जाने की जरूरत न पड़े।
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