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Ramgarh (Dharmendra Pradhan) : बोकारो जिले के महुआडांड़ थाना क्षेत्र में कथित अवैध कोयला खनन और उसके परिवहन को लेकर इन दिनों गांव-गांव और चौक-चौराहों पर चर्चाओं का बाजार गर्म है। स्थानीय लोगों का दावा है कि इलाके के कई हिस्सों में लंबे समय से कोयला निकालने का काम चल रहा है और यहां से निकला कोयला रामगढ़ जिले के गोला क्षेत्र सहित अन्य जगहों तक पहुंचाया जा रहा है। हालांकि इन दावों की अब तक किसी सरकारी एजेंसी ने आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन लगातार उठ रहे सवालों ने पूरे मामले को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
धवइया, दूधमटिया और जगेश्वर में क्या चल रहा है?
ग्रामीणों की मानें तो महुआडांड़ थाना क्षेत्र के धवइया, दूधमटिया, जगेश्वर समेत कई इलाकों में कथित तौर पर कोयला खनन की गतिविधियां संचालित होने की चर्चा है। बताया जाता है कि अलग-अलग स्थानों से निकाले गए कोयले को पहले सुरक्षित जगहों पर जमा किया जाता है। इसके बाद मौका देखकर ट्रकों और हाइवा वाहनों के जरिए दूसरे जिलों की ओर भेजा जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि इलाके में इस तरह की बातें कोई नई नहीं हैं। कई बार लोगों ने प्रशासनिक स्तर पर निगरानी बढ़ाने की मांग भी उठाई है, लेकिन अब तक स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है।
रात होते ही सड़कों पर बढ़ जाती है हलचल
स्थानीय लोगों के अनुसार दिन की अपेक्षा रात के समय इलाके की गतिविधियां ज्यादा चर्चा में रहती हैं। ग्रामीणों का कहना है कि देर रात कई भारी वाहन विभिन्न ग्रामीण मार्गों से गुजरते दिखाई देते हैं। दावा किया जा रहा है कि इन वाहनों में कोयला लोड रहता है। यदि स्थानीय लोगों की बातें सही साबित होती हैं तो यह सवाल भी खड़ा होता है कि आखिर इतनी बड़ी गतिविधियां संबंधित विभागों और निगरानी एजेंसियों की नजर से कैसे बच रही हैं। यही वजह है कि लोग पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।

गोला तक पहुंच रहा है कोयला!
इलाके में सबसे ज्यादा चर्चा इस बात को लेकर है कि महुआडांड़ क्षेत्र से निकला कथित कोयला रामगढ़ जिले के गोला क्षेत्र तक पहुंच रहा है। कुछ लोगों का दावा है कि वहां स्थित औद्योगिक इकाइयों और अन्य स्थानों पर इसकी सप्लाई की जा रही है। हालांकि इस संबंध में किसी उद्योग, प्रशासनिक अधिकारी या संबंधित विभाग की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। लेकिन लगातार हो रही चर्चाओं ने लोगों का ध्यान इस पूरे मामले की ओर जरूर खींचा है।
उछलकर सामने आ रहे कुछ नाम
स्थानीय स्तर पर चल रही चर्चाओं में ‘अग्रवाल’, ‘अंसारी’, रिजवान, मुख्तार और अनवर समेत कुछ नाम उछलकर सामने आये हैं। हालांकि यह स्पष्ट करना जरूरी है कि इन व्यक्तियों के खिलाफ लगाए जा रहे आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और न ही किसी सक्षम प्राधिकरण द्वारा इन्हें दोषी ठहराया गया है। पूरे मामले की सच्चाई जांच के बाद ही सामने आ सकती है।
मानसून में बढ़ जाता है जान का खतरा
खनन क्षेत्रों से जुड़े जानकारों का कहना है कि बारिश के मौसम में हालात और गंभीर हो जाते हैं। जमीन धंसने, खदानों में पानी भरने और जहरीली गैस बनने जैसी घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। झारखंड के विभिन्न कोयला क्षेत्रों में पहले भी कई हादसे हो चुके हैं, जिनमें लोगों की जान गई है। इसी वजह से स्थानीय लोग कहते हैं कि यदि कहीं भी नियमों के खिलाफ खनन हो रहा है तो उस पर तत्काल रोक लगनी चाहिए, ताकि किसी बड़े हादसे से बचा जा सके।
प्रशासनिक निगरानी पर उठ रहे सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि यदि क्षेत्र में बड़े पैमाने पर कोयला खनन और परिवहन जैसी गतिविधियां हो रही हैं तो इसकी जानकारी संबंधित विभागों को भी होनी चाहिए। लोगों का सवाल है कि आखिर निगरानी व्यवस्था कितनी प्रभावी है और यदि शिकायतें मिल रही हैं तो उन पर क्या कार्रवाई की गई है। हालांकि प्रशासन की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन क्षेत्र में इस मुद्दे को लेकर चर्चा लगातार तेज होती जा रही है।
उच्चस्तरीय जांच की मांग
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि आरोप सही हैं तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए और यदि आरोप बेबुनियाद हैं तो भी जांच के जरिए सच्चाई सामने आनी चाहिए।
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