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Ranchi : फादर्स डे पर अक्सर लोग अपने पिता के साथ तस्वीरें साझा करते हैं, उनकी यादों को ताजा करते हैं और उनके प्रति सम्मान जताते हैं। लेकिन झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन का इस बार का संदेश सिर्फ एक बेटे की भावनाओं तक सीमित नहीं रहा। यह उस रिश्ते की कहानी भी कहता है, जिसने एक बेटे को जननेता बनने की राह दिखाई। रविवार को अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर साझा किए गए पोस्ट में सीएम हेमंत सोरेन ने अपने पिता और झारखंड आंदोलन के पुरोधा शिबू सोरेन को याद करते हुए भावुक शब्द लिखे। उन्होंने कहा कि पिता केवल एक रिश्ता नहीं होते, बल्कि संघर्ष, साहस, संकल्प और संस्कार की ऐसी पाठशाला होते हैं, जहां से जीवन की सबसे बड़ी सीख मिलती है।
“लोगों का विश्वास ही सबसे बड़ी ताकत है”
सीएम हेमंत सोरेन के शब्दों में सिर्फ भावनाएं नहीं थीं, बल्कि उन मूल्यों की झलक भी थी जो उन्हें अपने पिता से विरासत में मिले। उन्होंने लिखा कि बाबा दिशोम गुरु शिबू सोरेन ने हमेशा सिखाया कि लोगों का विश्वास ही सबसे बड़ी ताकत है। यह वही सीख है, जिसने शिबू सोरेन को झारखंड की पहचान और अधिकारों की लड़ाई का बड़ा चेहरा बनाया। वर्षों तक चले संघर्ष, आंदोलन और राजनीतिक चुनौतियों के बीच उन्होंने आदिवासी, मूलवासी और वंचित समुदायों की आवाज बुलंद की। हेमंत सोरेन ने अपने पोस्ट में इसी विरासत का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य और लोगों के अधिकारों के लिए हर परिस्थिति में डटकर खड़ा रहना ही सच्ची सेवा है।
पिता केवल एक रिश्ता नहीं, बल्कि संघर्ष, साहस, संकल्प और संस्कार की वह पाठशाला हैं, जहाँ जीवन जीने का सबसे बड़ा ज्ञान मिलता है।
स्मृति शेष बाबा दिशोम गुरु शिबू सोरेन जी ने हमें हमेशा सिखाया कि लोगों का विश्वास ही सबसे बड़ी ताकत है और अपने राज्य और लोगों के अधिकारों के लिए हर… pic.twitter.com/DKsy3rNAHG
— Hemant Soren (@HemantSorenJMM) June 21, 2026
संघर्ष की विरासत, सेवा का रास्ता
राजनीति में आने वाले ज्यादातर नेताओं के लिए परिवार प्रेरणा का स्रोत होता है, लेकिन हेमंत सोरेन के लिए यह प्रेरणा एक आंदोलनकारी पिता के जीवन संघर्ष से निकली है। उन्होंने अपने संदेश में स्वीकार किया कि शिबू सोरेन के संघर्ष, त्याग, विचारों और आशीर्वाद ने ही उन्हें जनसेवा का रास्ता दिखाया। उनके इस बयान को सिर्फ एक श्रद्धांजलि नहीं, बल्कि उस राजनीतिक और सामाजिक विरासत की स्वीकारोक्ति भी माना जा रहा है, जिसे शिबू सोरेन ने अपने लंबे सार्वजनिक जीवन में खड़ा किया।
कविता में छलक पड़ा बेटे का स्नेह
अपने भावुक संदेश को और खास बनाते हुए मुख्यमंत्री ने कुछ पंक्तियां भी लिखीं। इन पंक्तियों में एक बेटे का सम्मान, प्रेम और गर्व साफ नजर आया। उन्होंने लिखा कि तपती धूप में बाबा बरगद जैसी छाया हैं और संघर्ष की राह में अटूट हौसला हैं। उन्होंने अपने पिता को अपनी सोच, अपने संस्कार और अपनी पहचान का आधार बताया। साथ ही यह भी कहा कि बाबा केवल उनके पिता नहीं, बल्कि पूरे समाज के स्वाभिमान हैं। इन पंक्तियों में राजनीतिक औपचारिकता कम और बेटे का अपनापन ज्यादा दिखाई देता है। सीएम हेमंत सोरेन ने पोस्ट के अंत में अपने पिता को अपना मार्गदर्शक और शिक्षक बताते हुए उन्हें शत-शत नमन किया।
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